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Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के श्री रेणुका जी जू में अब बंगाल टाइगर की दहाड़ सुनाई देगी. नागपुर से रॉयल बंगाल टाइगर का एक जोड़ा 1800 किमी का सफर तय कर रेणुका जू पहुंचा है. करीब 10 साल पहले यहां पर टाइगर रखे गए थे, लेकिन फिर यहां पर उनकी मौत हो गई और अब दोबारा दो टाइगर यहां लाए गए हैं.
हिमाचल प्रदेश में करीब एक दशक के इंतजार के बाद रविवार को रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा रेणुका जू में पहुंच चुका है.
नाहन. हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के श्री रेणुका जी जू में अब बंगाल टाइगर की दहाड़ सुनने को मिलेगी. करीब एक दशक के इंतजार के बाद रविवार को रॉयल बंगाल टाइगर का जोड़ा रेणुका जू में पहुंच चुका है. कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच रविवार सायं नागपुर से टाइगर के इस जोड़े को यहां पहुंचाया गया.
दरअसल, नागपुर के बाला साहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान से रॉयल बंगाल टाइगर को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां लाया गया है.इन दोनों टाइगर ने नागपुर से श्री रेणुकाजी तक का लगभग 1800 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया है. करीब 43 घंटे चली इस लंबी यात्रा के दौरान वन्य प्राणी विभाग की विशेष टीम लगातार उनके साथ रही.
अरण्यपाल वन्य प्राणी विभाग डॉ शहनबाज अहमद ने कहा कि टाइगर एक्वायर करना हिमाचल के लिए फ्लैगशिप प्रोजेक्टर जो आखिरकार पूरा हुआ है. उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल प्रदेश की जु में टाइगर पहुंचे है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार के नियम अनुसार कई औपचारिकताएं टाइगर्स को लाने के लिए पूरी करनी पड़ी जिसके लिए उन्होंने महाराष्ट्र सरकार का भी आभार जताया.उन्होंने कहा कि वन विभाग की विशेष टीम द्वारा नागपुर से टाइगर्स को और रेणुका झील सुरक्षित पहुंचाया गया है.
2 वन्य प्राणी विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में टाइगर्स का यह जोड़ा की रेणुका जी में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. उप अरण्यपाल ने कहा कि एक नर और एक मादा टाइगर कोई यहां लाया गया है और उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां इनकी संख्या में इजाफा होगा.रेणुका जी मे टाइगर लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त बाड़ा तैयार किया गया है जिस पर 1.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए है तथा साथ ही एक आधुनिक वन्य प्राणी अस्पताल भी बनाया गया है.
हिमाचल प्रदेश वाइल्ड लाइफ विंग की टीम.
गौर रहे कि रेणुकाजी जू में विगत 2015 के बाद एशिया प्रजाति के लांयन का कुनबा समाप्त होने के बाद यहां लायन सफारी वीरान हो गई थी लगातार जू में शेरों को लाए जाने की मांग की जा रही थी शेर की उपलब्धता न होने के बाद सरकार ने यहां पर टाइगर को लाए जाने के लिए कवायद शुरू की जो आखिरकार अब रंग लाई. अहम बात है कि हिमाचल प्रदेश में शेर और बाघ नहीं होते है. हालांकि, यहां पर सिरमौर जिले में एक दो बार बाघ की मौजूदगी दर्ज हुई है. लेकिन यह उत्तराखंड की तरफ से हिमाचल में आते हुए कैमरों में कैद हुआ था.