सूरज से 5 लाख गुना ज्यादा ताकतवर किरणें, धूल की आड़ में 30 साल से छुपा था दानव, 12 हजार प्रकाश वर्ष दूर से धरती की तरफ दाग रहा आग का बवंडर

सूरज से 5 लाख गुना ज्यादा ताकतवर किरणें, धूल की आड़ में 30 साल से छुपा था दानव, 12 हजार प्रकाश वर्ष दूर से धरती की तरफ दाग रहा आग का बवंडर


Space News: एक सनसनीखेज खोज ने खगोलविदों के होश उड़ा दिए हैं. हमारी अपनी आकाशगंगा मिल्की वे के भीतर पहली बार एक माइक्रोब्लेजार देखा गया है. यह सिस्टम पृथ्वी से करीब 12000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर मौजूद है. इस सिस्टम को वैज्ञानिकों ने आईआरएएस 18293-0941 नाम दिया है. यहां एक भयानक ब्लैक होल अपने बगल में मौजूद एक विशालकाय तारे के मैटर को बेरहमी से नोचकर खा रहा है. वह हर 11 दिन में अपने साथी तारे की परिक्रमा पूरी करता है. इस प्रक्रिया के दौरान कुछ भयानक पदार्थ ब्लैक होल के ध्रुवों से बाहर की तरफ फेंके जा रहे हैं. यह ब्लैक होल रोशनी की रफ्तार से प्लाज्मा जेट सीधे हमारी पृथ्वी की दिशा में दाग रहा है. यह ब्रह्मांडीय पार्टिकल एक्सेलरेटर वैज्ञानिकों के लिए बेहद हैरान करने वाला साबित हुआ है.

पृथ्वी की तरफ सीधे आ रहा यह कॉस्मिक जेट

वैज्ञानिकों ने जब इस सिस्टम की बारीक जांच की तो वे सन्न रह गए. ब्लैक होल अपने साथी तारे की गैस और धूल को अपनी तरफ खींचता है. इस मलबे का बहुत बड़ा हिस्सा ब्लैक होल के मुंह में समा जाता है. बचा हुआ हिस्सा उसके दोनों पोल से भयानक दबाव के साथ बाहर निकलता है. यह मलबा लगभग रोशनी की गति से ट्विन जेट्स के रूप में स्पेस में फैलता है.

इस सिस्टम की सबसे खौफनाक बात इसकी दिशा है. इसकी एक ताकतवर जेट का मुंह सीधे हमारी पृथ्वी की तरफ है. वैज्ञानिकों को रेडियो सिग्नल्स के जरिए सिर्फ एक ही जेट साफ दिखाई दे रही है. दूसरी जेट पृथ्वी के ठीक विपरीत दिशा में जा रही है. इसलिए वह टेलीस्कोप की नजर से पूरी तरह ओझल हो जाती है.

अंतरिक्ष के घने परदों के पीछे तीन दशकों से कैसे छुपा रहा यह शिकारी?

वैज्ञानिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतना विशाल सिस्टम अब तक नजर क्यों नहीं आया. दरअसल यह माइक्रोब्लेजार इंटरस्टेलर गैस और धूल की एक मोटी दीवार के पीछे छुपा हुआ था.

स्पेन की यूनिवर्सिटी ऑफ जाएन के प्रमुख रिसर्चर जोसेप मार्ती ने बताया, ‘इस सिस्टम के बारे में सब कुछ हमारी आंखों के ठीक सामने छुपा हुआ था.’ यह इतनी भारी धूल के पीछे स्थित है कि सामान्य ऑप्टिकल तस्वीरों में यह बिल्कुल अदृश्य रहता है.

दशकों पहले इसे अंतरिक्ष के कैटलॉग में दर्ज तो किया गया था. बाद में इसे पूरी तरह भुला दिया गया. अब आधुनिक तकनीक ने इस पुराने राज से परदा हटाया है.

एक सामान्य ब्लेजार और इस नए माइक्रोब्लेजार में आखिर क्या फर्क है?

ब्रह्मांड में ब्लेजार कोई नई चीज नहीं हैं. दूर स्थित सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र में विशालकाय ब्लैक होल होते हैं. उनका वजन हमारे सूरज से लाखों या अरबों गुना ज्यादा होता है. जब वे पदार्थ निगलकर सीधे हमारी ओर जेट फेंकते हैं तो उन्हें ब्लेजार कहा जाता है.

इस नए खोजे गए सिस्टम में कहानी थोड़ी अलग और ज्यादा दिलचस्प है. यहां मौजूद ब्लैक होल कोई सुपरमैसिव दानव नहीं है. यह एक स्टेलर-मास ब्लैक होल है जिसका वजन हमारे सूरज से कुछ सौ गुना ही ज्यादा है. आकार में छोटा होने के बावजूद यह एक विशालकाय ब्लेजार की तरह ही घातक व्यवहार कर रहा है. इसीलिए वैज्ञानिकों ने इसे माइक्रोब्लेजार का नाम दिया है.

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