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Rajkot Triplets Born at Home: गुजरात के राजकोट में 108 आपातकालीन सेवा की सूझबूझ से एक महिला ने घर पर ही तीन स्वस्थ बेटों को जन्म दिया. एम्बुलेंस के पहुंचने से पहले ही एक बच्चा हो चुका था, जिसके बाद ईएमटी जिग्नाशा लुहार ने डॉक्टर के मार्गदर्शन में बाकी दो बच्चों का सफल प्रसव कराया. सुरक्षित डिलीवरी के बाद मां और तीनों नवजात शिशुओं को आगे के इलाज के लिए जनाना अस्पताल में भर्ती कराया गया.
राजकोट में महिला ने घर पर तीन बच्चों को जन्म दिया.
जब जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ सेकंड का फासला हो, तब एक सही फैसला सब कुछ बदल देता है. गुजरात के राजकोट से एक ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली और दिल खुश कर देने वाली खबर सामने आई है. इस घटना ने हर किसी को हैरान कर दिया. टंकारा तालुका के एक छोटे से गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक घर में अचानक खुशियों का ऐसा महा-विस्फोट हुआ कि एक के बाद एक तीन नन्हे मेहमानों ने दुनिया में कदम रख दिए. हालात बेहद नाजुक थे, क्योंकि एम्बुलेंस के पहुंचने से पहले ही एक बच्चा पैदा हो चुका था और दो बच्चों का जन्म अभी बाकी था. ऐसे में 108 एम्बुलेंस की टीम ने जो कमाल दिखाया, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि असली हीरो वर्दी या अस्पताल के बाहर भी मौजूद होते हैं.
19 सितंबर की रात 8:48 बजे पडधरी की 108 आपातकालीन टीम को इमरजेंसी कॉल मिली. बिना एक भी सेकंड गंवाए ईएमटी जिग्नाशा लुहार और पायलट सुरेशभाई रॉकेट की स्पीड से मौके पर पहुंच गए. हालांकि, जब एंबुलेंस घर पहुंची, तब तक हालात तेजी से बदल चुके थे और एक बच्चा पहले ही दुनिया में आ चुका था. लेकिन असली गेम अभी बाकी था, क्योंकि दो बच्चों का जन्म होना अभी भी बाकी था.
जब मौके पर ही जिग्नाशा ने संभाली कमान
दो बच्चों का घर पर प्रसव कराना किसी खतरे के खिलाड़ी वाले स्टंट से कम नहीं था. ऐसे में ईएमटी जिग्नाशा लुहार ने कूल माइंड के साथ अपने मेडिकल ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया और सिचुएशन को पूरी तरह कंट्रोल में ले लिया. फोन पर ईआरसीपी डॉ. जोत्सना से लगातार सुपरविजन मिल रहा था, और टीम ने बिना किसी पैनिक के बाकी दोनों बच्चों की सेफ डिलीवरी करवा दी.
जनाना अस्पताल में मां और तीनों ट्रिपलेट्स की एंट्री
सक्सेसफुल डिलीवरी के बाद 108 की टीम ने बिना कोई रिस्क लिए मां और तीनों न्यूबॉर्न बेबी बॉयज को तुरंत जनाना अस्पताल पहुंचाया. मेडिकल टीम को सभी को सेफ हैंडओवर कर दिया गया, जहां फिलहाल मां और तीनों बच्चे एकदम फिट और फाइन हैं. इस पूरी सिचुएशन में पायलट सुरेशभाई का सपोर्ट और डॉक्टर जोत्सना का ऑन-कॉल गाइडेंस एकदम ऑन-पॉइंट रहा. कुल मिलाकर, यह इंसीडेंट 108 इमरजेंसी सर्विस के प्रो-लेवल डेडिकेशन का एक और सॉलिड सबूत बन गया है.