₹5 का मिनी समोसा, दही की चटनी और बचपन की यादें, 3 पीढ़ियों से नहीं बदला स्वाद
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पटना में आज भी एक ऐसा मिनी समोसा मिलता है, जिसका स्वाद लोगों को उनके बचपन के दिनों की याद दिला देता है. अशोक राजपथ में पिलर नंबर 11 के सामने वाली गली में राजेश कुमार का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इस छोटे समोसे को बनाने और बेचने का काम कर रहा है. राजेश के मुताबिक, उनके दादा के समय में यह समोसा महज 10 पैसे में बिकता था, जो अब 5 रुपये प्रति पीस हो चुका है. खास बात यह है कि समोसे का आकार छोटा होने के साथ इसका मसाला भी परिवार खुद तैयार करता है और इसमें हरी मिर्च व हींग का इस्तेमाल किया जाता है. स्कूलों की छुट्टी के समय इस मिनी समोसे की खास मांग रहती है और आज भी बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं.
बचपन में स्कूल की छुट्टी होते ही बाहर निकलते ही अगर सबसे पहले किसी चीज पर नजर जाती थी, तो वह था टोकरी में रखा छोटा छोटा क्यूट सा समोसा. कुरकुरा स्वाद, साथ में चटनी और जेब से बस कुछ रुपये खर्च करके पेट और मन दोनों खुश हो जाता था. आज भले ही धीरे धीरे अधिकांश जगहों से खत्म हो गया हो लेकिन राजधानी पटना में आज भी एक ऐसा ही मिनी समोसा लोगों को अपने बचपन की याद दिलाता है. खास बात यह है कि इसे बनाने और बेचने का काम कोई नया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चला आ रहा है.
पटना में राजेश कुमार का परिवार आज भी इसी मिनी समोसे को तैयार करता है. लोकल 18 से बातचीत में राजेश बताते हैं कि उनके दादा के समय से यह काम चला आ रहा है. दादा के बाद उनके पिता ने इसे संभाला और अब वह खुद इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. यानी यह परिवार इस काम को करने वाली तीसरी पीढ़ी है और अब राजेश के बेटे भी इसमें हाथ बंटाते हैं.
आज भले ही एक मिनी समोसे की कीमत 5 रुपये है, लेकिन इसकी कहानी 5 रुपये से शुरू नहीं हुई थी. राजेश ने बताया कि पहले यह समोसा 10 पैसे प्रति पीस में बिकता था. इसके बाद 20 पैसे में भी बिका और समय के साथ इसकी कीमत बढ़ती गई. आज यही छोटा-सा समोसा 5 रुपये प्रति पीस मिलता है. इस समोसे की सबसे खास बात इसका छोटा आकार है. जब बाजार में बड़े आकार के समोसे खूब मिलते हैं, तब राजेश का यह मिनी समोसा अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. राजेश कहते हैं कि छोटा होने की वजह से इसका स्वाद अलग लगता है और ग्राहक इसे काफी पसंद करते हैं.
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राजेश ने बताया कि उनके समोसे में मसाला भी परिवार खुद तैयार करता है. इसमें हरी मिर्च और हींग का इस्तेमाल किया जाता है. उनका कहना है कि मसाला अपने हाथ से तैयार किया जाता है और इसी वजह से समोसे का स्वाद अलग रहता है. परिवार इस काम में बाहर से मजदूर भी नहीं रखता. घर के लोग मिल-जुलकर समोसे तैयार करते हैं. उनका परिवार करीब 10-12 लोगों का है, जबकि दुकान और समोसा तैयार करने के काम में करीब चार-पांच लोग लगे रहते हैं. इनमें उनका बेटा और उनकी मां भी शामिल हैं.
इस छोटे समोसे की सबसे खास पहचान स्कूलों से जुड़ी हुई है. राजेश की दुकान से तैयार होकर समोसे अलग-अलग स्कूलों में भी जाते हैं. चूंकि यह दुकान सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल के पास है तो मुख्य रूप से इस स्कूल में जरूर जाती है. छुट्टी के समय स्कूल के बाहर इसकी बिक्री होती है. राजेश की मानें तो यह सिलसिला भी उनके दादा के समय से ही चला आ रहा है. पहले उनके दादा स्कूल के बाहर समोसा बेचते थे, फिर उनके पिता ने यह काम किया और अब वह खुद और उनका बेटा इसे आगे बढ़ा रहे हैं.
राजेश का दावा है कि उनके यहां का समोसा सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं है. पटना के नेता, डॉक्टर समेत कई लोग इसका स्वाद ले चुके हैं. नेता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि लालू यादव की बेटियां जब सेंट जोसेफ कॉन्वेंट में पढ़ती थी, तब वे भी इस समोसे का स्वाद ले चुकी हैं. इसके अलावा अभी भी पटना के बड़े लोग जब अपनी बेटियों को स्कूल से लेने आते हैं तो इस समोसे का स्वाद जरूर चखते हैं. राजेश की दुकान पर समोसा सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक मिलता है. इस दौरान खासकर स्कूलों की छुट्टी के समय बच्चों की पसंद का यह छोटा समोसा खूब बिकता है. बच्चे तो बच्चे, बूढ़े और जवान सहित हर उम्र के लोग इसे बहुत ही चाव से खाते हैं. इस समोसे के साथ मिलने वाली दही की चटनी का स्वाद भी गजब होता है. अगर आपको भी इस मिनी समोसे का स्वाद चखना है तो अशोक राजपथ में पिलर नंबर 11 के सामने वाली गली में आना होगा. यहां आपको राजेश जी की समोसे की दुकान मिल जायेगी.