देश की आजादी के समय से ही एक पेंच फंसा हुआ था. यह पेंच नदी के पानी और बांध को लेकर था, जो 6 राज्यों में विवाद की वजह से अटका हुआ था. अंग्रेजों के जमाने से लेकर AI के जमाने तक फंसे इस पेंच को अब सुलझा लिया गया है. 86 साल से फाइल्स में उलझे किशाऊ डैम प्रॉजेक्ट पर सहमति बन गई है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर साइन किए. साल 1940 से ही इस बांध को लेकर फाइल्स पंजाब से लेकर यूपी के बीच उलझी रही.
इस परियोजना के तहत उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर बहने वाली टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का ग्रेविटी बांध बनाया जाना है, जिसकी स्टोरेज कैपिसिटी 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर होगी. इससे 97 हजार हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी और 1,476 मिलियन यूनिट साफ हाइड्रोपावर का प्रोडक्शन होगा. इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली को मिलने वाला है.
हालांकि यह अपनी तरह की पहली ऐसी परियोजना नहीं है जहां छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इतने लंबे समय से अटके जल विवाद को सुलझाने के लिए हाथ मिलाया हो. साल 2018 से ही मोदी सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर दशकों पुराने पानी के विवादों को सुलझाने की दिशा में चुपचाप लेकिन तेजी से काम किया है. अमित शाह ने बताया कि किशाऊ प्रॉजेक्ट के लिए हुआ समझौता, असल में वह 10वां जल विवाद है, जिसे उनकी सरकार ने सुलझाने में मदद की है. इनमें से कुछ विवाद तो पूरे 50 साल पुराने थे.
2018 से लेकर अभी 2026 तक की स्थिति पर गौर करें तो ऐसे 9 प्रॉजेक्ट्स हैं, जिनके लिए राज्यों के बीच नदी के पानी को लेकर विवाद है. इन सभी पर एक-एक करके गौर करते हैं.
1. लखवार प्रॉजेक्ट
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 28 अगस्त 2018 की तारीख को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ अपर यमुना बेसिन में 3966.51 करोड़ रुपये की ‘लखवार बहुउद्देशीय परियोजना’ के निर्माण के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किया. गडकरी उस समय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री थे जो साथ ही जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय भी संभाल रहे थे.
‘अपर यमुना’ से मतलब यमुना नदी के उद्गम से लेकर दिल्ली में ओखला बैराज तक के हिस्से से है. साल 1976 में शुरुआती मंजूरी मिलने के बाद यह प्रॉजेक्ट 1992 में ठप पड़ गई थी. इस प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड के देहरादून जिले में लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध बनाया जाना है, जिसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 330.66 मिलियन क्यूबिक मीटर है. यहां गौरतलब है कि एक एमसीएम का मतलब एक अरब लीटर होता है.
इस पानी के स्टोरेज से 33,780 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और 6 बेसिन राज्यों में घरेलू, पीने के पानी और इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए 78.83 एमसीएम पानी उपलब्ध होगा. ‘उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड’ के इस प्रोजेक्ट से 300 मेगावाट बिजली का प्रोडक्शन भी होगा. इसके सिविल निर्माण का जिम्मा लार्सन एंड टूब्रो के पास है. अभी यहां सिविल कंस्ट्रक्शन का काम जारी है और इसके 2031 तक पूरा होने का लक्ष्य है.
2. शाहपुर कंडी बांध प्रॉजेक्ट
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर रावी नदी पर बनने वाली ‘शाहपुर कंडी बांध परियोजना’ पर दोबारा काम शुरू करने के लिए दोनों राज्यों ने 8 सितंबर 2018 को एक समझौते पर साइन किए. 3300 करोड़ रुपये के इस प्रॉजेक्ट में 55.5 मीटर ऊंचा बांध और 206 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाले दो हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट शामिल हैं. पंजाब की तरफ से इम्प्लिमेंट की जा रही इस परियोजना से रावी नदी के उस पानी को बचाने में मदद मिलेगी जो वर्तमान में माधोपुर बैराज के जरिए बहकर पाकिस्तान चला जाता है.
