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Nepal Vegetable Crisis: नेपाल में लगातार बारिश और भूस्खलन ने काठमांडू के लोगों का हाल खराब कर दिया है. भारी बारिश का असर अब लोगों की थाली पर पड़ने लगा है. कालीमाटी मंडी में सब्जियां नहीं पहुंच रही हैं. टमाटर का थोक भाव 110 नेपाली रुपये और खुदरा कीमत 150-160 रुपये किलो तक पहुंच गई.
नेपाल में सब्जियों को दाम बढ़ा है. (सांकेतिक फोटो/Reuters)
Nepal Vegetable Price: नेपाल में बारिश का असर सिर्फ लोगों की जिंदगी पर ही नहीं, उनकी रसोई पर भी पड़ने लगा है. लगातार हो रही बारिश और जगह-जगह भूस्खलन ने काठमांडू पहुंचने वाली सब्जियों का रास्ता बंदा कर दिया है. इसका नतीजा यह हुआ कि नेपाल की सबसे बड़ी कालीमाटी सब्जी मंडी में सब्जियों की आवक करीब दो-तिहाई तक गिर गई. शुक्रवार को मंडी में सिर्फ 242 टन सब्जियां पहुंचीं और गुरुवार को 657 टन सब्जियां पहुंची. जबकि एक हफ्ते पहले 817 टन सब्जियां आई थीं. लगातार कम होती सप्लाई के कारण सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं. थोक में ही सब्जियों का रेट कई गुना बढ़ गया है, तो रिटेल में उनकी कीमतों का अंदाजा आप लगा सकते हैं.
कालीमाटी फल और सब्जी बाजार विकास बोर्ड के मुताबिक सामान्य दिनों में मंडी में रोजाना 700-800 टन सब्जियां पहुंचती हैं. लेकिन बारिश ने पूरा हिसाब बिगाड़ दिया है. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक सब्जी कारोबारी राम शरण रिजाल ने बताया कि बारिश के कारण सप्लाई में बड़ी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है.
नेपाल में सब्जियों के दाम पर एक नजर. (तस्वीर-AI जेनेरेटेड)
टमाटर से लेकर पत्तागोभी तक, सब महंगा
सबसे ज्यादा असर टमाटर की कीमत पर दिख रहा है. एक हफ्ते में थोक भाव 61.76 फीसदी बढ़कर 110 नेपाली रुपये (₹69) प्रति किलो हो गया. खुदरा बाजार में टमाटर 150-160 नेपाली रुपये (₹100) किलो तक पहुंच गया है. पत्तागोभी की कीमत में तो और भी तेज उछाल आया है. इसका थोक भाव 171.43 फीसदी बढ़कर 95 नेपाली रुपये (₹60) किलो हो गया. फूलगोभी 22.73 फीसदी महंगी होकर 135 नेपाली रुपये (₹85) किलो पहुंच गई. आलू का थोक भाव 55.17 नेपाली रुपये (₹35) किलो है, जबकि खुदरा कीमत 65-75 नेपाली रुपये (₹47) किलो तक पहुंच चुकी है. बैंगन 55 (₹35), करेला 85 (₹53) और लौकी 65 नेपाली रुपये (₹41) किलो के आसपास बिक रही है.
काठमांडू में सब्जियां क्यों नहीं पहुंच पा रहीं?
सब्जियों की इस किल्लत की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बारिश और उसके बाद जगह-जगह हुए भूस्खलन हैं. बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव वाले क्षेत्र के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हुई है. इसका असर काठमांडू को नेपाल के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों पर पड़ा है. पृथ्वी हाईवे और बीपी हाईवे के कई हिस्से भूस्खलन की वजह से बाधित हुए हैं. यही रास्ते उन इलाकों से सब्जियां काठमांडू तक पहुंचाते हैं, जहां बड़े पैमाने पर खेती होती है. काठमांडू की सब्जियों की जरूरत धादिंग, चितवन, मकवानपुर और काभ्रेपलांचोक जैसे पड़ोसी जिलों के अलावा तराई के कई इलाकों से पूरी होती है. आलू, प्याज और नींबू का बड़ा हिस्सा भारत से भी आता है.
आगे और बढ़ सकती है महंगाई
मुसीबत यह है कि नेपाल में बड़े त्योहार और शादी का सीजन भी करीब है. ऐसे में सब्जियों की मांग और बढ़ने की उम्मीद है. कालीमाटी बोर्ड के कार्यकारी निदेशक प्रद्युम्न राज पांडे के मुताबिक बारिश के कारण गुरुवार से ही मंडी में सब्जियों की आवक काफी धीमी हो गई है. नेपाल पहले से महंगाई के दबाव में है. नेपाल राष्ट्र बैंक के मुताबिक अगस्त के मध्य में सालाना उपभोक्ता महंगाई दर 5.96 फीसदी थी, जबकि एक साल पहले यह 1.68 फीसदी थी. इसी दौरान सब्जियों की महंगाई 6.90 फीसदी रही.