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Mahakal Bhasma Aarti Darshan 20 September 2026: श्रद्धालुओं ने आज (20 सितंबर 2026, दिन रविवार) भगवान श्री महाकालेश्वर के दिव्य दर्शन किए और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री महाकाल की भस्म आरती संपन्न कराई, जिससे मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो गया.
उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज (20 सितंबर 2026, दिन रविवार) तड़के रोजाना की भांति भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया. यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में हमेशा श्रद्धा और भक्ति-भाव के साथ संपन्न होती है, जिसमें देश-दुनिया से आने वाले भक्त शामिल होते हैं. भस्म आरती के समय मंदिर परिसर ‘जय महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठता है. हर रोज बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाता है और उन्हें भस्म अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है. इस दौरान श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर में अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं, जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुमकिन नहीं है.
श्रद्धालुओं ने आज ब्रह्म मुहूर्त में कतार में लगकर भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. मंदिर के पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भस्म आरती संपन्न कराई गई, जिससे मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया. भस्म आरती की यह विशेष परंपरा श्री महाकालेश्वर मंदिर की सबसे अनोखी और प्राचीन परंपराओं में से एक है. मान्यता है कि उज्जैन के राजा श्री महाकाल स्वयं इस आरती के माध्यम से अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनके जीवन के सभी कष्टों को हर लेते हैं.
भस्म आरती के नियमों में बदलाव
बताते चलें कि हाल ही में श्री महाकालेश्वर मंदिर की प्रसिद्ध भस्म आरती को लेकर मंदिर प्रशासन ने बुकिंग नियमों में बदलाव किया है. प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था शुरू की गई. अब कोई भी श्रद्धालु एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में केवल एक बार ही भस्म आरती में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकता है.
समान रूप से लागू होगा नियम
मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि भस्म आरती दर्शन का यह नया नियम सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू है. प्रोटोकॉल कोटे से आने वाले भक्त भी इस नियम का पालन कर रहे हैं. इससे ज्यादा से ज्यादा भक्तों को बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिल रहा है.
पहले कब लागू हुआ था नियम?
गौरतलब है कि तीन महीने में एक बार भगवान श्री महाकालेश्वर की भस्म आरती में शामिल होने का नियम पहली बार साल 2024 में लागू हुआ था. तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने श्रद्धालुओं से मिली शिकायतों के मद्देनजर यह फैसला लिया था. दरअसल शिवभक्तों ने कलेक्टर से शिकायत की थी कि कुछ लोग बार-बार बुकिंग कराकर भस्म आरती में शामिल हो रहे हैं, जिससे अन्य श्रद्धालुओं को महाकाल के दर्शन का मौका नहीं मिल रहा है. जिसके बाद कलेक्टर ने बुकिंग के नियमों में बदलाव का आदेश दिया था.