नई दिल्ली (IAS vs IFS Salary). संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा है. यूपीएससी रिजल्ट के बाद हर साल अजीब सी होड़ देखने को मिलती है- ज्यादातर टॉपर्स की पहली पसंद ‘आईएएस’ (भारतीय प्रशासनिक सेवा) ही होती है. लोग जिले की कमान संभालना और सीधे जनता के बीच काम करना ही असली पावर मानते हैं. आईएएस को रुतबा, गाड़ी, बंगला और अल्टीमेट पावर का पूरक माना जाता है. इसके आगे IFS (भारतीय विदेश सेवा) की चमक फीकी पड़ जाती है.
आईएएस या आईएफएस, कौन ज्यादा कमाते हैं?
यूपीएससी की एक ही परीक्षा, एक ही मेरिट लिस्ट और एक ही ट्रेनिंग से निकलने वाले IAS और IFS अफसर का करियर पहले दिन से ही अलग रास्ते पर चल पड़ता है. शुरुआत में दोनों का बेसिक वेतन लगभग समान होता है. लेकिन 5 साल के अनुभव के बाद दोनों की दुनिया बदल जाती है.
- आईएएस होम कैडर में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट या SDM के पद पर जमीनी कामकाज संभालते हैं. वहीं आईएफएस विदेशी धरती पर भारतीय दूतावास में ‘थर्ड सेक्रेटरी’ के पद पर तैनात होते हैं.
- यहीं से असली वित्तीय खेल शुरू होता है. आईएफएस अफसर को मिलने वाला फॉरेन अलाउंस (विदेशी भत्ता) अमेरिकी डॉलर में और टैक्स-फ्री होता है.
विदेशी पोस्टिंग और डॉलर में मिलने वाली कमाई का फायदा
आईएफएस अफसर की ज्यादातर सर्विस विदेशों में भारतीय दूतावासों और उच्च आयोगों में बीतती है. ब्रिटेन, अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में पोस्टिंग होने पर डॉलर में मिलने वाला भत्ता कुल आमदनी को कई गुना बढ़ा देता है. अंकुर वारिकू के मुताबिक, 27 साल की उम्र तक IFS अफसर की कुल मासिक कमाई 3-4 लाख रुपये तक पहुंच जाती है. वहीं, आईएएस अफसर को सरकारी बंगला, गाड़ियां और स्टाफ जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन उनकी इन-हैंड सैलरी इस विदेशी भत्ते के आगे कम दिखने लगती है.
रिटायरमेंट तक आते-आते कौन मारता है बाजी?
करियर के 15वें साल तक IAS अधिकारी देश के किसी जिले या राज्य सचिवालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे होते हैं. वहीं IFS अधिकारी प्रमुख देशों के दूतावासों में ‘फर्स्ट सेक्रेटरी’ या ‘काउंसलर’ बन जाते हैं. इस दौरान आईएफएस को शानदार एंबेसी अपार्टमेंट के साथ-साथ बच्चों की मुफ्त पढ़ाई जैसी प्रीमियम सुविधाएं मिलती हैं.
बात जब रिटायरमेंट (लगभग 35 साल की सेवा के बाद) की आती है तो फर्क और साफ हो जाता है.
आईएएस अधिकारी देश के ‘सेक्रेटरी’ के पद से रिटायर होता है, जिसके बाद उसे पेंशन तो मिलती है लेकिन सरकारी बंगला और सुविधाएं वापस ले ली जाती हैं. इसके उलट, आईएफएस अधिकारी ‘एंबेसडर’ (राजदूत) के रूप में रिटायर होता है. वे अपनी सेवा का अधिकांश हिस्सा टैक्स-फ्री डॉलर कमाने में बिताते हैं. इसलिए वित्तीय रूप से उनका रिटायरमेंट बेहद मजबूत होता है.
IAS प्रमोशन चार्ट और बेसिक सैलरी का समझें गणित
आईएएस अधिकारियों को मिलने वाली बेसिक सैलरी उनके सेवा के वर्षों और पे-लेवल के आधार पर तय होती है, जिसका स्ट्रक्चर नीचे चेक कर सकते हैं:
- 1-4 साल: एसडीएम/अंडर सेक्रेटरी (लेवल 10) – बेसिक सैलरी: 56,100 रुपये
- 5-8 साल: एडीएम/डिप्टी सेक्रेटरी (लेवल 11) – बेसिक सैलरी: 67,700 रुपये
- 9-12 साल: डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट/डायरेक्टर (लेवल 12) – बेसिक सैलरी: 78,800 रुपये
- 13-16 साल: डीएम/सिलेक्शन ग्रेड डायरेक्टर (लेवल 13) – बेसिक सैलरी: 1,18,500 रुपये
- 16-24 साल: डिविजनल कमिश्नर/जॉइंट सेक्रेटरी (लेवल 14) – बेसिक सैलरी: 1,44,200 रुपये
- 25-30 साल: प्रिंसिपल सेक्रेटरी/एडिशनल सेक्रेटरी (लेवल 15) – बेसिक सैलरी: 1,82,200 रुपये
- 34-36 साल: चीफ सेक्रेटरी/सेक्रेटरी (GoI) (लेवल 17) – बेसिक सैलरी: 2,25,000 रुपये
- 37+ साल: कैबिनेट सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (लेवल 18) – बेसिक सैलरी: 2,50,000 रुपये