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पश्चिम बंगाल से बिलासपुर पहुंचे मासूम ने मेहनत को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. वह शहर की सड़कों और बाजारों में घूम-घूमकर झालमुरी बेच रहे हैं. खास बात यह है कि मासूम किसी एक काम पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि मौसम और लोगों की पसंद को देखते हुए हर सीजन में नया कारोबार शुरू कर देते हैं. फिलहाल उन्होंने चाय का काम छोड़कर करीब दो महीने के लिए झालमुरी बेचना शुरू किया है.
रोजी-रोटी की तलाश में पश्चिम बंगाल से बिलासपुर पहुंचे मासूम ने मेहनत को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. वह शहर की सड़कों और बाजारों में घूम-घूमकर झालमुरी बेच रहे हैं. खास बात यह है कि मासूम किसी एक काम पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि मौसम और लोगों की पसंद को देखते हुए हर सीजन में नया कारोबार शुरू कर देते हैं. फिलहाल उन्होंने चाय का काम छोड़कर करीब दो महीने के लिए झालमुरी बेचना शुरू किया है. उनका कहना है कि जितनी मेहनत और निवेश करेंगे. उसी हिसाब से कमाई भी होगी और इसी कमाई से वह अपने परिवार का खर्च उठाते हैं.
मौसम के हिसाब से बदलते हैं कमाई का जरिया
मासूम बताते हैं कि वह खाली बैठने के बजाय हर सीजन में कमाई का नया रास्ता तलाशते हैं. बरसात और ठंड के मौसम में वह चाय बेचते हैं, जबकि फिलहाल मौसम को देखते हुए. उन्होंने झालमुरी का कारोबार शुरू किया है. उनका मानना है कि लोगों को हर बार कुछ नया खाने को मिले तो वे उसे जरूर आजमाते हैं.
शहर में घूम-घूमकर बेचते हैं झालमुरी
मासूम सुबह करीब 11 बजे अपना सामान लेकर बिलासपुर के अलग-अलग बाजारों में निकल जाते हैं. वे सनचरी, गोलबाजार समेत शहर के अलग-अलग हिस्सों में घूमते हैं. जहां ग्राहक मिलते हैं, वहीं रुककर झालमुरी बनाकर खिलाते हैं. बच्चों से लेकर बड़े तक उनका यह नया आइटम पसंद कर रहे हैं.
चना, अचार और सरसों तेल से तैयार होती है झालमुरी
मासूम के मुताबिक झालमुरी बनाने में कच्चा चना, अचार, सरसों का तेल, मसाले और मिक्सचर जैसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. इन सभी सामग्रियों को मिलाकर ग्राहक के सामने तुरंत झालमुरी तैयार की जाती है. उनका कहना है कि यह नाश्ते के तौर पर या खाली समय में खाने के लिए लोगों को पसंद आ रही है.
1000 रुपये लगाकर 1500 तक की बिक्री
मासूम बताते हैं कि कारोबार में कमाई मेहनत और बिक्री पर निर्भर करती है. उनके मुताबिक अगर किसी दिन 1000 रुपये का सामान लगाया और उससे 1500 रुपये की बिक्री हुई तो करीब 500 रुपये बच जाते हैं. इसी तरह रोज की कमाई से वह अपने घर-परिवार का खर्च भी चलाते हैं.
दो महीने झालमुरी, फिर शुरू करेंगे चाय
मासूम ने बताया कि उन्होंने फिलहाल करीब दो महीने के लिए झालमुरी का काम शुरू किया है. इसके बाद जैसे ही बरसात और ठंड का मौसम आएगा, वे फिर से चाय का कारोबार शुरू कर देंगे. मौसम और लोगों की पसंद को समझकर कारोबार बदलना ही उनके लिए कमाई का तरीका है.