इसके साथ ही, इससे पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 37,173 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई भी होगी. इस परियोजना को 2008 में मंजूरी मिली थी, लेकिन इस पर काम 2013 में ही शुरू हो पाया था. इसके ठीक एक साल बाद, जम्मू-कश्मीर सरकार की तरफ से उठाए गए मुद्दों के कारण काम रोक दिया गया था. अभी बांध का काम पूरा हो चुका है और वह चालू है. लेकिन परियोजना का पूरा लाभ यानी सिंचाई और बिजली उत्पादन पावर प्लांटों के पूरा होने के बाद ही मिल पाएगा. दोनों हाइड्रो पावर प्लांटों के 2027 के अंत तक पूरे होने की उम्मीद है.
3. रेणुकाजी बांध प्रॉजेक्ट
नितिन गडकरी ने ही जल संसाधन मंत्री के रूप में 11 जनवरी 2019 को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के साथ अपर यमुना बेसिन में ‘रेणुकाजी मल्टिपर्पज बांध प्रॉजेक्ट’ के निर्माण के लिए MoU पर साइन किए थे. इसका कॉनसेप्ट हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना की सहायक नदी ‘गिरी’ पर एक स्टोरेज प्रोजेक्ट के रूप में किया गया है. दिल्ली और अन्य बेसिन राज्यों को 23 क्यूसेक पानी की आपूर्ति के लिए 148 मीटर ऊंचा रॉक-फिल्ड बांध बनाया जाएगा. क्यूसेक वॉल्यूमेट्रिक फ्लो रेट की एक यूनिट है, जो प्रति सेकंड एक क्यूबिक मीटर पानी के बराबर होती है.
पीक फ्लो के दौरान यह प्रोजेक्ट 40 मेगावाट बिजली भी पैदा करेगा. बांध के निर्माण के बाद ‘गिरी नदी’ का बहाव लगभग 110 प्रतिशत बढ़ जाएगा, जिससे गर्मियों या कम पानी वाले महीनों में दिल्ली और अन्य बेसिन राज्यों की पीने के पानी की जरूरतें पूरी होंगी. इस प्रॉजेक्ट के लिए जांच का काम 1976 में शुरू हुआ था, लेकिन प्रदेशों के बीच आपसी विवादों की वजह से इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका था.
2015 की कीमतों के आधार पर इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 4,596.76 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसमें बिजली कंपोनेंट की लागत 277.33 करोड़ रुपये थी. अभी की स्थिति पर गौर करें तो यहां काम जारी है और इस प्रॉजेक्ट को 2032 तक पूरा करने का टार्गेट रखा गया है.
4. केन-बेतवा लिंक परियोजना
केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लागू करने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और मध्य प्रदेश तथा यूपी की सरकारों के बीच 22 मार्च 2021 को समझौता हुआ था. पीएम नरेंद्र मोदी ने 25 दिसंबर 2024 को इस प्रॉजेक्ट की आधारशिला रखी, जो देश की सबसे महत्वपूर्ण नदी जोड़ो प्रॉजेक्ट्स में से एक है.
इस प्रोजेक्ट से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में हर साल 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और लगभग 62 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा. दिसंबर 2024 तक इस पर कुल 10,536.12 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. इसकी गति बनाए रखने के लिए फाइनैंशियल ईयर 2024-25 में पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं.
यहां अभी बांध का निर्माण चल रहा है, जबकि नहर का काम अभी शुरू होना बाकी है. लोअर ओर परियोजना, कोठा बैराज और बीना कॉम्प्लेक्स मल्टिपर्पज प्रॉजेक्ट पर निर्माण काम जारी है. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की अन्य स्टेट प्रॉजेक्ट्स की डिटेल परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम भी अंतिम दौर में है. इस प्रोजेक्ट के 2030 तक पूरा होने की संभावना है.
5. पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक प्रॉजेक्ट
अपने-अपने राज्यों में पानी की कमी को दूर करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश और राजस्थान ने दिसंबर 2024 में 72 हजार करोड़ रुपये की ‘पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना’ को लागू करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस परियोजना में चंबल बेसिन की नदियों को आपस में जोड़ना शामिल है, जिसमें मध्य प्रदेश और राजस्थान में पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए ‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) का एकीकरण भी शामिल है. एक बार पूरा हो जाने पर यह प्रोजेक्ट पूर्वी राजस्थान के 21 नवनिर्मित जिलों और इसके रास्ते में आने वाले कस्बों, गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराएगा.
