इस फसल ने जालोर के किसानों की बदली तकदीर, 100 से 3500 टन तक पहुंचा कारोबार
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Jalore Quinoa Business: जालोर के खेतों में पारंपरिक फसलों के साथ अब किनोवा की खेती भी किसानों के लिए नया बाजार तैयार कर रही है. कम पानी में तैयार होने वाली इस फसल का कारोबार करीब 100 टन से बढ़कर 3000 से 3500 टन तक पहुंच गया है. खेत से निकलने के बाद किनोवा की सफाई, धुलाई, सुखाने और ग्रेडिंग की जाती है, जिसके बाद इसे पैक कर देश और विदेश के बाजारों में भेजा जाता है. जालोर से तैयार किनोवा 15 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहा है. प्रोटीन, फाइबर, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों के कारण इसकी मांग हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच भी बढ़ी है. खेती के साथ इसकी प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बने हैं.
जालोर के खेतों में अब पारंपरिक फसलों के साथ किनोवा भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. कभी विदेशी बाजारों में ज्यादा इस्तेमाल होने वाली यह फसल अब जिले के कई इलाकों में किसानों के खेतों तक पहुंच चुकी है. कम पानी में तैयार होने वाली किनोवा की फसल ने जालोर की खेती को एक नया बाजार दिया है.
जिले में तैयार होने वाला किनोवा खेत से सीधे बाजार तक नहीं जाता, बल्कि इसकी प्रोसेसिंग के बाद इसे अलग-अलग क्वालिटी में तैयार किया जाता है. फसल की सफाई, धुलाई, सुखाने और ग्रेडिंग के बाद इसे पैक किया जाता है. इसके बाद यही किनोवा देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेशी बाजारों के लिए रवाना होता है.
किनोवा को दुनिया भर में एक पौष्टिक अनाज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसमें प्रोटीन और फाइबर के साथ आयरन, मैग्नीशियम और दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे सलाद, खिचड़ी, पुलाव और दूसरे हेल्दी व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसी वजह से हेल्थ कॉन्शियस लोगों के बीच भी इसकी मांग बढ़ी है.
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जालोर में किनोवा की खेती से सिर्फ किसानों को बाजार नहीं मिला, बल्कि इससे जुड़ी प्रोसेसिंग गतिविधियों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं. खेत में तैयार फसल जब प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचती है तो कई चरणों से गुजरकर एक्सपोर्ट क्वालिटी के उत्पाद में बदलती है. यानी इस फसल से खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग और सप्लाई का पूरा कारोबार जुड़ा हुआ है.
100 टन से शुरू हुआ जालोर का किनोवा कारोबार अब करीब 3000 से 3500 टन तक पहुंच चुका है. यहां से तैयार किनोवा 15 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहा है. जालोर के खेतों से शुरू हुआ यह सफर अब इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचकर जिले की कृषि को एक नई पहचान दे रहा है.