भारतीय मुद्रा पर गांधी जी की धोती वाली तस्वीर कैसे छपी? मथुरा से है इसका नाता, जानें इतिहास

भारतीय मुद्रा पर गांधी जी की धोती वाली तस्वीर कैसे छपी? मथुरा से है इसका नाता, जानें इतिहास


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मथुरा एक ऐसा शहर जो 1947 ही नहीं बल्कि 1919, 1921 की यादें भी अपने अंदर आज भी सजोकर रखे हुए हैं. खादी के कपड़ों की जब याद आती है, तो मथुरा से एक गहरा नाता खादी के कपड़ों का रहा है. कपड़े ही नहीं बल्कि भारतीय मुद्रा पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जो तस्वीर बनी हुई है, उस तस्वीर पर आज भी मथुरा से जुड़ी हुई यादें उस पाल को याद दिलाती हैं. जिस पल गांधी जी ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के बाद स्वदेशी और खादी की धोती को धारण किया था.

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मथुरा: भारतीय मुद्रा पर गांधी जी की सफेद धोती वाली तस्वीर कहां से आई थी. यह तस्वीर कैसे भारतीय मुद्रा पर छपी. इतिहासकारों की माने तो मथुरा में 1921 में गांधी जी आए थे. अंग्रेजों के कपड़ों का बहिष्कार भी यहीं से शुरू हुआ. गांधी जी ने सर्वप्रथम खादी की सफेद धोती यहीं से पहनी थी. भारतीय मुद्रा पर मथुरा से पहनी हुई सफेद खादी की धोती की तस्वीरें आज भी दिखाई देती हैं.

मथुरा से जुड़ी हैं गांधी जी की यादें

मथुरा एक ऐसा शहर जो 1947 ही नहीं बल्कि 1919, 1921 की यादें भी अपने अंदर आज भी सजोकर रखे हुए हैं. खादी के कपड़ों की जब याद आती है, तो मथुरा से एक गहरा नाता खादी के कपड़ों का रहा है. कपड़े ही नहीं बल्कि भारतीय मुद्रा पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जो तस्वीर बनी हुई है, उस तस्वीर पर आज भी मथुरा से जुड़ी हुई यादें उस पाल को याद दिलाती हैं. जिस पल गांधी जी ने विदेशी कपड़ों का बहिष्कार करने के बाद स्वदेशी और खादी की धोती को धारण किया था. इतिहासकार डॉक्टर सुरेश चंद शर्मा से जब लोकल 18 की टीम ने गांधी जी से जुड़ी हुई यादों को जानना चाहा.

लोकल 18 से बातचीत करते हुए डॉक्टर सुरेश चंद्र शर्मा ने बताया कि गांधी जी की बहुत सी यादें मथुरा से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने बताया कि 1947 की जो क्रांति हुई थी उसकी चिंगारी भी मथुरा से उठी और 1947 से पहले 1919 और 1921 में जो अंग्रेजों के खिलाफ बगावत हुई वह भी मथुरा से जुड़ा हुआ है. सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा था 1921 का.

यहां से उठी विदेशी कपड़े बहिष्कार की चिंगारी

जब गांधी जी मधुरई से रेल से मथुरा आ रहे थे तो कुछ मजदूरों ने विदेशी कपड़े पहन रखे थे. उन्होंने ज़ब उन लोगों से पूछा की विदेशी कपड़े क्यों पहने हैं इसका फ़ायदा तो अंग्रेजी सरकार को होता है. मजदूरों ने गाँधी जी को जबाव दिया ये कपड़े हमें सस्ते पड़ते हैं. मथुरा स्टेशन पर उतरने के बाद सभा के लिए आए थे, तो उन्होंने देखा कि सभी लोगों ने स्वदेशी खादी के वस्त्र न पहनकर विदेशी वस्त्र धारण किए हुए हैं. गांधी जी ने जब पूछा कि सभी लोगों ने विदेशी वस्त्र क्यों धारण किए हैं, तो सभी लोगों का जवाब था की खाड़ी के वस्त्र से यह वस्त्र सस्ते हैं. इसलिए इनको हमने पहन रखा है. गांधी जी का दिमाग उसी समय बदला और उन्होंने अपने ऊपर जो कपड़े पहने हुए थे, उन्हें जलाकर खादी की स्वदेशी धोती धारण कर ली. अपनी यात्राओं को भी इस धोती से किया करते थे.

मथुरा से हुआ खादी के कपड़े अपनाने का आवाहन

डॉक्टर सुरेश चंद शर्मा ने यह भी बताया कि गांधी जी ने 1921 में जो खड़ी धरण की थी. वह उनके मरते दम तक साथ रही. आज जो हम भारतीय मुद्रा देखते हैं. उस मुद्रा पर जो फोटो लगा हुआ है, वह फोटो खादी के वस्त्रों में है. गांधी जी ने नमक यात्रा जब शुरू की थी तब उन्होंने मथुरा से ही पहनी उस धोती से खादी अपनाने का आवाहन किया था.



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