डेटा सेंटर बहुत तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं. गोदाम के गोदाम कंप्यूटर सर्वर से भरे पड़े हैं. इन सर्वरों से लोगों के इस्तेमाल किए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स चलाए जाते हैं. डेटा सेंटरों को बड़ी मात्रा में बिजली, पानी और जमीन की जरूरत होती है. डेवलपर्स की बात करें तो सही योजना और निगरानी के बिना ही वे ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था, प्रकृति और समुदायों को दांव पर लगाकर अपनी जरूरतों को पूरा करेंगे.
बिना सोचे-समझे स्थापित किए गए डेटा सेंटर से बिजली की खपत बढ़ सकती है, पानी की सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है और ‘नेट जीरो’ के लक्ष्य को हासिल करने की गति धीमी हो सकती है. वहीं सही तरीके से स्थापित डेटा सेंटर इसके ठीक विपरीत काम कर सकते हैं, जिनमें बिजली ग्रिड को स्थिर करना, क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना भी शामिल है.
यह सोचना ही लुभावना लग सकता है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी इन समस्याओं को गायब कर सकती हैं. जैसे डेटा सेंटर को पानी के अंदर या फिर अंतरिक्ष में स्थापित कर देना. ये आखिरकार महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल इस मामले में छोटे पैमानों पर प्रयोग हुए हैं.
अब इसमें गौर करें तो ऑस्ट्रेलियाई सरकार वे नियम तैयार कर रही है जो एआई और डेटा सेंटरों को कंट्रोल करेंगे. ये नियम 2027 की शुरुआत में राष्ट्रीय कानून के रूप में पेश किए जा सकते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि डेटा सेंटर का भविष्य कैसा दिखता है? और इसे हकीकत बनाने के लिए उन नियमों में क्या शामिल करने की जरूरत है?
ऊर्जा एक महत्वपूर्ण संसाधन है
फेडेरल सरकार चाहती है कि नए डेटा सेंटर अपनी बिजली की मांग को नए रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोडक्शन के साथ जोड़ें, जिसे ‘सेंसिबल फार्मिंग अरेंजमेंट्स’ का समर्थन मिला हो. ‘सेंसिबल फार्मिंग अरेंजमेंट्स’ का अर्थ है रिन्यूएबल सप्लाई कम होने पर भरोसेमंद बैकअप पावर. अधिकांश राज्य और क्षेत्र इससे सहमत हैं. हालांकि, क्वींसलैंड और नॉर्दर्न टेरिटरी ऐसा चाहते हैं कि डेटा सेंटरों को शुरुआती सप्लाई और बैकअप दोनों के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग करने का लचीलापन मिले.
लागत और जलवायु के नजरिए से देखें तो ना तो संघीय और ना ही राज्य की सरकारों ने इसे पूरी तरह से सही पाया है. गैस और डीजल का उपयोग ऑस्ट्रेलिया के जलवायु उद्देश्यों और लागत कम रखने के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है. चाहे वह प्राथमिक हो या बैकअप आपूर्ति के रूप में ही क्यों ना हो. यह स्थानीय एयर क्वालिटी और सामुदायिक स्वास्थ्य के बारे में भी चिंताएं भी पैदा करता है.
ऑस्ट्रेलिया ने 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन का संकल्प लिया है. 2035 तक हमारा अंतरिम लक्ष्य 62-70 प्रतिशत कटौती करने का है. सही निगरानी के बिना, डेटा सेंटर इस कमिटमेंट से समझौता कर सकते हैं. डेटा सेंटर रिफाइन्ड, अच्छे संसाधनों वाले ऑपरेटर्स की तरफ से बनाए जा रहे हैं. वे जीवाश्म ईंधन पर निर्भर रहने की बजाय बैटरी और अन्य टेक्निक के साथ अपनी आपूर्ति को मजबूत करने में सक्षम हैं.
अगर सही ढंग से ऑपरेट किया जाए, तो डेटा सेंटर बिजली ग्रिड को बेहतर ढंग से काम करने में भी मदद कर सकते हैं. पानी का सही तरीके से बुद्धिमानी से उपयोग करना जरूरी है. उदाहरण के लिए सिडनी वॉटर का अनुमान है कि सर्वर कूलिंग के लिए डेटा सेंटर की पानी की ज़रूरतें 2035 तक 250 मेगालीटर प्रतिदिन तक पहुंच सकती हैं.
अब इसमें अच्छी खबर यह है कि ऐसी तकनीकें पहले से मौजूद हैं जो पानी के उपयोग को काफी कम कर सकती हैं. क्लोज्ड-लूप सिस्टम, असल में पानी को भाप बनकर उड़ा देने की बजाय रीसाइकल करता है. कुछ आधुनिक डेटा सेंटरों में पानी के प्राथमिक स्रोतों का बिल्कुल भी उपयोग नहीं होता है.
‘नेशनल ऑस्ट्रेलियन बिल्ट एनवायरनमेंट रेटिंग सिस्टम’ डेटा सेंटरों के लिए अपनी ऊर्जा रेटिंग के साथ-साथ एक जल मानक भी डेवलप कर रहा है. बिजली और पानी दोनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए, डेटा सेंटरों को दोनों पर टॉप पर छह-स्टार रेटिंग हासिल करने की जरूरत होगी.
डेटा सेंटरों में जगह का महत्व
डेटा सेंटर कहां बनाए जाते हैं, इससे तय होता है कि वे स्थानीय संसाधनों पर कितना दबाव डालेंगे और आसपास रहने वाले लोगों को इससे कोई परेशानी तो नहीं होगी. ऑस्ट्रेलिया में लगभग 160 डेटा सेंटर पहले से ही काम कर रहे हैं. अधिकांश डेटा सेंटर मेलबर्न और सिडनी में केंद्रित हैं. इससे स्थानीय पावर ग्रिड की क्षमता प्रभावित हो रही है, नेटवर्क योजना पर दबाव पड़ रहा है और कन्ज्यूमर्स के लिए लागत बढ़ रही है.
स्थानीय निवासियों के लाभ भी डेटा सेंटरों की स्थापना में अहम जगह रखते हैं. स्थानीय निवासियों को भी डेटा सेंटर से फायदा मिलना चाहिए. इसके तहत शहरों और क्षेत्रों में, यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग दिया जा सकता है. ऐसा इसलिए कि अब इससे श्रमिकों को बेहतर काम के अवसर मिल सकें. कुल मिलाकर देखें तो उपरोक्त सभी उपाय डेटा सेंटर के एक अच्छे भविष्य का जिक्र करते हैं. इसकी 3 अहम खासियत हैं.
पहला, डेटा सेंटर ऑपरेटरों को मौजूदा प्रोडक्शन पर डिपेंड रहने की बजाय रिन्यूएबल एनर्जी की नयी सप्लाई में इनवेस्ट करने की जरूरत है. दूसरा, ऊर्जा और पानी के लिए ये मानक स्वैच्छिक के बजाय अनिवार्य होने चाहिए. और तीसरा कि डेटा सेंटर कहां स्थित हों. इस फैसले में शुरू से ही संसाधन उपयोग और कम्युनिटी के प्रभाव का आंकलन किया जाना चाहिए.