पान, अश्वगंधा और हरसिंगार समेत 7 पौधे, गाजीपुर के विवेक ने घर में लगाया औषधीय गार्डेन, जानें फायदे

पान, अश्वगंधा और हरसिंगार समेत 7 पौधे, गाजीपुर के विवेक ने घर में लगाया औषधीय गार्डेन, जानें फायदे


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Home Gardening Tips: गाजीपुर के शास्त्रीनगर में विवेक मौर्या के गार्डन में दौना का पौधा पिछले पांच साल से लगा हुआ है. उनके अनुसार, इसे अक्सर तुलसी के पास लगाया जाता है और इसकी पत्तियों से सुगंध आती है. दौना की पहचान स्थानीय स्तर पर सुगंधित और औषधीय पौधे के रूप में की जाती है. इसकी पत्तियों का उपयोग पारंपरिक रूप से चाय, घरेलू हर्बल तैयारियों और खुशबू के लिए किया जाता है. कुछ जगहों पर इसे पाचन, सर्दी-जुकाम और कीटों को दूर रखने के घरेलू उपायों में भी इस्तेमाल किया जाता है.

गाजीपुर के शास्त्रीनगर में विवेक मौर्य ने पान की बेल को गमले में उगाया गया है. इसे सहारे और हल्की छांव की जरूरत होती है. पान का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन और मुंह की ताजगी के लिए किया जाता है. नियमित नमी, जैविक खाद और जलनिकासी इसकी अच्छी बढ़त में मदद करती है.

गाजीपुर के शास्त्रीनगर में विवेक मौर्या के घर लगा हरसिंगार का पौधा अब विशाल पेड़ का रूप ले चुका है. पारिजात के नाम से भी पहचाने जाने वाले इस पेड़ के फूल सुगंधित होते हैं. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इसकी पत्तियों, फूलों और बीजों का उपयोग बुखार, सूजन, जोड़ों के दर्द, त्वचा संबंधी समस्याओं और पाचन से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है.

गाजीपुर के शास्त्रीनगर निवासी विवेक मौर्या ने अपने घर में चार गमलों में रजनीगंधा के पौधे लगाए हैं. इसकी पतली पत्तियां और सुगंधित सफेद फूल घर की खूबसूरती बढ़ाते हैं. रजनीगंधा का उपयोग मुख्य रूप से इत्र, सुगंध और सजावट में होता है. पारंपरिक चिकित्सा में इसके फूल और जड़ों के उपयोग का उल्लेख मिलता है, लेकिन औषधीय सेवन विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. इसे अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियंत्रित पानी की जरूरत होती है.

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यह पुदीने का पौधा है, जिसे गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी पत्तियों का इस्तेमाल चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में होता है. पुदीना पाचन और ताजगी के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग किया जाता है. इसे हल्की धूप, नियमित पानी और नम मिट्टी पसंद है.

गाजीपुर के शास्त्रीनगर निवासी विवेक मौर्या के घर गमले में अश्वगंधा का पौधा पिछले आठ वर्षों से लगा हुआ है. आमतौर पर अश्वगंधा को औषधीय फसल के रूप में करीब 150 से 180 दिनों में तैयार कर लिया जाता है, लेकिन उचित देखभाल मिलने पर यह पौधा कई वर्षों तक जीवित रह सकता है. इसमें अब फूल और फल भी आ रहे हैं. अश्वगंधा की जड़ों का उपयोग आयुर्वेद में तनाव, कमजोरी और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से जुड़ी पारंपरिक औषधीय तैयारियों में किया जाता है.

गाजीपुर के शास्त्रीनगर में विवेक मौर्या के गार्डन में दौना का पौधा पिछले पांच साल से लगा हुआ है. उनके अनुसार, इसे अक्सर तुलसी के पास लगाया जाता है और इसकी पत्तियों से सुगंध आती है. दौना की पहचान स्थानीय स्तर पर सुगंधित और औषधीय पौधे के रूप में की जाती है. इसकी पत्तियों का उपयोग पारंपरिक रूप से चाय, घरेलू हर्बल तैयारियों और खुशबू के लिए किया जाता है. कुछ जगहों पर इसे पाचन, सर्दी-जुकाम और कीटों को दूर रखने के घरेलू उपायों में भी इस्तेमाल किया जाता है.

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