यह परियोजना दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए भी पानी देगी. इसके अलावा, राजस्थान में 2.5 लाख हेक्टेयर से अधिक नए कमांड क्षेत्र में सिंचाई, लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर के मौजूदा कमांड क्षेत्र को स्थिर करने, मध्य प्रदेश में 6 लाख हेक्टेयर में सालाना सिंचाई और शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड तथा मालवा क्षेत्र सहित कई जिलों को वाटर सप्लाई सुनिश्चित करेगी.
अभी की बात करें तो राजस्थान से जुड़ी डीपीआर (DPR) पूरी हो चुकी है और तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन के लिए जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय जल आयोग (CWC) को सौंप दी गई है. इस परियोजना को जून 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है.
6. हथिनीकुंड से यमुना तक पानी के लिए अंडरग्राउंड पाइपलाइन
29 जून 2026 को, राजस्थान और हरियाणा ने ‘यमुना जल परियोजना’ को लागू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस डील के तहत, पश्चिमी यमुना नहर से लगभग 580 एमसीएम (MCM) पानी 3 अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा.
इस प्रोजेक्ट का मकसद अपर यमुना बेसिन में सतह के पानी के बंटवारे पर 1994 के समझौते के तहत राजस्थान को मिलने वाले उसके हिस्से का पानी प्रभावी ढंग से पहुंचाना है. इससे राजस्थान के सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और लाखों लोगों को लाभ होगा. इस प्रॉजेक्ट की अनुमानित लागत 34,102.24 करोड़ रुपये है.
फिलहाल इस परियोजना की डीपीआर तैयार कर ली गई है, जिसके अनुसार राजस्थान के हासियवास में खासतौर से पेयजल आपूर्ति के लिए लगभग 386 एमसीएम कुल स्टोरेज कैपिसिटी वाला पानी का जलाशय बनाया जाना तय किया गया है. डीपीआर के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के निर्माण में अवार्ड मिलने की तारीख से लेकर 72 महीने तक का समय लगने का अनुमान है.
7. नर्मदा प्रॉजेक्ट से विस्थापित परिवारों का पुनर्वास
सात जुलाई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री की उपस्थिति में नर्मदा पुरस्कार प्राप्त करने वाले राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच बकाए के निपटारे को लेकर एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते ने सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लिए लागत-साझा करने को लेकर इन राज्यों के बीच चल रहे लंबे समय के विवाद को वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए हमेशा के लिए खत्म कर दिया है. इस वन-टाइम सेटलमेंट के साथ ही चारों राज्यों के बीच बकाया राशि को लेकर चल रहा विवाद सुलझ गया है.
8. सोन बेसिन में बिहार-झारखंड के बीच पानी का बंटवारा
30 अगस्त 2026 को, बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ा 25 साल पुराना विवाद तब सुलझ गया, जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में एक इंटर स्टेट (MoA) पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते से बिहार और झारखंड के बड़े ग्रामीण इलाकों के लाखों किसानों को सिंचाई का पानी और आम जनता को पीने का पानी मिलेगा. इस समझौते पर हस्ताक्षर होने के साथ ही झारखंड की सीमा पर स्थित सोन नदी पर बना ‘इंद्रापुरी बांध’ यानी सोन बैराज भी कहा जाता है. वो अब पूरी तरह से चालू हो जाएगा.
9. यमुना जल परियोजना का निर्माण और इम्प्लिमेंटेशन
राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने 29 जून 2026 को नई दिल्ली में ‘यमुना जल परियोजना’ के निर्माण और इम्प्लिमेंटेशन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे दोनों राज्यों के लोगों की लगभग 3 दशक पुरानी पानी से जुड़ी समस्या का समाधान हो गया.
इस समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच 295 किलोमीटर लंबी 3 अंडरग्राउंड पाइपलाइन के जरिए यमुना नहर से लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी राजस्थान को सप्लाई किया जाएगा. 3.6 मीटर से अधिक डायमीटर वाली ये तीन पाइपलाइनें राजस्थान और हरियाणा दोनों के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराएंगी. वर्तमान स्थिति की बात करें तो इस परियोजना की डीपीआर अभी जांच के अधीन है.