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Ganesh Utsav 2026: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली झांकियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. कलाकार दो महीने पहले से मिट्टी की प्रतिमाएं और झांकियां तैयार करते हैं, जिन्हें देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं.
Ganesh Utsav 2026: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में गणेश उत्सव के दौरान भगवान श्री गणेश की भक्ति के साथ सामाजिक और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. शहर के चार अलग-अलग स्थानों पर पर्यावरण बचाने और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देने वाली झांकियां इन दिनों आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. झांकियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और कलाकारों की मेहनत की सराहना कर रहे हैं. बुरहानपुर में गणेश उत्सव का इतिहास भी खास माना जाता है. मान्यता है कि श्री लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रेरणा से यहां सार्वजनिक रूप से गणेश उत्सव की परंपरा को बढ़ावा मिला. तभी से शहर में गणेश उत्सव बड़े उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाता है.
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गणेश मंडलों की तरफ से हर साल अलग-अलग विषयों पर झांकियां तैयार की जाती हैं. इस बार पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए तैयार की गई झांकियों में मिट्टी से बनी भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है. शहर के चार स्थानों पर यह झांकियां देखने के लिए लोग पूछ रहे हैं. हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आ रहे हैं.
कलाकारों ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को कलाकार अमोल ने जानकारी देते हुए बताया कि हर उनकी तरफ से झांकियां मिट्टी से तैयार की जाती है और यह झांकियां 2 महीने पहले से बनाना शुरू कर देता हैं. जो लोगों को संदेश देने वाली होती है. इसलिए लोग देखने के जाते हैं तो वही रास्तीपुरा क्षेत्र में भी करने काशी का मणिकर्णिका घाट बनाया गया है तो वही इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र में रिद्धि सिद्धि फाउंडेशन की तरफ से भी शेषनाग की झांकी बनाई गई है. तो वही अमरनाथ की झांकी भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. कलाकारों के अनुसार मिट्टी की प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हैं और गणेश उत्सव के माध्यम से लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है.Ganesh Utsav 2026:
झांकियों में पर्यावरण को होने वाले नुकसान, पेड़-पौधों के महत्व, स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े संदेशों को आकर्षक तरीके से दिखाया गया है. श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक आयोजन के साथ यदि समाज और पर्यावरण से जुड़ा संदेश दिया जाए तो इसका असर बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों पर भी पड़ता है.
दो महीने पहले से करते हैं तैयारी
कलाकारों ने बताया कि इन झांकियों को तैयार करने में करीब दो महीने पहले से मेहनत शुरू करनी पड़ती है. डिजाइन तैयार करने से लेकर सामग्री जुटाने और अंतिम रूप देने तक कलाकार लगातार काम करते हैं. कई कलाकारों ने बताया कि उन्होंने झांकी और कलाकारी बनाने की तकनीक सोशल मीडिया के माध्यम से सीखी है. गणेश पंडालों में पहुंच रहे भक्त भगवान श्री गणेश के दर्शन के साथ इन झांकियों को भी देख रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर अपने घर लौट रहे हैं. इस तरह बुरहानपुर में गणेश उत्सव भक्ति के साथ जन जागरूकता का माध्यम भी बनता नजर आ रहा है.