न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान एक ऐसी मुलाकात हुई है जो साउथ एशिया की राजनीति में किसी मीम मैटेरियल से कम नहीं है. एक तरफ पाकिस्तान है जो भीख का कटोरा लेकर घूम रहा है. दूसरी तरफ बांग्लादेश जहां राजनीतिक उथल-पुथल इंटरनेशनल शर्मिंदगी के लेवल तक पहुंच चुकी है. जब दोनों देशों के टॉप लीडर्स यानी शहबाज शरीफ और तारिक रहमान मिले तो उनके बीच ऐसा प्यार उमड़ा कि वो अपनी सच्चाई ही भूलकर बड़े-बड़े वादे कर बैठे. एक-दूसरे का हाथ थामकर इन्होंने व्यापार, डिफेंस और कनेक्टिविटी बढ़ाने के हसीन सपने तो ऐसे देखे, जैसे दोनों देशों की तिजोरियों में पैसे संभालने की जगह ही न बची हो.
न्यू यॉर्क के कोने में दो नेताओं का ‘अनोखा’ मिलन
24 सितंबर को जब पूरी दुनिया संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर में गंभीर वैश्विक मुद्दों पर सिर खपा रही थी, तब किनारे में शहबाज शरीफ और तारिक रहमान एक अलग ही खिचड़ी पका रहे थे. दोनों नेताओं की ये मुलाकात बेहद गर्मजोशी से भरी थी. ऐसा लग रहा था मानो दो पुराने बिछड़े दोस्त सालों बाद मिले हों और एक-दूसरे का हाल-चाल पूछ रहे हों.
इस मीटिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश ने अपने पुराने गिले-शिकवो भुलाकर आगे बढ़ने की कसम खाई. दोनों ने कहा कि वो अपने रिश्तों में आई ‘पॉजिटिव रफ्तार’ को आगे बढ़ाएंगे. लेकिन सवाल ये उठता है कि जिस देश की खुद की हालत पतली हो, वो दूसरे का सहारा कैसे बनेगा? खैर, कूटनीति में तो मीठी बातें करने के पैसे नहीं लगते, इसलिए दोनों नेताओं ने भी वादों की झड़ी लगा दी.
‘कंगाल’ देश और ‘बर्बाद’ देश के 3 बड़े वादे
- व्यापार और निवोश (Trade & Investment): शहबाज और तारिक ने वादा किया कि वो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवोश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे. अब मजेदार बात ये है कि पाकिस्तान के पास खुद निवोश करने के लिए फूटी कौड़ी नहीं है और वो दुनिया भर में कटोरा लेकर घूम रहा है, लेकिन वादे ऐसे किए जा रहे हैं जैसे ढाका में अरबों डॉलर लगाने वाले हों!
- कनेक्टिविटी और टूरिज्म (Connectivity & Tourism): दूसरा बड़ा वादा कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने का है. यानी दोनों देश चाहते हैं कि उनके लोग आसानी से आ-जा सकें और एक-दूसरे के यहां घूम सकें. दोनों देशों में बी
- डिफेंस और सुरक्षा सहयोग (Defence & Security): सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र यानी डिफेंस में सहयोग बढ़ाने की बात कही है. जो देश अपनी सेना का खर्चा चलाने के लिए कर्ज मांग रहा हो, वो दूसरे देश की सुरक्षा में क्या योगदान देगा, ये सोचने वाली बात है!
खाली तिजोरी और सपनों का खजाना: 18 महीने से पक रही है खिचड़ी
अगर आप सोच रहे हैं कि ये प्यार अचानक उमड़ पड़ा है, तो ऐसा नहीं है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का दावा है कि पिछले 18 महीनों से दोनों देशों के बीच प्यार की ये पटकथा लिखी जा रही थी. अगस्त 2025 में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने ढाका का दौरा किया था. उस दौरान दोनों देशों के बीच 8 बड़े समझौते और एमओयू (MoU) साइन हुए थे.
इन्हीं समझौतों में से एक था, ‘पाकिस्तान-बांग्लादेश नॉलेज कॉरिडोर’. इसके तहत बांग्लादेशी छात्रों को पाकिस्तान की यूनिवर्सिटीज में स्कॉलरशिप देने का वादा किया गया था. अब सोचिए, जिस पाकिस्तान में बिजली-पानी के लाले पड़े हों, वहां के ‘नॉलेज कॉरिडोर’ से बांग्लादेश के छात्रों को क्या नॉलेज मिलेगी, ये तो खुदा ही जाने!
