PB Fintech यानी पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी के शेयरों में शुक्रवार को एक बार फिर दबाव देखने को मिला. कारोबार के दौरान शेयर करीब 3.88% गिरकर 1,163 रुपये के आसपास आ गया. इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को कंपनी के शेयर में करीब 36% की भारी गिरावट आई थी. गुरुवार की इस गिरावट में कंपनी के कैपिटल मार्केट से 31,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कम हो गए थे. अब ब्रोकरेज हाउसों ने कंपनी की कमाई और शेयर के वैल्यूएशन को लेकर अपनी राय में बदलाव किया है.
HSBC ने शेयर को डाउनग्रेड कर ‘Hold’ कर दिया है और टारगेट प्राइस 2,100 रुपये से घटाकर 1,150 रुपये कर दिया है. इसी बीच कई लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर पीबी फिनटेक की शुरुआत कैसे हुई थी और किसने की थी.
पिता को हुआ था भारी नुकसान
साल 2008 में जब ग्लोबल आर्थिक संकट का दौर चल रहा था, तब यशीष दहिया के परिवार के साथ बीमा से जुड़ी एक ऐसी घटना हुई, जिसने उनके सोचने का तरीका बदल दिया. उनके पिता को एक बीमा एजेंट के जरिए लाखों रुपये का नुकसान हुआ. पहली नजर में पूरा लेन-देन सामान्य दिखाई देता था, लेकिन बाद में पता चला कि उनके साथ धोखा हुआ है. इस घटना ने यशीष दहिया को यह सोचने पर मजबूर किया कि आम लोगों के लिए बीमा की शर्तों और पॉलिसी को समझना कितना मुश्किल है और वे गलत जानकारी के कारण कैसे नुकसान उठा सकते हैं.
इसी अनुभव के बाद यशीष दहिया ने बीमा खरीदने की प्रक्रिया को आसान और ट्रांसपरेंसी बनाने का फैसला किया. उन्होंने आलोक बंसल और अवनीश निर्जर के साथ मिलकर 2008 में Policybazaar की शुरुआत की. प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बीमा कंपनियों की पॉलिसियों को एक जगह लाकर ग्राहकों को उनकी तुलना करने और अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनने की सुविधा दी गई. शुरुआत में यह मॉडल नया था, लेकिन आसान जानकारी और डिजिटल तरीके से बीमा खरीदने की सुविधा के कारण धीरे-धीरे लोगों के बीच इसकी पहुंच बढ़ती गई.
कब हुई शुरुआत?
कंपनी को शुरुआत में 4 जून 2008 को ‘Etechaces Marketing and Consulting Pvt. Ltd.’ के नाम से शामिल किया गया. बाद में 2020 में इसका नाम बदलकर PB Fintech Pvt. Ltd. किया गया और 2021 में यह पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनी. कंपनी ने 2008 में पॉलिसीबाजार (Policybazaar) प्लेटफॉर्म शुरू किया. उस समय बीमा खरीदने का प्रोसेस आम ग्राहकों के लिए काफी मुश्किल था और अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना करना आसान नहीं था. पॉलिसी बाजार ने अलग-अलग बीमा योजनाओं को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर ग्राहकों को कीमत और फीचर्स की तुलना करने का ऑप्शन दिया. कंपनी के अनुसार उसका मॉडल ग्राहक को ज्यादा विकल्प और ट्रांसपरेंट देने पर आधारित था.
कंपनी का फोकस
इसके बाद 2014 में कंपनी ने Paisabazaar लॉन्च किया. इसका फोकस ग्राहकों को पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे प्रोडक्ट्स का कंपैरिजन और चयन में मदद करना था. आज PB Fintech के प्रमुख ब्रांड Policybazaar और Paisabazaar हैं और कंपनी बीमा तथा लेंडिंग से जुड़े डिजिटल मार्केटप्लेस के तौर पर काम करती है. शुक्रवार की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर IRDAI के अंतिम नियमों और कंपनी पर असर पर होगा. फिलहाल ब्रोकरेज अनुमानों में कमाई पर संभावित दबाव की बात कही गई है, जबकि अंतिम नियामकीय फैसला अभी आना बाकी है.
आखिर क्यों गिर रहा है PB Fintech का शेयर?
शेयर में इस बड़ी गिरावट की वजह बीमा रेगुलेटर IRDAI के द्वारा किए गए नए बदलावों के प्रस्ताव को माना जा रहा है. IRDAI ने बीमा कंपनियों के Expense of Management (EoM) को कम करने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा ओपन-आर्किटेक्चर चैनल, जैसे ब्रोकर और बैंक, के जरिए बेचे जाने वाले बीमा प्रोडक्ट्स पर कमीशन को सीमित करने का प्रपोजल है. प्रपोजल के मुताबिक हेल्थ इंश्योरेंस के रिन्यूअल और पोर्टिंग पर कमीशन 5-10% तक सीमित किया जा सकता है. वहीं, लाइफ इंश्योरेंस में पहले साल का कमीशन पॉलिसी की अवधि के आधार पर 5-20% के बीच रखने का प्रस्ताव है. अभी ये प्रस्तावित बदलाव हैं और अंतिम नियम आने के बाद स्थिति साफ होगी.
Policybazaar पर क्यों पड़ा असर?
PB Fintech का सबसे बड़ा कारोबार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बीमा और लोन जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की तुलना और सेल्स से जुड़ा है. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक Policybazaar को 2008 में लॉन्च किया गया था, जिसका मकसद ग्राहकों को बीमा की ज्यादा जानकारी, विकल्प और ट्रांसपरेंसी देना था. कंपनी को बीमा और लेंडिंग पार्टनर्स से मिलने वाली कमीशन और अन्य फीस उसकी प्रमुख आय का सोर्स है. ऐसे में अगर नए नियमों के कारण बीमा बिक्री पर मिलने वाली फीस या कमीशन कम होता है, तो कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि प्रस्तावित नियमों को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी है. HSBC ने FY28 और FY29 के लिए PB Fintech की प्रति शेयर कमाई यानी EPS के अनुमान में क्रमशः 56% और 17% की कटौती की है. ब्रोकरेज का कहना है कि नए नियमों का कंपनी पर बड़ा असर पड़ सकता है.
मोतिलाल ओसवाल ने भी घटाया टारगेट
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, मोतिलाल ओसवाल ने PB Fintech पर ‘Neutral’ रेटिंग बरकरार रखी है और टारगेट प्राइस 1,150 रुपये किया है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि प्रस्तावित बदलावों से FY28 में कंपनी के कोर ऑनलाइन इंश्योरेंस रेवेन्यू में करीब 30% की कमी आ सकती है. अगर कंपनी लागत घटाकर या अन्य आय बढ़ाकर इस असर की भरपाई नहीं कर पाती है, तो कमाई के अनुमान में करीब 46% तक की कटौती हो सकती है. इसी तरह HSBC ने भी टारगेट प्राइस को 2,100 रुपये से घटाकर 1,150 रुपये कर दिया है. दोनों ब्रोकरेज की रिपोर्ट में नियामकीय बदलावों को शेयर के लिए बड़ा रिस्क बताया गया है.