हर DPC पर करीब12 लाख रुपये बचत.. ट्रेन में LNG ऐसे बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

हर DPC पर करीब12 लाख रुपये बचत.. ट्रेन में LNG ऐसे बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर


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हर DPC पर करीब12 लाख रुपये बचत.. ट्रेन में LNG ऐसे बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

Agency:एजेंसियां

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LNG ट्रेन भारतीय रेल की तस्वीर बदल सकती है. रेलवे का अनुमान है कि LNG युक्त एक ड्राइवर पावर कार यानी DPC से साल में तकरीबन 12 लाख रुपये की बचत होगी. एक यात्री ट्रेन में अमूमन दो DPC होती हैं, जो अब तक डीजल से संचालित होती थीं, लेकिन अब साबरमती से चल रही ट्रेन ड्यूल फ्यूल इंजन पर दौड़ेगी.

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साबरमती से चलने वाली LNG ट्रेन की DPC. (फोटो-Indian railway)

भारतीय रेलवे आज एक और इतिहास रचने जा रहा है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह गुजरात के साबरमती स्टेशन से देश की पहली LNG संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाने जा रहे हैं. इससे ईंधन का खर्च घटेगा और पॉल्यूशन भी कम होगा. खास बात ये है कि ये पहली ऐसी ट्रेन होगी जो डुअल फ्यूल तकनीक पर दौड़ेगी. अहमदाबाद रेल मंडल के मुताबिक य पहली ऐसी ट्रेन है जो LNG और डीजल से साथ चलेगी. ऐसा इसलिए ताकि फ्यूल की उपलब्धता के हिसाब से इसे दौड़ाया जा सके.

भारत में 16 अप्रैल 1853 में जब पहली बार मुंबई से ठाणे के बीच ट्रेन चली थी तो उसे भाप के इंजन से चलाया गया था. समय के साथ भाप इंजन की जगह डीजल इंजन ने ली और फिर बिजली ने भारतीय ट्रेन का आधुनिकीकरण कर दिया. मार्च 2026 तक भारतीय रेल का ब्रॉडगेज नेटवर्क तकरीबन 99.6 प्रतिशत तक इलेक्ट्रिफाइड हो चुका है. ऐसे में अब भारतीय रेल LNG की ओर कदम बढ़ा रही है. खास बात ये है कि इसके लिए भारतीय रेल ने ड्राइवर पावर कार DPC को मॉडीफाइड कर दिया है. DPC असल में ट्रेन का वो हिस्सा होता है जहां से लोकोपायलट ट्रेन को संचालित करता है. यह इंजन से अलग होता है, क्योंकि इंजन अलग से जुड़कर ट्रेन को खींचता है, जबकि DPC ट्रेन का ही हिस्सा होता है.

क्या होती है LNG?

LNG का पूरा नाम Liquefied Natural Gas यानी ऐसी नेचुरल गैस तो तरल के तौर पर है. नेचुरल गैस को -162 डिग्री सेल्सियस पर ठंडा कर इसे बनाया जाता है. ट्रेन में इसे एक विशेष क्रायोजेनिक टैंक में रखा जाता है. DPC में इस्तेमाल के लिए इसे गैसीय इंधन में बदला जाता है. क्रायोजेनिक टैंक ऐसे कंटेनर होते हैं जहां नेचुरल गैस को -150 डिग्री सेल्सियस से नीचे सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

LNG से कैसे दौड़ेगी ट्रेन?

साबरमती से जो ट्रेन LNG से दौड़ेगी वह 2000 किलोमीटर से ज्यादा फील्ड टेस्टिंग पूरी कर चुकी है. इसके लिए 1400 हॉर्सपावर के DPC को डीजल फ्यूल से LNG-डीजल फ्यूल सिस्टम में बदला गया है. इसमें 2200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है. रेलवे के मुताबिक इस तकनीक से डीजल और LNG साथ मिलकर ट्रेन को दौड़ाएंगे. इसमें डीजल 60 प्रतिशत काम करेगा, जबकि 40 प्रतिशत काम LNG का होगा.

कितनी बचत कराएगी LNG?

रेलवे ने दो हजार किमी के ट्रायल के आधार पर ऐसा अनुमान जताया है कि ड्यूल फ्यूल से संचालित इस ड्राइवर पावर कार से सालाना तकरीबन 12 लाख रुपये के ईंधन की बचत होगी. यानी दो DPC वाले आठ कोच के एक रेक की यह बचत साल में तकरीबन 23.9 लाख तक हो सकती है. इसकी दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्रदूषण कम करती है.

10 साल से ज्यादा समय से कोशिश में थे इंजीनियर

रेलवे इंजीनियर पिछले 10 साल से ज्यादा समय से LNG तकनीक पर काम कर रहे थे. सबसे पहले इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी जब रेलवे ने LNG आधारित लोलोकामेटिव प्रोटोटाइप पर काम करने के बारे में बताया था. उस समय बताया गया था कि LNG के इस्तेमाल से पॉल्यूशन काफी हद तक कम हो जाएगा. इस साल जनवरी 2026 में ही साबरमती में भारतीय रेलवे की पहली LNG-डीजल ड्यूल-फ्यूल DEMU ट्रेन से 2000 किमी से ज्यादा फील्ड ट्रायल किए गए थे.

अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है LNG ट्रेन?

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा खपत में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है. सरकार का लक्ष्य है कि वह 2030 तक नेचुरल गैस् की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक कर दे. इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क, LNG टर्मिनल, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पर काम हो रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एसोसिएशन पहले ही एक रिपोर्ट में ये दावा कर चुका है कि भारत में अगले 4 साल में नेचुरल गैस की मांग 60 प्रतिशत बढ़कर 103 अरब घन मीटर तक हो सकती है.

क्या भविष्य का फ्यूल होगी LNG

LNG को कोयले और कच्चे तेल की तुलना में में कम प्रदूषण करने वाला फ्यूल माना जाता है. दुनिया के कई देश इसे बदलाव लाने वाले ईंधन के तौर पर देखते हैं. भारत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है. अगर ट्रेनों में LNG का प्रयोग सफल रहता है तो फिर परिवहन के अन्य साधनों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है. खासतौर से ट्रकों में. दरअसल ट्रकों को लंबी दूरी तय करने के लिए बड़ी मात्रा में एनर्जी की जरूरत होती है. ऐसे में आगे चलकर LNG को डीजल के विकल्प के तौर पर ट्रकों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.



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