धान की फसल में चाहिए मोटी और दानेदार बालियां, तो खाद-पानी से लेकर इन बातों का रखें ध्यान

धान की फसल में चाहिए मोटी और दानेदार बालियां, तो खाद-पानी से लेकर इन बातों का रखें ध्यान


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धान की बालियां पतली रह गई हैं तो करें ये काम, दाने होंगे मोटे

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धान की फसल में मोटी और दानेदार बालियां अच्छी पैदावार के लिए जरूरी हैं. कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक संतुलित खाद, सही सिंचाई, खरपतवार और कीट नियंत्रण के साथ फूल आने व दाना बनने के समय फसल की उचित देखभाल करने से बालियों में दानों का अच्छा भराव हो सकता है.

धान भारत की सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है और देश की बड़ी आबादी का पेट भरने का काम करता है. किसानों के लिए धान की अच्छी उपज और मोटी बाली का मतलब न सिर्फ बेहतर उत्पादन होता है बल्कि अधिक मुनाफा भी होता है. लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सही देखभाल न होने से बालियां पतली रह जाती हैं और उत्पादन घट जाता है. आइए जानते हैं धान की बाली को मोटा करने और उपज बढ़ाने के कुछ कारगर उपाय.

दरअसल रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के कृषि रक्षा प्रभारी ऋषि कुमार चौरसिया लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि धान की फसल को सही समय पर पोषण देना बेहद जरूरी है. नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग बालियों को मोटा करने में सहायक होता है. खासतौर पर टॉप ड्रेसिंग के समय यूरिया का छिड़काव धान की बढ़वार और बालियों के मोटापे के लिए फायदेमंद है. इसके अलावा जिंक सल्फेट और आयरन की कमी को भी पूरा करना चाहिए, क्योंकि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते.

धान पानी की फसल है, लेकिन अधिक या कम पानी दोनों ही हानिकारक होते है. फसल की जरूरत के अनुसार खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है. दाने भरने की अवस्था में खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए. हल्की सिंचाई से बालियों में दाने अच्छे और मोटे भरते है. पानी की अधिकता से पौधे कमजोर हो जाते हैं और उपज पर बुरा असर पड़ता है.

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खेत में खरपतवार की भरमार हो जाए तो पौधों तक पोषण नहीं पहुंच पाता और बालियां पतली रह जाती है. समय-समय पर खरपतवार की सफाई जरूरी है. साथ ही भूरा तेला (BPH), तना छेदक और पत्ता लपेटक जैसे कीटों से बचाव के लिए समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए. स्वस्थ पौधे ही मोटी और अच्छी बाली बना सकते हैं.

धान की फसल में फूल आने और दाना बनने का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान खेत में नमी की कमी नहीं होने देनी चाहिए और हल्का-फुल्का खाद प्रबंधन जारी रखना चाहिए. इस अवस्था में सल्फर और पोटाश का उपयोग दानों को भरने और मोटा करने में बेहद असरदार माना जाता है.

धान की बाली को मोटा करने के लिए किसानों को संतुलित खाद, उचित सिंचाई, कीट-खरपतवार नियंत्रण और समय पर देखभाल जैसे उपाय अपनाने चाहिए. यदि किसान इन बातों का ध्यान रखें तो उत्पादन में काफी बढ़ोतरी होगी और बालियां दानेदार और मजबूत होंगी. मोटी बालियां न सिर्फ उपज बढ़ाती है बल्कि धान की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती हैं.

ऋषि कुमार चौरसिया के मुताबिक किसान उपरोक्त बताए गए तरीकों से अपनी फसल का देखभाल करते हैं तो उन्हें अच्छी पैदावार मिलेगी जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होगा



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