France energy crisis। France oil and gas supply। France may follow India Footprint। तेल-गैस सप्‍लाई पक्‍की करने के लिए कुछ भी… मैक्रों पकड़ रहे भारत

France energy crisis। France oil and gas supply। France may follow India Footprint। तेल-गैस सप्‍लाई पक्‍की करने के लिए कुछ भी… मैक्रों पकड़ रहे भारत


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तेल-गैस सप्‍लाई पक्‍की करने के लिए कुछ भी… मैक्रों पकड़ रहे भारत वाली राह?

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France Energy Crisis: अमेरिका के पीछे चलने वाले फ्रांस को अब अपनी गलती का अहसास हो रहा है. जैसे भारत ने टैरिफ की धमकी देने वाले अमेरिका को साफ कह दिया था कि देश की एनर्जी सप्लाई के लिए वह किसी भी हद तक जाएगा, अब फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के सामने भी कुछ-कुछ वैसी ही स्थिति हैं. ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से तेल-गैस का संकट ऐसा गहराया कि फ्रांस ने अपनी सप्लाई पक्की करने के लिए कमर कस ली है.

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फ्रांस तेल-गैस की भारी किल्‍लत से जूझ रहा है. (File Photo)

कभी सुपरपॉवर अमेरिका के इशारों पर आंख बंद कर नाचने वाले फ्रांस को अब अपनी सबसे बड़ी गलती का अहसास हो रहा है. भारत ने अमेरिका की टैरिफ वाली धमकियों को ठेंगा दिखाते हुए साफ कह दिया था कि देश की एनर्जी सप्लाई के लिए वह कुछ भी करेगा. फ्रांस की हालात ऐसे हैं कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत वाली राह पकड़ना चाहते हैं लेकिन चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते. ईरान युद्ध और अमेरिका की पार्टनरशिप के चक्कर में फंसकर फ्रांस ने अपनी अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा दिया था. ऊपर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई पर ऐसा भयानक ग्रहण लगा कि मैक्रों की नींद उड़ गई है. अब फ्रांस अपनी उसी गलती को सुधारने और सर्दियों से पहले गैस स्टॉक फुल करने के लिए हर हद पार करने को तैयार बैठा है.

अमेरिका की परछाई और ईरान युद्ध का पंगा
कहानियों में जैसा होता है, वैसा ही असल जिंदगी में भी है. फ्रांस ना चाहते हुए भी ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका का पार्टनर बना हुआ है, जिसका खामियाजा उसे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में उठाना पड़ रहा है. अमेरिका के पीछे चलने के चक्कर में फ्रांस की इकॉनमी और एनर्जी सप्लाई पर अब सीधा खतरा मंडराने लगा है. जैसे भारत ने अमेरिका को दो टूक सुनाया था कि भाई, हमारे देश की जनता पहले है, वैसे ही अब मैक्रों को भी समझ आ रहा है कि अंधाधुंध अलायंस के चक्कर में देश अंधेरे में नहीं डूब सकता.

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का लॉक होना और फ्रांस की धड़कनें तेज
गेम तब और ज्यादा खराब हो गया जब दुनिया के सबसे सेंसिटिव चोकपॉइंट स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर तलवारें लटक गईं और यह रूट लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया. इस रास्ते से दुनिया भर का तेल और गैस गुजरता है. इसके बंद होने से फ्रांस जैसे देशों में तेल-गैस की भयंकर किल्लत का संकट खड़ा हो गया है. इमैनुएल मैक्रों ने खुद माना है कि फ्रांस हर दिन करीब 6,00,000 टन डीजल की खपत करता है, जिसका आधा हिस्सा इम्पोर्ट किया जाता है. सप्लाई चैन हिलने के बाद अब फ्रांस ने गैस स्टॉक को तेजी से रिफिल करना शुरू कर दिया है.

‘अब हम कुछ भी करेंगे’
फ्रांस अब हर उस गलती को सुधार रहा है जो उसने पास्ट में की थी. मैक्रों ने साफ कह दिया है कि देश को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने डीजल, जेट ईंधन और नेचुरल गैस पर फोकस्ड होकर काम करना शुरू कर दिया है. फ्रांस सर्दियों से पहले अपने गैस रिजर्व्स को यूरोपियन टारगेट के हिसाब से फुल करने में जुट गया है. कुल मिलाकर बात साफ है कि जैसे भारत ने अपनी एनर्जी इंडिपेंडेंस को सबसे ऊपर रखा, वैसे ही अब फ्रांस भी समझ चुका है कि जिओपॉलिटिकल ड्रामे के बीच अगर खुद को बचाना है तो सप्लाई पक्की करने के लिए अमेरिका की परवाह किए बिना अपने दम पर कड़े फैसले लेने ही होंगे.



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