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Koderma Ground Report: कोडरमा के डोमचांच प्रखंड में नदी पर पुल न होने से कई गांवों के सैकड़ों लोगों को परेशानी होती है. स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और बीमार सबसे अधिक समस्या का सामना करते हैं. बच्चे रोज भीगकर स्कूल जाते हैं और कई बार तो तेज बारिश में स्कूल में ही फंस जाते हैं. जब पानी कम होता है तब मां-बाप लेने आते हैं.
कोडरमा. जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत बंगाखलार पंचायत में गांवों के बीच से गुजरने वाली नदी पर आज तक पुल का निर्माण नहीं होने से आधे दर्जन से अधिक गांवों के सैकड़ों लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं. सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को होती है. नदी पार करने के दौरान हर समय हादसे का खतरा बना रहता है.
दूसरी ओर फंस जाते हैं बच्चे
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है. ऐसे में बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी पार कर सरकारी विद्यालय पहुंचते हैं. बारिश के दौरान अगर नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है तो स्कूल गए बच्चे दूसरी ओर ही फंस जाते हैं. पानी कम होने के बाद ही वे वापस अपने घर लौट पाते हैं.
कमर तक पानी में नदी पार कर स्कूल जाते हैं
कक्षा पांचवीं की छात्रा अंशु कुमारी ने बताया कि स्कूल जाने के लिए हर दिन नदी पार करनी पड़ती है. नदी में पानी अधिक रहने पर डर लगता है कि कहीं बह न जाएं. उसने बताया कि कई बार घुटने से ऊपर और करीब कमर तक पानी में उतरकर नदी पार करनी पड़ती है. स्कूल जाने का दूसरा रास्ता नहीं होने के कारण बच्चे मजबूरी में इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं.
बच्चों ने बताया कि नदी पार करते समय किताब-कॉपी को पानी से बचाने के लिए उसे सिर पर रख लेते हैं. वहीं जूते और मोजे हाथ में लेकर नदी पार करते हैं, ताकि वे भीगने से बच सकें. नदी के दूसरी ओर पहुंचने के बाद जूते-मोजे पहनकर विद्यालय जाते हैं. रोजाना स्कूल आने-जाने वाले अन्य छात्र-छात्राओं को भी इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है.
बीमार को खाट पर लादकर पार करानी पड़ती है नदी
स्थानीय ग्रामीण फौजदार सिंह ने बताया कि गांव की समस्या वर्षों पुरानी है. किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति होने पर उसे खाट पर लिटाकर नदी पार करानी पड़ती है. बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से वोट मांगने पहुंचते हैं और पुल निर्माण का आश्वासन भी देते हैं. लेकिन कई दशक बीतने के बाद भी नदी पर पुल नहीं बन पाया है.
अधिकारियों को कई बार दी गई जानकारी
स्थानीय मुखिया शिव शंकर राय ने बताया कि ग्रामीणों की परेशानी को लेकर प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई है. नदी पर पुल निर्माण कराने की दिशा में आवश्यक पहल करने की मांग भी की गई. लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है. उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण होने से नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलेगी और बच्चों को भी सुरक्षित तरीके से विद्यालय जाने की सुविधा मिल सकेगी.