12 साल की तपस्या और 11 महीने का गर्भ… जानिए सहारनपुर के प्रसिद्ध जाहरवीर गोगा जी के जन्म की चमत्कारी कहानी

12 साल की तपस्या और 11 महीने का गर्भ… जानिए सहारनपुर के प्रसिद्ध जाहरवीर गोगा जी के जन्म की चमत्कारी कहानी


Last Updated:

गोरखनाथ की तपस्या करो वही तुम्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद दे सकते हैं. तब जाकर माता बाछल ने लगातार 12 वर्ष गोरखनाथ की तपस्या और आराधना की और 12 साल बाद गोरखनाथ ने उनको एक पुत्र का आशीर्वाद दिया जो की बेहद शक्तिशाली और 11 महीने में जन्म लेने वाले जाहरवीर गोगा जी महाराज के रूप में जन्मे.

सहारनपुर: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े और ऐतिहासिक मेलों में शुमार जाहरवीर गोगा जी महाराज का मेला एक बार फिर सजने जा रहा है. इस मेले की भव्यता और मान्यता दूर-दूर तक फैली है, लेकिन जिस महान योद्धा और लोक देवता के सम्मान में यह मेला हर साल भरता है, उनके जन्म की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है. लोक कथाओं और इतिहास के अनुसार, जाहरवीर गोगा जी का जन्म सामान्य बालकों की तरह नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे एक लंबी तपस्या और दैवीय आशीर्वाद की एक अद्भुत गाथा जुड़ी हुई है.

जाहरवीर गोगा जी की माता ‘बाछल’ मूल रूप से सहारनपुर के सरसावा क्षेत्र की रहने वाली थीं, जिनका विवाह राजा जेवर सिंह के साथ हुआ था. शादी के कई साल बीत जाने के बाद भी जब उन्हें कोई संतान प्राप्त नहीं हुई, तो लोग तरह-तरह की बातें करने लगे और उन्हें बांझ तक कहकर ताने देने लगे. ऐसे कठिन समय में किसी ने माता बाछल को गुरु गोरखनाथ की आराधना करने की सलाह दी.

सलाह पाकर माता बाछल ने लगातार बारह वर्षों तक कठोर तपस्या और व्रत-उपासना करते हुए गुरु गोरखनाथ का स्मरण किया. इतिहासकार और स्थानीय जानकार अनिल प्रताप सैनी बताते हैं कि गोरखनाथ जी का मुख्य स्थान नेपाल माना जाता है, जहाँ से दिव्य दर्शन के माध्यम से माता बाछल को संकेत मिला और वे राजस्थान के ददरेवा पहुंचीं.

सूखा ‘नौ लक्खा बाग’ हुआ हरा-भरा
मान्यता है कि राजस्थान के ददरेवा में एक प्रसिद्ध ‘नौ लक्खा बाग’ हुआ करता था, जो माता बाछल के विवाह के बाद धीरे-धीरे पूरी तरह सूख चुका था. जब बारह वर्षों की कठिन तपस्या के बाद गुरु गोरखनाथ वहाँ प्रकट हुए, तो उनके चरणों की धूल और आशीर्वाद से वह सूखा हुआ नौ लक्खा बाग रातोरात फिर से हरा-भरा हो गया और सूखे कुओं में भी मीठा पानी फूट पड़ा. गुरु गोरखनाथ की इस कृपा से प्रसन्न होकर उन्होंने माता बाछल को पुत्र प्राप्ति का दिव्य वरदान दिया.

9 महीने नहीं, पूरे 11 महीने में हुआ था जाहरवीर गोगा जी का जन्म
प्रकृति के नियमों से परे, जहाँ आमतौर पर एक सामान्य बच्चे का जन्म 9 महीने के गर्भकाल में होता है, वहीं जाहरवीर गोगा जी महाराज का जन्म पूरे ग्यारह महीने के बाद हुआ था. उनके जन्म के साथ ही उनकी शक्ति और वीरता के चर्चे दूर-दूर तक फैल गए. बड़े होकर उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों और मुगलों से कड़ा संघर्ष किया तथा हिंदू धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. उनकी इसी अदम्य गाथा और बलिदान की याद में आज भी सहारनपुर समेत पूरे उत्तर भारत में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु पहुंचकर अपनी मन्नतें मांगते हैं.



Source link