अगर व्यापार के आंकड़ों पर नजर डालें, तो वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच महज 865 मिलियन डॉलर का व्यापार हुआ था. अब इस छोटे से आंकड़े को अचानक पहाड़ों जितना बड़ा बनाने का सपना दोनों नेता देख रहे हैं.
चुनाव जीते तारिक रहमान और खुश हो गए शहबाज शरीफ
बांग्लादेश में इसी साल फरवरी 2026 में चुनाव हुए थे, जिसमें तारिक रहमान की जीत हुई थी. तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही इस्लामाबाद में बैठे शहबाज शरीफ की बांछें खिल गईं. शहबाज ने तुरंत फोन उठाकर तारिक को बधाई दी और पाकिस्तान आने का न्योता दे डाला. तारिक रहमान ने भी मुस्कुराते हुए न्योता स्वीकार किया और दोनों ने वादा किया कि वो लगातार एक-दूसरे के टच में रहेंगे.
1971 के ऐतिहासिक घावों को दरकिनार करके अब दोनों देश ‘आपसी सम्मान, आपसी समझ और सहयोग’ की बातें कर रहे हैं. ढाका के अधिकारियों का कहना है कि वो केवल उन क्षेत्रों में काम करना चाहते हैं जिससे दोनों देशों के आम लोगों का भला हो. लेकिन हकीकत ये है कि दोनों देशों की जनता इस समय महंगाई और बेरोजगारी से परेशान है, जबकि उनके नेता न्यूयॉर्क में बैठकर ‘म्युचुअल रिस्पेक्ट’ का राग अलाप रहे हैं.
UN की कुर्सी पर बांग्लादेश और शहबाज की मक्खनबाजी
न्यूयॉर्क की इस मुलाकात में शहबाज शरीफ ने तारिक रहमान को 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्षता संभालने पर जमकर बधाइयां दीं. शहबाज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मंच पर बांग्लादेश जो भी कदम उठाएगा, पाकिस्तान उसका पूरा समर्थन करेगा.
इसे कहते हैं ‘एक तीर से दो शिकार’! एक तरफ तो शहबाज शरीफ अपने नए दोस्त की तारीफ करके उन्हें खुश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना एक नया साथी जुटाने की कोशिश कर रहे थे. दोनों नेताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि वो यूएन (UN) जैसे बड़े मंचों पर मिलकर काम करेंगे.
क्या सच में बदलेगी पाकिस्तान-बांग्लादेश की किस्मत या सिर्फ हवा में रहेंगे दावे?
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या एक कंगाल और दूसरा आर्थिक रूप से पस्त देश मिलकर वाकई कोई कमाल कर पाएंगे या ये सब सिर्फ एक कूटनीतिक ड्रामा है?
- आर्थिक जमीनी हकीकत: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय वेंटिलेटर पर है और उसे अपना घर चलाने के लिए बार-बार अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आगे हाथ फैलाना पड़ता है. वहीं बांग्लादेश भी हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे में व्यापार और निवोश के बड़े-बड़े वादे सिर्फ कागजों पर ही अच्छे लगते हैं.
- कनेक्टिविटी का पेंच: दोनों देशों के बीच सीधी कनेक्टिविटी बढ़ाना इतना आसान नहीं है. बीच में भारत की मौजूदगी और भौगोलिक दूरी के कारण सीधी उड़ानों या समुद्री रास्तों को चालू करना बेहद खर्चीला और मुश्किल काम है.
- जनता की जरूरतें: दोनों देशों की जनता को इस समय सस्ती रोटी, बिजली और रोजगार की सख्त जरूरत है. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि न्यूयॉर्क के किसी आलीशान होटल में बैठकर उनके नेताओं ने कितने कागजों पर दस्तखत किए हैं.
कुल मिलाकर देखा जाए तो शहबाज शरीफ और तारिक रहमान की ये मुलाकात एक ऐसी फ्लॉप फिल्म की तरह है जिसका पोस्टर तो बड़ा चमकीला है, लेकिन सिनेमाहॉल के अंदर कोई कहानी नहीं है. ‘एक कंगाल और दूसरे बर्बाद’ का ये नया-नया प्यार देखने में भले ही बड़ा दिलचस्प लगे, लेकिन बिना मजबूत अर्थव्यवस्था के ये 3 बड़े वादे केवल जुमलों से ज्यादा कुछ नजर नहीं आते. अब देखना ये होगा कि क्या न्यूयॉर्क का ये रोमांस ढाका और इस्लामाबाद की कड़वी हकीकत को बदल पाता है या फिर एक और बेनतीजा मुलाकात बनकर सिमट जाता है.