तमिलनाडु की सियासत में आरटीआई (RTI) को लेकर ऐसा जबरदस्त भूचाल आया कि थलापति विजय की अगुवाई वाली TVK सरकार को चंद घंटों के भीतर ही अपने ही फैसले से यू-टर्न लेना पड़ गया. राज्य की नई सरकार ने कानून-व्यवस्था विभाग को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर करने का जो फरमान जारी किया था, उसने देखते ही देखते राजनीतिक गलियारों में हंगामा खड़ा कर दिया. विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों के कड़े हमलों और पारदर्शिता पर उठते सवालों के बीच सरकार ने तुरंत बैकफुट पर आते हुए अपने इस विवादित आदेश को वापस ले लिया है.
TVK सरकार का बड़ा यू-टर्न
तमिलनाडु की थलापति विजय सरकार ने रविवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने उस नोटिफिकेशन को पूरी तरह वापस ले लिया, जिसमें सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था) विभाग को आरटीआई अधिनियम के दायरे से छूट दी गई थी. इस नए आदेश के गजट में आते ही राजनीतिक गलियारों में बवाल मच गया था. सरकार ने धारा 24(4) का हवाला देकर इस विभाग को खुफिया और सुरक्षा संगठन घोषित करने की कोशिश की थी, लेकिन बढ़ते विरोध के चलते कुछ ही घंटों में इस फैसले को खारिज करना पड़ा.
क्या था विवादित आदेश और क्यों मचा बवाल?
अगर यह नोटिफिकेशन लागू रहता तो आम नागरिक पुलिस फायरिंग, हिरासत में मौत, और जातीय संघर्ष जैसे गंभीर मामलों से जुड़े रिकॉर्ड आरटीआई के जरिए नहीं मांग पाते. इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम और भाजपा नेत्री तमिलिसाई सौंदरराजन ने सरकार को आड़े हाथों लिया. कार्ति चिदंबरम ने तो यहां तक सलाह दी कि सरकार को नौकरशाहों के इशारे पर फैसले नहीं लेने चाहिए. चौतरफा आलोचना के दबाव के बाद सरकार ने बिना किसी देरी के अपने कदम खींच लिए और विभाग को दोबारा आरटीआई के दायरे में कर दिया गया.
सवाल-जवाब
तमिलनाडु में किस राजनीतिक दल की सरकार सत्ता में है? राज्य में थलापति विजय के नेतृत्व वाली TVK (तमिझगा वेत्री कड़गम) की सरकार है.
सरकार ने किस विभाग को आरटीआई से बाहर करने का नोटिफिकेशन जारी किया था? सरकार ने सार्वजनिक (कानून और व्यवस्था) विभाग को आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर करने का आदेश दिया था.
सरकार ने किस कानूनी प्रावधान का हवाला देकर यह फैसला लिया था? सरकार ने आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल किया था.
आदेश वापस न लिए जाने पर किन मामलों की जानकारी छुप जाती? पुलिस फायरिंग, हिरासत में मौत, और सांप्रदायिक या जातीय संघर्षों से जुड़े अहम रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं हो पाते.
विवाद के बाद सरकार ने मौजूदा स्थिति में क्या कदम उठाया है? बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच थलापति विजय सरकार ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना यह विवादित नोटिफिकेशन वापस ले लिया.