मुझे कोई शिकायत नहीं… यशस्वी जायसवाल को लेकर ज्वाला सिंह का भावुक बयान
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यशस्वी जायसवाल के कोच ज्वाला सिंह ने कहा कि उन्हें भारतीय क्रिकेटर से कोई शिकायत नहीं है. उन्हें गर्व है कि यशस्वी के कारण आज उन्हें हर जगह एक नई पहचान मिली है. न्यूज18 इंडिया के मंच से उन्होंने कहा कि बच्चे एक उम्र के बाद अलग रहना चाहते हैं और यशस्वी ने भी वही किया.
ज्वाला सिंह और यशस्वी जायसवाल
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल इन दिनों अपने बचपन के कोच ज्वाला सिंह को लेकर चर्चा में हैं. हाल के दिनों में ज्वाला सिंह ने कई इंटरव्यू में यशस्वी को लेकर मुखरता से अपनी बात रखी है. इसके साथ ही उन्होंने यशस्वी के साथ अपने हालिया संबंधों पर भी बात की.
ऐसा ही एक भावुक बयान उन्होंने न्यूज18 के मंच से दिया. राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में न्यूज18 इंडिया के खास कार्यक्रम ‘जज्बा’ में ज्वाला सिंह ने बताया कि यशस्वी जायसवाल से उन्हें कोई शिकायत नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे यशस्वी से कोई शिकायत नहीं है. बच्चे एक उम्र के बाद अकेले रहना चाहते हैं और यशस्वी ने भी वही किया.”
यशस्वी आज जहां भी पहुंचा है, उस पर मुझे गर्व है: ज्वाला सिंह
ज्वाला सिंह ने यशस्वी की उपलब्धियों को लेकर कहा, “आज यशस्वी जहां भी पहुंचा है, उस पर मुझे गर्व है. जब वह रन बनाता है तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं रन बना रहा हूं. मैं जब गोरखपुर से क्रिकेटर बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचा था, तो मेरे लिए वह एक अलग संघर्ष था. यशस्वी ने भी वैसा ही संघर्ष किया और उसने मेरे सपने को पूरा किया.”
उन्होंने आगे कहा, “यशस्वी मेरे घर पर 9 साल रहा है. मैदान पर मैं उसका कोच था और घर पर पिता. मेरे लिए वह एक छात्र से बढ़कर था. मैं उसके खाने से लेकर सोने तक का शेड्यूल तय करता था.”
टेस्ट क्रिकेट को लेकर ज्वाला सिंह ने जताई चिंता
इसके अलावा ज्वाला सिंह ने मौजूदा समय में क्रिकेट के बदलते स्वरूप को लेकर भी अपनी बात रखी. खास तौर पर उन्होंने टेस्ट क्रिकेट की घटती लोकप्रियता को लेकर कहा, “आज के क्रिकेटर टी20 पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और असली क्रिकेट यानी टेस्ट फॉर्मेट की लोकप्रियता कम हो रही है.”
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि आज के समय में भारतीय टीम टेस्ट मैच कम खेल रही है. टीम का चयन भी रेड बॉल क्रिकेट में परफॉर्मेंस के आधार पर नहीं हो रहा है. टीम इंडिया का चयन घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन के आधार पर होना चाहिए. खासकर रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी जैसी प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.”