Mary Kom life lessons : कभी बच्चों की पढ़ाई, कभी घर की जिम्मेदारी और कभी ऑफिस का काम… इन सबके बीच क्या आपका भी कोई सपना धीरे-धीरे पीछे छूट गया है? मन में कुछ करने की इच्छा तो होती है, लेकिन खुद से यही कहकर बात टाल देते हैं कि अभी समय कहां है? अगर ऐसा है तो मैरी कॉम की जिंदगी आपको एक बार फिर अपने सपनों की तरफ देखने की हिम्मत दे सकती है.
मैरी कॉम की आत्मकथा अनब्रेकेबल (Unbreakable) सिर्फ एक बॉक्सर की सफलता की कहानी नहीं है. इसमें एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसने सीमित साधनों, मुश्किल हालात और कई तरह की चुनौतियों के बावजूद अपने लिए एक रास्ता बनाया. आगे चलकर शादी और बच्चों की जिम्मेदारियां भी उनकी जिंदगी का हिस्सा बनीं, लेकिन उनका सपना वहीं खत्म नहीं हुआ.
बचपन और शुरुआती जिंदगी में मिली मुश्किलों ने ही आगे चलकर उन्हें मजबूत बनाया.
यही वजह है कि मैरी कॉम की कहानी आज भी खासतौर पर उन महिलाओं से जुड़ती है, जो परिवार और करियर के बीच कहीं खुद को पीछे छोड़ देती हैं.
याद दिला दें कि मैरी कॉम का करियर भारतीय बॉक्सिंग की सबसे प्रेरक यात्राओं में गिना जाता है. मणिपुर के छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने बॉक्सिंग को अपना करियर बनाया और राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई. वह 6 बार की विश्व चैंपियन, 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला मुक्केबाज रही हैं. शादी और बच्चों के बाद भी उन्होंने रिंग में वापसी की और अपने करियर को आगे बढ़ाया. यही वजह है कि मैरी कॉम की कहानी सिर्फ मेडल जीतने की नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन, वापसी और अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करने की कहानी भी है.
उनकी किताब से निकली ये 10 सीख आपको याद दिलाती हैं कि जिम्मेदारियां जिंदगी का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे आपके सपनों की आखिरी मंजिल बन जाएं.
मैरी कॉम के जीवन की 10 बातों से लें सीख-
मुश्किलें आपको मजबूत बनाती हैं-
मैरी कॉम ने अपनी जिंदगी में आर्थिक तंगी और कई तरह की मुश्किलों का सामना किया. अपनी आत्मकथा Unbreakable में वह लिखती हैं, “Because I realize that the hardships I faced in my formative years are the foundation of my strength.” यानी बचपन और शुरुआती जिंदगी में मिली मुश्किलों ने ही आगे चलकर उन्हें मजबूत बनाया. जिंदगी में परेशानियां आएं तो उन्हें अपनी कमजोरी समझकर रुकने के बजाय उनसे सीख लेने की कोशिश करें. कई बार वही मुश्किलें हमें उस इंसान में बदल देती हैं, जो हम बनना चाहते हैं.
कम साधन हों तो भी सपना मत छोड़िए-
बड़े सपने देखने के लिए हमेशा बड़े साधनों की जरूरत नहीं होती. मैरी कॉम ने अपने शुरुआती बॉक्सिंग करियर में संसाधनों की कमी देखी. वह याद करती हैं, “Even when I went for the Nationals, my shoes were tattered – not that I let it bother me.” उनके जूते पुराने और खराब थे, लेकिन उन्होंने इसे अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया. यही बात उन महिलाओं के लिए भी बड़ी सीख है, जो पैसों, समय या सुविधाओं की कमी के कारण अपने सपने टाल देती हैं. शुरुआत जैसी भी हो, पहला कदम उठाना जरूरी है.
जिस काम से प्यार है, उसे पहचानिए-
मैरी कॉम के लिए बॉक्सिंग सिर्फ एक खेल नहीं था, बल्कि वह उनके जुनून का हिस्सा बन चुका था. वह लिखती हैं, “The truth is that I loved to play. My body was fit and my mind raring to go.” उन्हें खेलना पसंद था और उनका मन लगातार आगे बढ़ने के लिए तैयार रहता था. यही वजह थी कि उन्होंने मुश्किलों के बावजूद बॉक्सिंग को नहीं छोड़ा. आपकी जिंदगी में भी ऐसा कोई काम हो सकता है, जिसे करने में आपको थकान कम और संतुष्टि ज्यादा मिलती हो. उस पसंद को पहचानना अपने सपने की दिशा में पहला कदम हो सकता है.
