दही भारतीय खानपान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन बी12 और प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत माना जाता है. दही पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने, हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. हालांकि, इसके लाभ पूरी तरह पाने के लिए इसे सही समय पर खाना भी जरूरी है.
सुबह और दोपहर का समय सबसे बेहतर
दही खाने के लिए सुबह और दोपहर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. नाश्ते या दोपहर के भोजन के साथ दही खाने से पाचन बेहतर होता है और शरीर को दिनभर ऊर्जा मिलती है. प्रोबायोटिक्स से भरपूर दही आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है.
खासकर गर्मियों में दोपहर के भोजन के साथ दही खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट की जलन या एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है.
खाली पेट दही खाना चाहिए या नहीं?
कुछ लोग सुबह खाली पेट दही खाते हैं. हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए यह सुरक्षित हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को गैस, एसिडिटी या संवेदनशील पाचन की समस्या रहती है, उन्हें खाली पेट दही खाने से बचना चाहिए. ऐसे लोग दही को फल, दलिया या अन्य खाद्य पदार्थों के साथ खा सकते हैं.
रात में दही खाने से बचें
आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाने की सलाह कम दी जाती है. माना जाता है कि रात के समय दही का सेवन करने से कुछ लोगों को बलगम, सर्दी या पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं. हालांकि आधुनिक पोषण विज्ञान के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को दही से कोई समस्या नहीं है, तो वह सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकता है.
यदि रात में दही खाने की इच्छा हो तो इसमें काली मिर्च या भुना जीरा मिलाकर खाना बेहतर माना जाता है.
व्यायाम के बाद भी फायदेमंद
वर्कआउट के बाद दही का सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है. इसमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों की रिकवरी में मदद करता है. दही के साथ फल या ड्राई फ्रूट मिलाकर खाने से यह एक पौष्टिक स्नैक बन जाता है.
कितना दही खाना चाहिए?
एक स्वस्थ व्यक्ति प्रतिदिन लगभग एक से दो कटोरी दही का सेवन कर सकता है. हालांकि इसकी मात्रा उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक जरूरतों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. जिन लोगों को लैक्टोज असहिष्णुता या दूध से एलर्जी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के बाद ही दही का सेवन करना चाहिए.