ज्‍वैलरी बनवानी है, अभी ना बाबा ना… गोल्‍ड मार्केट से लोग क्‍यों बनाने लगे दूरी

ज्‍वैलरी बनवानी है, अभी ना बाबा ना… गोल्‍ड मार्केट से लोग क्‍यों बनाने लगे दूरी


होमफोटोमनीLatest Money

ज्‍वैलरी लेनी है, अभी ना बाबा ना…गोल्‍ड मार्केट से लोग क्‍यों बना ल‍िए दूरी

Last Updated:

सोने चांदी की कीमतों पर नई नई भव‍िष्‍यवाणी आ रही है. लेकिन एक बात साफ है क‍ि लोग अभी ज्‍वैलरी मार्केट से दूरी बना रहे हैं. वर्ल्‍ड गोल्‍ड काउंस‍िल की र‍िपोर्ट का कहना है क‍ि त्‍योहारों और शादी का सीजन होने के बावजूद दुकानों में सन्‍नाटा सा पसरा हुआ है.

त्योहारों और शादियों का सीजन शुरू हो चुका है. आम तौर पर इस वक्त सर्राफा बाजारों में पैर रखने की जगह नहीं होती. लेकिन इस बार माहौल थोड़ा ठंडा है. लोग जूलरी की दुकानों के बाहर से ही सोने का भाव पूछकर घर लौट रहे हैं. ‘वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल’ (WGC) की नई रिपोर्ट बता रही क‍ि आखिर त्योहारों के बावजूद लोग सोना खरीदने से क्यों कतरा रहे हैं.

त्योहारी सीजन से पहले अगस्त के आखिर में सोने की खरीदारी में अचानक बड़ी तेजी आई थी. लगा कि बाजार गुलजार हो गया है. लेकिन वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बता रही है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोने की मांग धड़ाम से गिरी है. इसकी सबसे बड़ी वजह सोने के भाव में आ रहा भारी उतार-चढ़ाव है. कभी रेट आसमान छूने लगते हैं, तो कभी अचानक गिर जाते हैं. इस लुकाछिपी ने ग्राहकों को कंफ्यूज कर दिया है. लोग अब इंतजार के मोड में हैं. गैर-जरूरी खरीदारी टाल दी.

ग्राहकों की इस सुस्ती का सीधा असर बाजार के दुकानदारों और बड़े ज्वेलर्स पर भी पड़ा है. खुदरा कारोबारियों ने भी नया स्टॉक भरने से फिलहाल तौबा कर ली है. वो उतना ही माल मंगा रहे हैं, जितनी पक्की डिमांड आ रही है. हालांकि, शादियों वाले घरों की बात थोड़ी अलग है. जिनके घर में शादी है, वो मजबूरी में ही सही, लेकिन खरीदारी कर रहे हैं. पर यहां भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. भारी-भरकम गहनों की जगह अब लोग हल्के वजन वाली जूलरी बनवा रहे हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

इस ठंडे माहौल के बीच बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स कुछ ज्यादा ही हाथ-पैर मार रहे हैं. बाजार में ग्राहकों को दुकानों तक खींचने के लिए नए डिजाइन लॉन्च किए जा रहे हैं. मार्केटिंग और तगड़े प्रमोशनल ऑफर्स का सहारा लिया जा रहा है. उनका फोकस ऐसे गहनों पर है जो झटपट बिक जाएं. दूसरी तरफ, निवेश के नजरिए से सोना खरीदने वालों का रुझान भी बदल रहा है. लोग अब तिजोरी में रखने वाला फिजिकल सोना खरीदने के बजाय डिजिटल गोल्ड में पैसा लगाना काफी आसान और सुरक्षित मान रहे हैं.

घरेलू बाजार में सोने की कीमतें फिलहाल इंपोर्ट पैरिटी यानी आयातित कीमत से काफी नीचे चल रही हैं. इसका सीधा मतलब है कि देश के अंदर सोना अंतरराष्ट्रीय भाव के मुकाबले सस्ता बिक रहा है. जुलाई में यह डिस्काउंट करीब चौंतीस डॉलर प्रति औंस था. अगस्त में यह बढ़कर इक्यावन डॉलर हो गया. ग्यारह सितंबर आते-आते यह भारी छूट अठहत्तर डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई. आसान भाषा में समझें तो भारत में सोने का भाव इंपोर्टेड कीमत से दो फीसदी कम चल रहा है, फिर भी ग्राहक गायब हैं.

अब सवाल है कि जब विदेश से महंगा सोना आ रहा है, तो भारत में सस्ता कैसे बिक रहा है? बाजार के जानकारों का कहना है कि इसके पीछे पुरानी जूलरी का बड़ा खेल है. भाव ज्यादा होने की वजह से लोग अपना पुराना सोना देकर नए गहने बनवा रहे हैं. इससे घरेलू बाजार में ही सोने की सप्लाई बढ़ गई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में एक और दिलचस्प बात बताई गई है. अनऑफिशियल सप्लाई यानी तस्करी से आ रहा सोना भी बड़े डिस्काउंट की मुख्य वजह है.

सोने की कमजोर डिमांड का सीधा असर भारत के आयात आंकड़ों पर पड़ा है. अगस्त महीने में सोने का आयात तेजी से गिरकर लगभग दो अरब तीस करोड़ डॉलर रह गया. यह आंकड़ा पिछले महीने के मुकाबले पैंतालीस फीसदी और पिछले साल के मुकाबले अंठावन फीसदी कम है. अगस्त में महज पंद्रह से बीस टन सोना ही विदेशों से मंगाया गया. कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पिछले साल नौ फीसदी थी, जो अब गिरकर तीन फीसदी पर आ गई है. अब रिफाइनर्स को कच्चा सोना मंगाना आकर्षक नहीं लगता.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link