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Kala Namak paddy cultivation in Bahraich: काला नमक धान अपनी बेहतरीन खुशबू, स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है. इसी स्वाद और गुणवत्ता के कारण बाजार में इसकी मांग काफी ज्यादा है. त्रिलोकी के अनुसार यह धान बाजार में 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकता है. यह किस्म जल्दी तैयार हो जाती है, इसलिए जब बाजार में दूसरे धान की आवक कम होती है. तब इसकी कटाई होने से किसानों को बहुत अच्छी कीमत मिल जाती है.
बहराइच: जिले के मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के जरिए एक नई राह दिखाई है. जहां एक तरफ धान की खेती में बढ़ती लागत और मेहनत से कई किसान निराश हो जाते है, वहीं त्रिलोकी ने काला नमक धान की सफल खेती कर दूसरे किसानों के लिए एक बेहतरीन मिसाल पेश की है. आइए जानते है कैसे उन्होंने कम समय में अच्छी कीमत पाई.
मिर्जापुर गांव में जहां दूसरे किसानों के खेत अभी हरे दिख रहे है. वहीं, त्रिलोकी का 1 एकड़ का खेत धान की फसल से काला और लहलहाता नजर आ रहा है. त्रिलोकी ने बताया कि उनके खेत में लगी यह काला नमक धान की किस्म सिर्फ 90 दिनों में तैयार हो जाती है. फिलहाल यह फसल लगभग पूरी तरह तैयार है और अगले 15 दिनों में इसकी कटाई शुरू हो जाएगी.
प्राकृतिक खेती से घटी लागत
त्रिलोकी बताते हैं कि वे ‘जीरो-बजट प्राकृतिक खेती’ के सिद्धांतों का पालन करते हुए इस धान को उगा रहे है. एक एकड़ खेत में धान की रोपाई और शुरुआती देखभाल में उनका कुल खर्च सिर्फ पांच हजार आया है. रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों का इस्तेमाल न करने की वजह से लागत बहुत कम रही है.
छ हजार प्रति क्विंटल का बाजार भाव
काला नमक धान अपनी बेहतरीन खुशबू, स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है. इसी स्वाद और गुणवत्ता के कारण बाजार में इसकी मांग काफी ज्यादा है. त्रिलोकी के अनुसार यह धान बाजार में 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकता है. यह किस्म जल्दी तैयार हो जाती है, इसलिए जब बाजार में दूसरे धान की आवक कम होती है. तब इसकी कटाई होने से किसानों को बहुत अच्छी कीमत मिल जाती है.
दूसरे किसानों के लिए सीख
स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि बहराइच के इस युवा किसान से दूसरे किसानों को भी प्रेरणा लेनी चाहिए. कम लागत, कम समय (90 दिन) और बेहतर बाजार मूल्य के साथ काला नमक धान की खेती किसानों की आय दोगुनी करने में एक अहम भूमिका निभा सकती है.