इस्लामाबाद: जिस पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ मक्का डिफेंस पैक्ट साइन करके दुनिया को अपनी गहरी दोस्ती की बड़ी-बड़ी डींगे हांकी थीं, वक्त आने पर उसने अपने उसी ‘जिगरी दोस्त’ को धोखा दे दिया. जब यमन के हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब पर ताबड़तोड़ हमले किए, तब पाकिस्तान के हुक्मरानों ने ‘कड़ा विरोध’ जताने के अलावा कुछ नहीं किया. रक्षा समझौते पर दस्तखत करने के बाद इस तरह पीछे हट जाना किसी धोखेबाजी से कम नहीं है, और अब इस मक्कारी की सजा पाकिस्तान को खुद भुगतनी पड़ रही है. हाल ही में हालात ऐसे पलटे हैं पाकिस्तान खुद हूती लड़ाकों के चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गया है और अब उसके मुंह से ‘एक्ट ऑफ वॉर’ की धमकी फूटी है.
पाकिस्तान को हूतियों के कैसे घेरा?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के बिल्कुल पास लाल सागर के ठंडे पानी में पाकिस्तान का एक खाली तेल टैंकर इस वक्त बुरी तरह अटका हुआ है. हूती विद्रोहियों के ताबड़तोड़ हमलों की वजह से ये अहम पाइपलाइन पहले ही पूरी तरह बंद हो चुकी है और इसके अगले छह हफ्तों तक दोबारा चालू होने की दूर-दूर तक कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने खुलकर ये मान लिया है कि इस जहाज को वहां से सुरक्षित निकालना अब उनकी सरकार के लिए बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि खुद सऊदी अधिकारियों ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि इस जहाज को फिलहाल स्टैंडबाय पर ही रखा जाए.
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि इस फंसे हुए जहाज को वहां से आखिर निकाला कैसे जाए? क्योंकि ओमान और यूएई के रास्ते इस जहाज को अपने घर वापस लाना या फिर लीबिया से नया कच्चा तेल मंगाना पाकिस्तान के लिए इस वक्त लोहे के चने चबाने जैसा साबित हो रहा है.
देश की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा है भयानक डीजल का संकट!
इस छोटे से समुद्री तनाव ने पाकिस्तान की पहले से ही खस्ताहाल हो चुकी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है? पेट्रोलियम मंत्री ने खुद इस बात की बेहद गंभीर चेतावनी जारी की है कि यदि कच्चे तेल की सप्लाई का ये संकट जल्द से जल्द दूर नहीं किया गया, तो पाकिस्तान में डीजल का स्टॉक केवल मौजूदा और आने वाले सिर्फ एक महीने भर का ही बचा हुआ है. देश के पास इस भयानक तबाही से निपटने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा मजबूत विकल्प नहीं बचा है.
हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास अपनी पकड़ इतनी ज्यादा मजबूत और आक्रामक कर ली है कि वहां से गुजरने वाला हर एक छोटा-बड़ा जहाज काल का सामना कर रहा है. ऐसे में पाकिस्तान का ये खाली टैंकर अब उसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही फजीहत और आर्थिक बर्बादी का एक नया प्रतीक बनता जा रहा है.
‘एक्ट ऑफ वॉर’ की चेतावनी और डिफेंस पैक्ट का सियासी सच!
जब पानी सिर से पूरी तरह ऊपर निकल गया और पाकिस्तान की अपनी सरकार पर बहुत बड़ा आर्थिक तबाही का खतरा मंडराने लगा, तब जाकर उसे सऊदी अरब के साथ हुआ वो डिफेंस पैक्ट याद आया जिसे उसने कुछ दिन पहले ही बड़े तामझाम के साथ साइन किया था.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खवाजा आसिफ ने हाल ही में एक तीखा बयान देते हुए कहा है कि अब वो वक्त आ चुका है जब मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट को बिना किसी देरी के पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए. उनका साफ तौर पर ये कहना है कि इस समझौते के तहत यदि तीनों देशों में से किसी एक देश की भी क्षेत्रीय संप्रभुता पर कोई आंच आती है, तो बाकी के देश मिलकर उसका डटकर मुकाबला करेंगे. पाकिस्तान अब इसी समझौते के बहाने अपनी जमीन बचाने और दुनिया को ये दिखाने की कोशिश में जुटा है कि वो इस खतरनाक जंग में कूदने के लिए पूरी तरह मजबूर हो चुका है.
क्या पाकिस्तान वाकई बहुत बड़ा और खतरनाक जोखिम उठाने जा रहा है?
हूती विद्रोहियों के लगातार और अंधाधुंध हमलों से सऊदी अरब के कई बड़े शहर पूरी तरह दहल चुके हैं और इस खूनी संघर्ष में दर्जनों बेकसूर नागरिक गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं. OIC और मुस्लिम वर्ल्ड लीग जैसे तमाम बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन इस हिंसा की बेहद कड़ी और कड़े शब्दों में निंदा कर रहे हैं.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तो डिफेंस पैक्ट साइन करने के बावजूद मक्का पर हुए इस ड्रोन हमले को सिर्फ ‘शर्मनाक’ बताकर निकल गए. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा होता है कि क्या पाकिस्तान सिर्फ जुबानी जमाखर्च और बयानों की हद तक ही सीमित रहेगा या फिर हूतियों के खिलाफ सचमुच कोई बहुत बड़ा सैन्य कदम उठाकर अपने ही हाथों अपनी कब्र खोदेगा?