नैनीताल: सरोवर नगरी नैनीताल का ऐतिहासिक श्री नन्दा देवी महोत्सव केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि कुमाऊं की लोकसंस्कृति, परंपराओं की समृद्ध विरासत भी है. 124 साल पुराने इस महोत्सव को यदि योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन से जोड़ा जाए तो यह नैनीताल की पर्यटन पहचान को नई दिशा दे सकता है. पर्यटन कारोबारियों का मानना है कि महोत्सव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग मिलने से नैनीताल के साथ ही पूरे कुमाऊं को इसका लाभ मिल सकता है.
कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता ने धार्मिक आस्था से जुड़े पर्यटन की संभावनाओं को सामने रखा है. इसी तर्ज पर नन्दा देवी महोत्सव को भी नैनीताल की पर्यटन यूएसपी के रूप में विकसित किया जा सकता है. महोत्सव में कदली वृक्षों की परंपरा, मां नन्दा-सुनन्दा की पूजा, मूर्ति निर्माण, शोभायात्रा, लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम कुमाऊं की विशिष्ट संस्कृति से पर्यटकों को जोड़ने का माध्यम बन सकते हैं.
महोत्सव से बढ़ सकता है पर्यटन कारोबार
नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट का कहना है कि हर साल सितंबर में नन्दा देवी महोत्सव को लेकर नैनीताल में विशेष उत्साह रहता है. उन्होंने कहा कि नन्दा देवी उत्तराखंड की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती हैं और पिछले वर्षों में महोत्सव का प्रचार बढ़ने से इसमें आने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हुआ है. उनके मुताबिक इसका सीधा फायदा पर्यटन सेक्टर और होटल कारोबार को मिलता है. उन्होंने कहा कि नैनीताल में धार्मिक पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं. कैंची धाम और नीम करौली बाबा से जुड़े पर्यटन में जिस तरह वृद्धि देखने को मिली है, उसी तरह नन्दा देवी महोत्सव को भी बड़े स्तर पर प्रचारित किया जा सकता है.
दिग्विजय सिंह बिष्ट के अनुसार, यदि सरकार महोत्सव पर केंद्रित एक प्रभावी डॉक्यूमेंट्री तैयार करे, जिसमें कदली वृक्षों की परंपरा से लेकर मां नन्दा-सुनन्दा की मूर्ति निर्माण प्रक्रिया, धार्मिक अनुष्ठान, शोभायात्रा और मेले की झलकियां दिखाई जाएं, तो देश-दुनिया के लोगों तक इसकी कहानी पहुंचाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि पूर्व जिलाधिकारी वंदना सिंह और वर्तमान जिलाधिकारी की ओर से भी महोत्सव के प्रचार-प्रसार को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. उनका कहना है कि नन्दा देवी की पूजा केवल नैनीताल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कुमाऊं में इसकी व्यापक धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है. ऐसे में इसके प्रचार का लाभ नैनीताल के साथ पूरे कुमाऊं के पर्यटन कारोबार को मिल सकता है.
UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के भी हुए प्रयास
श्री राम सेवक सभा, नैनीताल के मेला प्रवक्ता डॉ. ललित तिवारी ने कहा कि नन्दा देवी महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए पूर्व में इसे UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास किए गए थे. उन्होंने नन्दा देवी बायोस्फीयर रिजर्व का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उत्तराखंड की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, उसी तरह नन्दा देवी महोत्सव को भी वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने की संभावनाओं पर काम होना चाहिए.
डॉ. तिवारी के मुताबिक पूर्व जिलाधिकारी वंदना सिंह के कार्यकाल में इस ऐतिहासिक मेले को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास किए गए थे, लेकिन यह प्रक्रिया सफलता तक नहीं पहुंच सकी. उनका कहना है कि यदि महोत्सव को ऐसी अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती तो नन्दा देवी की सांस्कृतिक परंपरा और कुमाऊं की लोक विरासत की गूंज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच सकती थी.
डिजिटल ब्रांडिंग से दुनिया तक पहुंच सकती है नन्दा की गूंज
महोत्सव के दौरान लगने वाली सैकड़ों दुकानें, झूले, स्थानीय उत्पाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं. ऐसे में महोत्सव को केवल कुछ दिनों के धार्मिक आयोजन के बजाय नैनीताल की स्थायी पर्यटन पहचान से जोड़ने की जरूरत महसूस की जा रही है. इसके लिए डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया प्रचार, डॉक्यूमेंट्री, ट्रैवल पैकेज, स्थानीय संस्कृति पर आधारित स्थायी कार्यक्रम और पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं पर काम किया जा सकता है. सरकार चाहे तो मानसखंड मंदिर माला मिशन की तर्ज पर कुमाऊं की विभिन्न जगहों को जोड़कर नंदा देवी सर्किट भी बना सकती है. जिससे पर्यटन को ऊंचाई मिल सकती है और एक नया पर्यटन का आयाम बन सकता है.