ये क्‍या चल रहा है भाई! एफपीआई ने शेयर बाजार से ₹23,676 करोड़ निकाले, IPO में अरबों रुपये झोंके

ये क्‍या चल रहा है भाई! एफपीआई ने शेयर बाजार से ₹23,676 करोड़ निकाले, IPO में अरबों रुपये झोंके


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FPI Outflow : आने वाले दिनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह काफी हद तक मध्य-पूर्व के हालात और ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव पर निर्भर करेगा. यदि तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो एफपीआई की बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है.

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पिछले महीने एफपीआई शुद्ध खरीदार रहे थे.

नई दिल्‍ली. भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPIs) दिलचस्प और हैरान करने वाली चाल चल रहे हैं. एक तरफ जहां विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट यानी शेयर बाजार से ताबड़तोड़ बिकवाली कर पैसे निकाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ में दिल खोलकर पैसा लगा रहे हैं. सितंबर के शुरुआती 19 दिनों में ही एफपीआई ने शेयर बाजार से ₹23,676 करोड़ की भारी-भरकम निकासी की है.
एफपीआई की यह निकासी इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि इससे पहले जुलाई और अगस्त के महीनों में विदेशी निवेशको ने भारतीय इक्विटी में शुद्ध खरीदारी की थी. लेकिन सितंबर शुरू होते ही ग्लोबल संकेतों के चलते उन्होंने अचानक अपना मूड बदल लिया और धड़ाधड़ पैसा निकालना शुरू कर दिया.

शेयर बाजार से इतनी बड़ी निकासी के बावजूद विदेशी निवेशक नए अवसरों को हाथ से जाने नहीं दे रहे हैं. प्राइमरी मार्केट में उनका रुझान लगातार सकारात्मक बना हुआ है. केवल सितंबर महीने में अब तक उन्होंने आईपीओ और प्राइमरी पेशकशों में लगभग ₹2,703 करोड़ का निवेश किया है. इसके साथ ही, साल 2026 में प्राइमरी मार्केट में FPIs का कुल निवेश ₹48,550 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है.

इसीलिए आईपीओ बाजार है गर्म

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, यही वजह है कि सेकेंडरी मार्केट में कमजोरी और सुस्ती के बावजूद प्राइमरी मार्केट में नई लिस्टिंग और इश्यू को लेकर जबर्दस्त उत्साह बना हुआ है.

ये 3 बड़े विलेन एफपीआई को डरा रहे हैं

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सेकेंडरी मार्केट में विदेशी निवेशकों के बिकवाली करने के पीछे तीन प्रमुख वैश्विक कारण रहे हैं-

  • कच्चे तेल में उबाल: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: अमेरिका में 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंचना इक्विटी मार्केट के लिए झटका साबित हुआ है.
  • फेड का सख्त रुख: यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी ने ग्लोबल लिक्विडिटी को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है.

बाजार पर दिखा दबाव, सेंसेक्स-निफ्टी फिसले

विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली का सीधा असर घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स पर दिखा. पिछले कारोबारी हफ्ते के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,346.40 के स्तर पर आ गया. हालांकि, इस उतार-चढ़ाव के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में कोई बड़ी गिरावट नहीं देखी गई और वे स्थिर बने रहे.



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