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90 के दशक के रोमांटिक गानों की बात हो तो एक ऐसा गीत भी याद आता है, जिसकी शुरुआत ही प्यार को लेकर मासूम सवाल से होती है. अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडकर की आवाज ने इसे बेहद खूबसूरत बना दिया. माधुरी दीक्षित के डांस और जैकी श्रॉफ के साथ उनकी जोड़ी ने गाने में चार चांद लगाए. आज भी ये गीत 90s के संगीत प्रेमियों को पुरानी यादों में ले जाता है.
माधुरी दीक्षित का ये गाना काफी पॉपुलर है.
नई दिल्ली. 90 के दशक में प्यार का अंदाज ही कुछ और था. मोहब्बत की बातें होती थीं, तो उनके साथ मधुर धुनें और दिल छू लेने वाले बोल भी होते थे. ऐसा ही एक गाना आया, जिसकी शुरुआत ही प्यार को लेकर एक मासूम सवाल से होती है. अनुराधा पौडवाल और सुरेश वाडकर की आवाज ने इस गीत में ऐसी मिठास घोली कि सुनने वाले इसके साथ जुड़ गए. ऊपर से माधुरी दीक्षित के डांस ने गाने की खूबसूरती और बढ़ा दी. जैकी श्रॉफ के साथ उनकी जोड़ी भी खूब जमी. सालों बाद आज भी 90s के संगीत की चर्चा होती है, तो ये गीत कहीं न कहीं याद आ ही जाता है. आखिर उस गाने में ऐसा क्या था, जो आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है?
1992 में आई फिल्म ‘संगीत’ में माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ की जोड़ी नजर आई थी. फिल्म का गाना ‘ओ रब्बा कोई तो बताए प्यार होता है क्या’ आज भी पुराने दौर के संगीत प्रेमियों के बीच अपनी खास जगह रखता है. यह गाना प्यार, कसक और तड़प का एक खूबसूरत दस्तावेज है.
दिग्गजों की टोली और संगीतमय ताना-बाना
मशहूर दक्षिण भारतीय निर्देशक के. विश्वनाथ के निर्देशन में बनी फिल्म ‘संगीत’ का संगीत उस दौर की सुपरहिट संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने तैयार किया था. इस गाने के दिल को छू लेने वाले बोल जाने-माने गीतकार संतोष आनंद ने लिखे थे. आनंद-मिलिंद के मधुर संगीत, संतोष आनंद के भावुक शब्दों और अनुराधा पौडवाल-सुरेश वाडकर की मखमली गायकी के मेल ने इस गाने को एक कालजयी रोमांटिक और इमोशनल ट्रैक बना दिया.
क्या है फिल्म की कहानी
फिल्म ‘संगीत’ में माधुरी दीक्षित ने डबल रोल (मां निर्मला और नेत्रहीन बेटी संगीता) निभाया था, जबकि जैकी श्रॉफ (सेतुराम) एक राजस्थानी लोक गायक की भूमिका में नजर आए थे. फिल्म की कहानी एक ऐसी अनाथ और दृष्टिहीन लड़की ‘संगीता’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो संगीत की दुनिया में नाम कमाना चाहती है और अपनी पहचान की तलाश करते हुए अपनी असली मां तक पहुंचती है.
फिल्म के दूसरे गाने भी हिट
फिल्म का नाम ही ‘संगीत’ था, इसलिए इसकी पूरी आत्मा गानों में ही बसी थी. ‘ओ रब्बा कोई तो बताए’ के अलावा इस फिल्म के अन्य गाने भी बेहद लोकप्रिय रहे, जिसमें ‘जो गीत नहीं जन्मा’, ‘सात सुरों के तार बन गए’, ‘चली आइयो राधे रानी’ और ‘मैं कंगना खनकाऊं’ हालांकि, फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर उस वक्त मध्यम सफलता मिली, लेकिन माधुरी दीक्षित की संवेदनशील एक्टिंग और गुलशन कुमार द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म के गानों ने संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह बनाई, जो आज भी कायम है.