30000 करोड़ लागत और 5 घंटे में जबलपुर से बनारस, एक्सप्रेसवे से MP के इन जिलों को सीधा फायदा, बनेगा लाइफलाइन

30000 करोड़ लागत और 5 घंटे में जबलपुर से बनारस, एक्सप्रेसवे से MP के इन जिलों को सीधा फायदा, बनेगा लाइफलाइन


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Jabalpur Varanasi Expressway: जबलपुर से वाराणसी एक्सप्रेसवे 4-लेन रोड बनाने की तैयारी हो रही है. बताया जा रहा है कि इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा दो सांस्कृतिक शहरों के बीच पहुंच आसान होगी. इसके लिए करीब 30000 करोड़ रुपए की लागत आएगी, लेकिन इसके बनने से लोगों को काफी फायदा होगा. (सभी फोटो का सोर्स-AI से बनाए हुए)

Jabalpur Varanasi Expressway: मध्य प्रदेश के जबलपुर से अगर आप वाराणसी जाना चाहते हैं और बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है. भारत सरकार के ‘हाई-स्पीड इकोनॉमिक कॉरिडोर फेज-2’ के तहत बनने जा रहा जबलपुर-वाराणसी एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट वाराणसी-विशाखापट्टनम कॉरिडोर का हिस्सा है. इस एक्सप्रेसवे के बनने से दोनों राज्यों के लोगों का काफी फायदा होगा. दो सांस्कृतिक और धार्मिक शहरों तक लोगों की पहुंच आसान होगी.

अभी अगर आप जबलपुर से बनारस दो-लेन (2-lane) रास्तों से जाते हैं, तो यह दूरी 460 से 480 किलोमीटर तक पड़ती है. यह दूरी तय करने में करीब 10 से 12 घंटे तक समय लग जाता है. लेकिन नया एक्सप्रेसवे 4-लेन होगा. यहां पर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से फर्राटा भर सकेंगे. इससे जबलपुर से बनारस का सफर 5 से 6 घंटे का ही रह जाएगा. एक तरह से देखा जाए, तो यह सफर आधा ही रह जाएगा.

जबलपुर से वाराणसी एक्सप्रेसवे बनने से सिर्फ इन दो शहरों को ही रफ्तार नहीं मिलेगी, बल्कि मध्य प्रदेश के कटनी, मैहर, सतना, रीवा, प्रयागराज को भी फायदा मिलेगा. बल्कि मध्य प्रदेश के महाकौशल और विंध्य क्षेत्र से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश तक एक मजबूत ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करेगा.

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इस एक्सप्रेस-वे को एमपी और यूपी की नई लाइफलाइन भी बताया जा रहा है कि सड़कों पर इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा. व्यापारिक गतिविधियों को नई उड़ान मिलेगी और श्रद्धालुओं के लिए काशी जाना बेहद आसान हो जाएगा. बताया जा रहा है कि इसे 30000 करोड़ की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है.

प्रशासनिक मंजूरियों और प्रोजेक्ट की डिटेल रिपोर्ट (DPR) का काम अब अपने अंतिम चरण में है. NHAI और टेक्निकल टीमों ने रूट तय करने के लिए शुरुआती सर्वे भी शुरू कर दिया है. क्योंकि यह हाईवे दो राज्यों के कई जिलों से होकर गुजरेगा. इसलिए अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तेजी से काम चल रहा है.



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