बड़ी चुनौती देखकर घबराइए मत-
मैरी कॉम ने बॉक्सिंग रिंग में खुद से ज्यादा मजबूत और अनुभवी खिलाड़ियों का सामना किया. वह अपने सफर को याद करते हुए लिखती हैं, “I was the David who took on the Goliaths in the boxing ring – and I won, most of the time.” उनके लिए हर बड़ी चुनौती खुद को साबित करने का मौका थी. जिंदगी में भी जब कोई काम बहुत बड़ा या मुश्किल लगे, तो सिर्फ इसलिए पीछे नहीं हटना चाहिए कि सामने की चुनौती हमसे बड़ी है. कई बार हिम्मत से उठाया गया एक कदम ही रास्ता बदल देता है.
मेहनत के साथ हार न मानने की आदत रखिए-
मैरी कॉम की कहानी सिर्फ जीत और मेडल की कहानी नहीं है. उनके सफर में लगातार मेहनत, संघर्ष और कई तरह की चुनौतियां भी शामिल रहीं. उनकी आत्मकथा का मूल संदेश यही है कि लगातार मेहनत करने और हार न मानने की आदत इंसान को आगे ले जाती है. अगर किसी कोशिश में पहली बार सफलता नहीं मिली, तो उसे अपनी क्षमता का अंत न समझें. कई बार मंजिल तक पहुंचने के लिए एक ही कोशिश काफी नहीं होती.
सफलता में परिवार के योगदान को याद रखिए-
मैरी कॉम की जिंदगी में परिवार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही. अपने पति ओनलर के बारे में वह लिखती हैं, “People refer to Onler as ‘Mary’s husband’, but I know that behind Mary’s success, there is Onler.” यह बात बताती है कि किसी की सफलता के पीछे अक्सर परिवार का वह योगदान छिपा होता है, जो दुनिया को दिखाई नहीं देता. खासकर महिलाओं के लिए यह बात इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि घर और करियर को साथ संभालने में परिवार का सहयोग बड़ी भूमिका निभा सकता है.
माता-पिता के त्याग को कभी मत भूलिए-
सपना सिर्फ उस इंसान का नहीं होता जो उसे पूरा करता है. उसके पीछे परिवार के त्याग की कहानी भी होती है. मैरी कॉम लिखती हैं, “They had been denied a lot to make my dream possible and it was only fair that I repay them.” यानी उनके माता-पिता ने उनके सपने के लिए कई चीजों का त्याग किया था और मैरी इसे हमेशा याद रखती थीं. यह सीख हमें बताती है कि अपनी सफलता के सफर में उन लोगों को याद रखना भी जरूरी है, जिन्होंने हमारे लिए अपने हिस्से की खुशियां छोड़ीं.
मेहनत का फल मिलने में समय लग सकता है-
मैरी कॉम के सफर में सफलता एक दिन में नहीं आई. इसके पीछे लंबे समय तक की गई मेहनत, ट्रेनिंग और अनुशासन था. वह अपनी किताब में लिखती हैं, “What you sow, you will reap. What I sow, I will reap.” आसान शब्दों में कहें तो जैसा बीज बोएंगे, वैसा ही फल मिलने की उम्मीद रख सकते हैं. इसलिए अगर आपकी मेहनत का नतीजा तुरंत दिखाई नहीं दे रहा है, तो जरूरी नहीं कि कोशिश बेकार जा रही हो. लगातार किया गया काम धीरे-धीरे अपनी जगह बनाता है.
अपने सपनों को छोटा मत कीजिए-
मैरी कॉम ने जिस मुकाम का सपना देखा, वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें लगातार खुद को साबित करना पड़ा. उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि परिस्थितियां भले ही आपके सपने से छोटी हों, लेकिन आपका सपना परिस्थितियों के हिसाब से छोटा होना जरूरी नहीं है. अगर घर, नौकरी या जिम्मेदारियों के बीच आपने भी अपने किसी पुराने सपने को किनारे रख दिया है, तो उसे फिर से याद करने में कोई देर नहीं हुई. छोटे कदमों से ही बड़े सपनों की शुरुआत होती है.
‘असंभव’ शब्द से डरिए मत-
मैरी कॉम की पूरी यात्रा इस बात की मिसाल है कि रास्ता मुश्किल होने का मतलब यह नहीं कि मंजिल असंभव है. वह अपनी जिंदगी के संदेश को इन शब्दों में समेटती हैं, “My life is my message: nothing is impossible.” उनकी कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि परिस्थितियां आपको रोकने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन कोशिश छोड़ देना ही असली हार है. इसलिए जिंदगी में कोई सपना बहुत बड़ा लगे, तो कम से कम उसके लिए पहला कदम जरूर उठाइए.