किशाऊ बांध प्रोजेक्टः भाजपा ने सुक्खू सरकार से ये 10 सवाल पूछे

किशाऊ बांध प्रोजेक्टः भाजपा ने सुक्खू सरकार से ये 10 सवाल पूछे


शिमला. किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर हिमाचल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर परियोजना को लेकर तथ्यों को गलत ढंग से पेश करने और इसका श्रेय लेने का आरोप लगाया है. बिंदल ने कहा कि भाजपा किशाऊ परियोजना और छह राज्यों के बीच हुए समझौते का स्वागत करती है, लेकिन सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि समझौते में हिमाचल के जल अधिकारों, बिजली हिस्सेदारी और भविष्य के आर्थिक हितों को किस तरह सुरक्षित किया गया है.

15 सितंबर 2026 को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. केंद्र के आधिकारिक विवरण के मुताबिक परियोजना की जल घटक लागत का करीब 90 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष वित्तीय भार छह राज्यों के बीच साझा किया जाएगा. साथ ही हिमाचल के जल हिस्से को दिल्ली और राजस्थान को आवंटित करने पर सहमति बनी है.

बिंदल बोले- 135.69 करोड़ सालाना बचाने के लिए क्या खोया?

राजीव बिंदल ने कहा कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत 15,624 करोड़ रुपये है. उनके मुताबिक इसमें जल घटक की लागत 12,096 करोड़ और विद्युत घटक की लागत 3,528 करोड़ रुपये है. बिंदल का दावा है कि पहले हुए प्रावधान के अनुसार हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को विद्युत घटक की लागत 50-50 फीसदी वहन करनी थी. इस हिसाब से हिमाचल की हिस्सेदारी करीब 1,764 करोड़ रुपये बनती. बिंदल ने परियोजना की निर्धारित अवधि और इस निवेश को आधार बनाते हुए सवाल उठाया कि करीब 135.69 करोड़ रुपये सालाना के वित्तीय दायित्व को बचाने के लिए क्या हिमाचल ने अपने दीर्घकालिक जल अधिकारों और संभावित आर्थिक लाभों से समझौता किया है?

उन्होंने सरकार से पूछा कि जब परियोजना से हिमाचल को भविष्य में बड़ी आय होने की बात कही जा रही है, तो राज्य ने विद्युत घटक में निवेश करने का विकल्प क्यों नहीं चुना.

‘किशाऊ का श्रेय केंद्र सरकार को’

बिंदल ने कहा कि किशाऊ परियोजना दशकों से लंबित थी. उन्होंने परियोजना को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र के हस्तक्षेप के बाद ही छह राज्यों के बीच समझौता संभव हो पाया.केंद्र सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार भी 16 जून 2026 की बैठक गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें छह राज्यों के बीच सहमति बनी थी. इसके बाद 15 सितंबर को राज्यों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए.

‘CM 1200 करोड़ सालाना आय का आधार बताएं’

बिंदल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें हिमाचल को किशाऊ परियोजना से करीब 1,200 करोड़ रुपये सालाना आय होने की बात कही गई है. मुख्यमंत्री ने समझौते के बाद कहा था कि हिमाचल को परियोजना से करीब 1,200 करोड़ रुपये सालाना आय की उम्मीद है और राज्य को 211 मेगावाट बिजली मिलने की बात कही थी.

बिंदल ने सरकार से इस अनुमान का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है

  1. बिजली की बिक्री दर क्या होगी?
  2. हिमाचल को कितनी बिजली मिलेगी?
  3. उत्पादन लागत कितनी होगी?
  4. राज्य का वास्तविक नेट राजस्व कितना होगा?
  5. 1,200 करोड़ रुपये सालाना आय का अनुमान किस आधार पर लगाया गया है?
  6. जल अधिकारों पर बिंदल ने उठाया सवाल

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि किशाऊ परियोजना सिर्फ बिजली उत्पादन की परियोजना नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध हिमाचल के जल संसाधनों और भविष्य की जरूरतों से है. उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि समझौते के बाद हिमाचल के जल अधिकारों में क्या बदलाव हुआ है और यह व्यवस्था स्थायी है या किसी निर्धारित अवधि के लिए. केंद्र के आधिकारिक बयान में भी यह दर्ज है कि समझौते के तहत हिमाचल के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को आवंटित करने पर सहमति बनी है, जिसके बदले हिमाचल के पावर कंपोनेंट की लागत में हिस्सेदारी का प्रावधान किया गया है.

‘सिरमौर के किसानों की भविष्य की जरूरतों का क्या?’

बिंदल ने किशाऊ परियोजना को सिरमौर की कृषि और सिंचाई जरूरतों से भी जोड़ते हुए सरकार से विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की. उन्होंने पूछा कि टोंस नदी पर बनने वाली परियोजना के कारण सिरमौर में भविष्य में कितने क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिल सकती है. इसके साथ ही उन्होंने प्रस्तावित नहरों, सिंचाई क्षेत्र, कृषि उत्पादन में संभावित वृद्धि और किसानों की आय पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की.

रोजगार को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजना से हिमाचल के स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या नए समझौते में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की कोई बाध्यकारी व्यवस्था की गई है. परियोजना निर्माण और संचालन के दौरान कितने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे और उनमें स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी कितनी होगी, सरकार इसे भी स्पष्ट करे.

‘किशाऊ पर श्वेतपत्र जारी करे सरकार’

राजीव बिंदल ने सरकार से किशाऊ परियोजना पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है. उनका कहना है कि श्वेतपत्र में पूरी स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए.

बिंदल के मुताबिक श्वेतपत्र में खास तौर पर जानकारी मांगी.

  1. केंद्र और राज्यों का वित्तीय योगदान
  2. हिमाचल के जल अधिकार बिजली में हिमाचल की हिस्सेदारी परियोजना से अनुमानित आय
  3. सिंचाई सुविधाओं का दायरा स्थानीय युवाओं के रोजगार का प्रावधान
  4. विस्थापन और पुनर्वास की व्यवस्था समझौते की कानूनी और वित्तीय शर्तें

‘परियोजना के खिलाफ नहीं BJP’

बिंदल ने साफ किया कि भाजपा किशाऊ परियोजना के निर्माण या छह राज्यों के बीच हुए समझौते का विरोध नहीं कर रही है, उनका कहना है कि सवाल हिमाचल के दीर्घकालिक आर्थिक हितों और जल अधिकारों का है. किशाऊ परियोजना 15,624 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली बहुउद्देश्यीय परियोजना है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इससे करीब 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन और जल भंडारण की सुविधा विकसित होगी. परियोजना टोंस नदी पर हिमाचल-उत्तराखंड सीमा के पास प्रस्तावित है.



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