US-Indian Army Joint Drill: हिमालय में उतरी यूएस आर्मी साको राइफलों से की फायरिंग भारत वाले ड्रोन भी आजमाया हाथ

US-Indian Army Joint Drill: हिमालय में उतरी यूएस आर्मी साको राइफलों से की फायरिंग भारत वाले ड्रोन भी आजमाया हाथ


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US-Indian Army Joint Drill: भारत में हिमालय की पहाड़ियों में अमेरिका की सेनाओं के स्नाइपर उतरे हैं और उन्होंने स्वदेशी हथियारों पर अपने हाथ आजमाए. दरअसल भारत-अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध अभ्यास 2026 में ये नजारा दिखाई दिया, जिसमें भारतीय स्वदेशी हथियारों की तारीफ अमेरिकी सैनिकों ने भी की.

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अमेरिका-भारत का संयुक्त युद्धाभ्यास. (Credit- ANI)

India-US Military Drill 2026: भारत और अमेरिका की सेनाओं के स्नाइपरों ने उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में एक साथ प्रशिक्षण लिया. इस दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने भारतीय साको राइफल से 580 मीटर तक दूर मौजूद लक्ष्यों पर निशाना साधा. यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त रूप से कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया. यह प्रशिक्षण उत्तराखंड के औली में मंगलवार को आयोजित युद्ध अभ्यास 2026 के तहत हुआ.

अमेरिकी सेना की रिपोर्ट के मुताबिक पूरे अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को जोड़ी बनाकर प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण की शुरुआत साको TRG राइफल की सटीकता जांचने और उसे लक्ष्य के अनुसार तैयार करने से हुई. यह राइफल .338 लापुआ मैग्नम गोली का इस्तेमाल करती है. इसके बाद सैनिकों ने जंगल और ऊबड़-खाबड़ इलाके में करीब 500 से 580 मीटर की दूरी पर मौजूद लक्ष्यों पर निशाना लगाया. बाद में अपेक्षाकृत समतल इलाके में लगभग 520 मीटर दूर के लक्ष्यों पर भी फायरिंग की गई.

अमेरिका के मार्क-22 स्नाइपर राइफल से तुलना 

अमेरिकी सेना के सार्जेंट फर्स्ट क्लास डायलन टिंकी को भारतीय स्नाइपर हथियारों का पहले से अनुभव था. उन्होंने इस साल की शुरुआत में मध्य प्रदेश के महू स्थित इंडियन आर्मी स्नाइपर स्कूल में 25 दिन का विशेष प्रशिक्षण लिया था. टिंकी ने भारतीय साको राइफल की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें यह राइफल काफी पसंद है. उन्होंने इसकी तुलना अमेरिकी सेना की मार्क-22 स्नाइपर राइफल से भी की. दोनों राइफलें .338 लापुआ मैग्नम कारतूस का इस्तेमाल कर सकती हैं.

दोनों सेनाओं ने साझा किए अनुभव

प्रशिक्षण के दौरान अमेरिका और भारत की सेनाओं ने पाया कि स्नाइपर और स्पॉटर के बीच तालमेल की उनकी मूल तकनीक काफी समान है. स्पॉटर लक्ष्य, हवा और गोली के प्रभाव को देखकर स्नाइपर को अगली गोली के लिए जरूरी सुधार बताता है. इस अभ्यास में स्नाइपरों के अलावा ड्रोन ऑपरेटर और स्काउट सैनिकों ने भी हिस्सा लिया. दोनों देशों के जवानों ने पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाकों में ड्रोन की मदद से छिपे हुए लक्ष्यों को पहचानने का अभ्यास किया.

भारतीय ड्रोन पर भी आजमाया हाथ

भारतीय सेना की अशनि ड्रोन यूनिट ने अमेरिकी स्काउट सैनिकों के साथ मिलकर काम किया. दोनों पक्षों ने पहाड़ी क्षेत्रों में ड्रोन के इस्तेमाल और निगरानी से जुड़े अपने अनुभव साझा किए. युद्ध अभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सेनाएं शामिल रहीं और ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल स्काईस्ट्राइकर ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को दिखाया. लोइटिरिंग म्यूनिशन एक ऐसा सिस्टम है जो हवा में मंडराते हुए लक्ष्य की तलाश करता है, फिर सटीक हमला करता है, वहीं स्काईस्ट्राइकर ने इस क्षमता को महाजन जैसे कठिन मैदानी इलाके में दिखाया.



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