सालभर पानी में डूबे रहते हैं ये हनुमान, सिर्फ 2 महीने होते हैं दर्शन
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Hanuman Temple Surrounded By Water On All Sides : पानी से घिरा यह छोटा सा मंदिर आज भी वीरवास की पहाड़ियों के नीचे अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. एक ओर साल के अधिकांश समय मंदिर जलमग्न रहता है, वहीं दूसरी ओर पानी कम होते ही यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है. यही वजह है कि बगीची वाले हनुमान का यह मंदिर करौली के उन धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलता.
राजस्थान में हनुमान जी के कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और उनकी अनोखी बनावट लोगों को आकर्षित करती है. लेकिन करौली में पवनपुत्र का एक ऐसा मंदिर है, जहां साल के अधिकांश समय हनुमान जी की प्रतिमा पानी के बीच रहती है. बरसात के दिनों में तो पूरा मंदिर ही पानी में डूब जाता है. इसके बावजूद भी यह मंदिर वर्षों से इसी तरह पानी के बीच खड़ा है.
यह अनोखा मंदिर करौली शहर से कुछ दूरी पर वीरवास गांव की पहाड़ियों के नीचे स्थित बताया जाता है. मंदिर सामान्य बनावट का है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अधिकांश समय पानी में डूबा रहना है. स्थानीय लोगों के अनुसार करीब चार दशक से वे इस मंदिर को इसी तरह पानी में घिरा देखते आ रहे हैं. बरसात के दिनों में आसपास पानी बढ़ने के साथ मंदिर पूरी तरह जलमग्न हो जाता है. इसके बावजूद स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर आज भी अपनी जगह पर मजबूती से खड़ा है.
मंदिर की प्रतिमा अपने आप में बेहद खास है. इसमें हनुमान जी के दोनों कंधों पर भगवान राम और लक्ष्मण विराजमान हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार इस प्रतिमा का संबंध रामायण में वर्णित अहिरावण प्रसंग से माना जाता है. मान्यता के अनुसार अहिरावण भगवान राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गया था. इसके बाद हनुमान जी ने वहां पहुंचकर दोनों को सुरक्षित वापस ले आये. इसी प्रसंग की झलक इस प्रतिमा में दिखाई देती है.
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वीरवास गांव निवासी भरत सिंह जादौन बताते हैं कि उन्होंने बचपन से ही इस मंदिर को ज्यादातर समय पानी में डूबा देखा है. बरसात के दिनों में मंदिर पूरी तरह पानी के अंदर चला जाता है, जबकि पानी कम होने पर भक्त यहां पहुंचकर हनुमान जी के दर्शन करते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि बगीची वाले हनुमान के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है. मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से श्रद्धालु पहुंचते हैं और हनुमान जी को चोला चढ़ाते हैं.
इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह भी है कि यहां भक्तों को सालभर आसानी से दर्शन नहीं हो पाते. स्थानीय लोगों के मुताबिक करीब 8 से 10 महीने तक मंदिर पानी से घिरा रहता है. गर्मियों में जब पानी का स्तर कम होता है, तभी श्रद्धालु मंदिर तक पहुंच पाते हैं. कई बार पानी घुटनों तक भरा रहने के कारण भक्तों को पानी के बीच से होकर मंदिर तक जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों के अनुसार साल में मुश्किल से दो से तीन महीने ही ऐसे होते हैं, जब मंदिर और प्रतिमा के दर्शन अपेक्षाकृत आसानी से किए जा सकते है.
स्थानीय निवासी अभिषेक सिंह जादौन बताते हैं कि हनुमान जी की इस तरह की प्रतिमा बहुत कम देखने को मिलती है. उनके अनुसार मंदिर में विराजमान प्रतिमा को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. मंदिर से जुड़ी पुरानी मान्यताओं के कारण यहां मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं की विशेष आस्था रहती है.