FASTag New Rule : फास्‍टैग OneTag लॉन्च, बैंक बदलना हुआ आसान, टैग वही रहेगा, लेकिन कैसे करेगा काम

FASTag New Rule : फास्‍टैग OneTag लॉन्च, बैंक बदलना हुआ आसान, टैग वही रहेगा, लेकिन कैसे करेगा काम


Agency:एजेंसियां

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FASTag यूजर्स के लिए OneTag सुविधा लॉन्च की गई है. अब बिना FASTag बदले बैंक या जारीकर्ता बदल सकेंगे. जानिए Rajmargyatra ऐप से बैंक बदलने का तरीका, KYC, वॉलेट में बचे पैसे और 6 महीने के कूलिंग-ऑफ नियम से जुड़ी पूरी जानकारी.

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फास्‍टैग में अब नया अपडेट आया है.

फास्‍टैग इस्तेमाल करने वाले वाहन मालिकों के लिए एक बड़ा बदलाव हुआ है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने OneTag पोर्टेबिलिटी सुविधा लॉन्च की है. इसके तहत अब वाहन मालिक अपना फास्‍टैग बदले बिना उससे जुड़े बैंक या जारीकर्ता संस्थान को बदल सकेंगे. यानी विंडशील्ड पर लगा वही RFID टैग आगे भी इस्तेमाल होता रहेगा और इसके लिए नया फास्‍टैग लेने की जरूरत नहीं होगी.

बैंक बदलने की पूरी प्रक्रिया एनएचएआई के राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए की जा सकेगी. इसके लिए वाहन मालिक को ऐप में अपना व्‍हीकल रजिस्‍ट्रेशन नंबर यानी VRN डालकर यह जांचना होगा कि उसका फास्‍टैग पोर्टेबिलिटी के लिए योग्य है या नहीं. इसके बाद मौजूदा बैंक की तरफ से छह अंकों का मोबाइल वेर‍िफ‍िकेशन आएगा. वेर‍िफ‍िकेशन पूरा होने पर यूजर नया बैंक चुनकर जरूरी प्रक्रिया पूरी कर सकेगा.

आईडी वही रहेगी

OneTag में बैंक बदलने के बाद फास्‍टैग आईडी वही रहेगी, यानी नया टैग लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि नए बैंक के साथ दोबारा KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी. यह प्रक्रिया राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए आगे बढ़ाई जाएगी. इसका मतलब है कि बैंक बदलने पर सिर्फ जारीकर्ता बदलेगा, वाहन पर लगा फास्‍टैग और उससे जुड़ी पहचान वही रहेगी.

पुराने फास्‍टैग के वॉलेट में अगर पैसे बचे हैं तो उनका क्या होगा? पोर्टेबिलिटी पूरी होने के बाद पुराना बैंक फास्‍टैग वॉलेट बंद कर देगा. अगर उसमें कोई रकम बची है तो लंबित टोल भुगतान और जरूरी शुल्क काटने के बाद बाकी पैसा यूजर को वापस कर दिया जाएगा. यानी बैंक बदलते समय फास्‍टैग में जमा रकम फंसने वाली नहीं है.

बैंक बदलने की सुव‍िधा नहीं

हालांकि OneTag इस्तेमाल करने के बाद तुरंत दोबारा बैंक बदलने की सुविधा नहीं मिलेगी. एक बार पोर्टेबिलिटी पूरी होने के बाद छह महीने का कूलिंग-ऑफ पीरियड रखा गया है. इस अवधि के दौरान यूजर अपना फास्‍टैग किसी दूसरे बैंक में फिर से ट्रांसफर नहीं कर सकेगा. सरकार का मकसद फास्‍टैग इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा विकल्प देना और बैंक बदलने की मौजूदा परेशानी को कम करना है.

कैसे काम करता है फास्‍टैग

फास्‍टैग में RFID तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिससे टोल प्लाजा पर वाहन के रुकने की जरूरत कम होती है और टोल की रकम डिजिटल तरीके से कट जाती है. इससे कैशलेस भुगतान, टोल प्लाजा पर कम भीड़ और यात्रा का समय बचाने में मदद मिलती है. भारत में 1 जनवरी 2021 से सभी कैटेग‍री M और N चार पहिया वाहनों के लिए फास्‍टैग अनिवार्य है. OneTag के आने के बाद अब वाहन मालिकों को बैंक की सेवा पसंद न आने पर पूरा फास्‍टैग बदलने के बजाय सिर्फ जारीकर्ता बैंक बदलने का विकल्प मिलेगा.



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