मंदिर के हर द्वार पर विराजे गणेश, एक प्रतिमा में छिपे हैं खास निशान
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बालोद के कपिलेश्वर मंदिर में गणेश उत्सव के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ रही है. यहां 13-14वीं शताब्दी की प्राचीन गणेश प्रतिमा विशेष आकर्षण है. मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से मनोकामना पूरी होती है. मंदिर की खासियत है कि परिसर के हर मंदिर के द्वार पर गणेशजी की प्रतिमा है. दाईं ओर की प्रतिमा में श्री यंत्र, जनेऊ, बाजूबंद, मोदक की आकृति बनी है
बालोद के प्राचीन कपिलेश्वर मंदिर परिसर में गणेश उत्सव के दौरान भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिल रही है. करीब 13वीं-14वीं शताब्दी की प्राचीन गणेश प्रतिमा यहां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि इस प्राचीन गणेशजी के सामने सच्चे मन से मन्नत मांगने पर मनोकामना पूरी होती है. गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, आरती और मोदक का भोग लगाया जाता है.
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के केयर टेकर विनोद कुमार साहू ने बताया कि कपिलेश्वर मंदिर छह मंदिरों का समूह है. यहां मुख्य मंदिर भगवान शिव का है, जहां जलहरी शिवलिंग स्थापित है. इसके अलावा परिसर में प्राचीन गणेश प्रतिमा के साथ दुर्गा मंदिर, राम-जानकी, राधा-कृष्ण, जगन्नाथ और संतोषी माता के मंदिर हैं. इनमें अधिकांश प्रतिमाएं बाद में मंदिर समितियों द्वारा स्थापित की गई हैं, जबकि गणेशजी की प्रतिमा प्राचीन धरोहर के रूप में विशेष महत्व रखती है.
13-14वीं शताब्दी की है प्रतिमा
विनोद कुमार साहू के अनुसार, कपिलेश्वर परिसर में मौजूद प्राचीन गणेशजी की प्रतिमा 13-14वीं शताब्दी की मानी जाती है. इसका निर्माण नागवंशी शासक के समय कराया गया था. यही वजह है कि गणेश उत्सव के दौरान यहां पूजा करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
हर मंदिर के द्वार पर गणेश प्रतिमा
कपिलेश्वर मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में से एक यह भी है कि परिसर के सभी मंदिरों के द्वार पर गणेशजी की प्रतिमा दिखाई देती है. मुख्य शिव मंदिर के दाएं और बाएं तरफ भी गणेशजी की प्रतिमाएं स्थापित हैं. इनमें दाईं ओर की प्रतिमा के पीछे श्री यंत्र, जनेऊ, लंगोट और बाजूबंद जैसी आकृतियां उकेरी गई हैं. प्रतिमा के सामने मोदक की आकृति भी बनी हुई है, जो गणेशजी से जुड़ी धार्मिक परंपरा को दर्शाती है.गणेश उत्सव के दौरान यहां भक्त भगवान गणेश की आरती करते हैं और मोदक का भोग चढ़ाकर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं. प्राचीन प्रतिमा, ऐतिहासिक स्थापत्य और धार्मिक आस्था के कारण कपिलेश्वर मंदिर का गणेश उत्सव विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.