कमजोर बीज लगाया तो चौपट हो सकती है पूरी फसल, एक्सपर्ट ने बताए बचाव के तरीके
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Sugarcane Farming Tips: सितंबर में शरद कालीन गन्ने की खेती के लिए सही बीज का चयन महत्वपूर्ण है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. राजीव ने बताया कि स्वस्थ और 8-10 महीने पुराना गन्ना बीज के लिए उपयुक्त होता है, जिसमें ऊपरी हिस्से की आंखें अंकुरण के लिए बेहतर होती हैं.
Sugarcane Farming Tips: सितंबर का महीना शरद कालीन गन्ने की खेती के लिए काफी अनुकूल माना जाता है. इस समय कई किसान गन्ने की नई फसल लगाने की तैयारी करते हैं. लेकिन अच्छी फसल के लिए सिर्फ समय पर बुआई करना ही काफी नहीं है. सही और गुणवत्ता युक्त बीज का चयन सबसे महत्वपूर्ण है. कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अगर बीज कमजोर या गलत हिस्से का इस्तेमाल किया गया तो खेत में अंकुरण प्रभावित हो सकता है.
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव ने बताया कि, गन्ने को बीज के रूप में चुनते समय उसकी उम्र और सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए. किसान को ऐसे गन्ने का चयन करना चाहिए जो पूरी तरह स्वस्थ हो और जिस पर किसी तरह का कीट या रोग का प्रकोप न हो. बुआई के लिए 8 से 10 महीने पुराना गन्ना बीज के लिए उपयुक्त माना जाता है. इससे अधिक पुराना गन्ना बीज के तौर पर इस्तेमाल करने पर अंकुरण की संभावना कम हो सकती है.
गन्ने का कौन सा हिस्सा बीज के लिए लें?
स्वस्थ गन्ने का चयन करने के बाद रोपाई के लिए गन्ने का ऊपरी हिस्सा बीज के लिए लेना चाहिए. इसमें मौजूद आंखों की अंकुरण क्षमता अधिक रहती है. किसान गन्ने के ऊपरी करीब 2/3 हिस्से को बीज के रूप में तैयार कर सकते हैं. वहीं गन्ने के निचले हिस्से को बीज के तौर पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. इस हिस्से में अंकुरण क्षमता कम रहने की वजह से खेत में पौधों की संख्या और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है.
एक आंख वाले बीज में लगेगा कम गन्ना
डॉ. राजीव सिंह बताते हैं कि किसान एक आंख और दो आंख वाले गन्ने के बीज का इस्तेमाल करते हैं. एक आंख वाले बीज की रोपाई करने पर करीब 10 क्विंटल प्रति एकड़ बीज की जरूरत होती है. वहीं दो आंख वाले गन्ने का बीज इस्तेमाल करने पर करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ बीज की आवश्यकता होती है.
आंख से नर्सरी में तैयार हो रहे पौधे
गन्ने की खेती में अब बीज तैयार करने की नई तकनीक भी सामने आई है. इसमें गन्ने की आंख निकालकर नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं. जब पौधे तैयार हो जाते हैं तो उन्हें खेत में ट्रांसप्लांट किया जाता है. इस तरीके से स्वस्थ पौधे तैयार करने में मदद मिलती है और खेत में पौधों के बेहतर तरीके से स्थापित होने की संभावना रहती है. किसानों के लिए यह विधि ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है.