जमानत के बाद विदेशी नागरिक अगर वापस ना लौटे तो? भारत के पास क्या हथियार, भोपाल वाले एंडरसन का क्या हुआ था

जमानत के बाद विदेशी नागरिक अगर वापस ना लौटे तो? भारत के पास क्या हथियार, भोपाल वाले एंडरसन का क्या हुआ था


मैथ्यू वैनडाइक को रिहा कर दिया गया है. ये अमेरिका का वही नागरिक है, जो म्यांमार बॉर्डर के पास विद्रोही गुटों को ड्रोन और हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहा था. उसके साथ यूक्रेन के भी 6 नागरिक थे. NIA ने इसी साल मार्च में मैथ्यू को गिरफ्तार किया था. ये वही अमेरिकी नागरिक है, जिसको लेकर कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि तिहाड़ में बंद अमेरिकी कैदी भारत के तेल और मसाले वाले खाने से परेशान होकर खुद के लिए चिकन, पास्ता जैसी चीजें मांग रहा था. ये तो हो गया मैथ्यू का इंट्रोडक्शन. नई खबर ये है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने निजी मुचलके पर एक महीने के लिए अपने घर जाने की इजाजत दे दी है. ये मंजूरी बाकी के 6 यूक्रेनी नागरिकों को भी मिली है. लेकिन इससे जुड़े हुए कुछ संजीदा सवाल भी हैं. अगर वैनडाइक एक महीने का टाइम पीरियड बीत जाने के बाद भी वापस नहीं लौटा तो क्या होगा? भारत की तरफ से क्या ऐक्शन लिया जा सकता है? जेल में कैद किसी विदेशी नागरिक को स्वदेश भेजे जाने को लेकर क्या नियम है? भोपाल गैस त्रासदी में वारेन एंडरसन को गिरफ्तार किए जाने के बावजूद अमेरिका से वापस भारत लाने के लिए क्या दांवपेंच आजमाया गया?

अदालत के अनुसार विदेश यात्रा करने का अधिकार भारत के संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकार का ही विस्तार है. एनआईए के स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने सातों आरोपियों की याचिका मंजूर की. विदेश जाने की अनुमति कुछ शर्तों और जरूरी औपचारिकताओं के साथ दी गई है. मैथ्यू वैनडाइक को अमेरिका जाने की अनुमति मिली है. वहीं छह यूक्रेनी नागरिकों हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफांकीव मारियन, होंचारुक मैक्सिम उर्फ मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर को यूक्रेन जाने की अनुमति दी गई है. यह अनुमति उनकी संबंधित फ्लाइट में सवार होने की तारीख से एक महीने तक प्रभावी रहेगी.

विदेशी नागरिकों के लिए भारत का संविधान
भारतीय संविधान की तरफ से विदेशी नागरिकों को भी कुछ मूलभूत अधिकार मिले हुए हैं. लेकिन भारत की संप्रभुता और कानून व्यवस्था प्राथमिकता पर रहती है. इसमें आर्टिकल 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है. यह अधिकार भारतीयों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों पर भी लागू होता है. इसके तहत विदेशी आरोपी को भी निष्पक्ष सुनवाई और कानूनी मदद पाने का अधिकार है. वहीं अनुच्छेद 14 के तहत कानूनी समानता भी मिली है. विदेशी नागरिकों के साथ भी बिना किसी भेदभाव के कानूनी प्रक्रिया चलाई जाती है.

मैथ्यू वैनडाइक

विदेशी कैदी के स्वदेश लौटने का कानून
अब यहां विदेशियों का मामला दो स्थितियों में बंटता है. पहला तो होता है सजायाफ्ता कैदी, जिसे दोष साबित होने के बाद सजा हो चुकी हो. वहीं दूसरा होता है अंडरट्रायल कैदी, जिसका मामला अदालत में पेंडिंग होता है. दोनों ही केस को एक-एक करते समझते हैं.

  1. अगर कैदी को सजा हो चुकी है: किसी विदेशी नागरिक को अगर भारतीय अदालत की तरफ से सजा सुनाई जा चुकी है तो कैदियों के प्रत्यावर्तन अधिनियम, 2003′ (Repatriation of Prisoners Act, 2003) के तहत अपने देश लौट सकता है. बशर्ते भारत का उस देश के साथ कैदियों के हस्तांतरण की संधि होनी चाहिए. कैदी के खिलाफ भारत में कोई अन्य मामला या जांच अभी पेंडिंग ना हो. उसे मृत्युदंड ना मिला हो. आरोपी की अपनी सहमति और दोनों देशों की मंजूरी भी जरूरी है. मंजूरी मिलने पर आरोपी अपनी बकाया सजा अपने गृह देश की जेल में पूरी करता है.
  2. अगर मामला अदालत में है: किसी विदेशी नागरिक पर मामला अगर चल रहा है और वह जमानत पर बाहर है, तो पासपोर्ट ऐक्ट और विदेशी ऐक्ट के तहत उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता है. या उस पर भारत छोड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाता है. जब तक अदालत ट्रायल पूरा होने के बाद उसे बरी ना कर दे या विदेश जाने की अनुमति ना दे दे, वह कानूनी रूप से भारत नहीं छोड़ सकता है.

अगर विदेशी आरोपी भारत वापस ना लौटे तो?
विदेशी आरोपी अगर जमानत मिलने के बाद या पैरोल पर अपने देश भाग जाता है और वापस नहीं लौटता, तो भारत के पास उसे वापस लाने के लिए कड़े नियम और कानून हैं. वो कौन-कौन से हैं, आइए समझते हैं.

  • प्रत्यर्पण ऐक्ट: भारत सरकार विदेशी मामलों के मंत्रालय के जरिए संबंधित देश से उस भगोड़े के प्रत्यर्पण की मांग करती है. Extradition Act, 1962 इसका रास्ता मुहैया कराता है. इसके लिए दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि या सहमति होनी चाहिए.
  • रेड कॉर्नर नोटिस: भारतीय अदालत की तरफ से आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने पर इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया जता है. भारत में इंटरपोल की नोडल एजेंसी सीबीआई है. इससे दुनिया भर में उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकती है.
  • जमानत की जब्ती और संपत्ति की कुर्की: भारत में जमानत देने वाले स्थानीय जमानतदार की जमानत राशि जब्त कर ली जाती है. इसके साथ ही भारत में अगर आरोपी की कोई संपत्ति होती है तो उसको कुर्क करने की कानूनी कार्यवाही की जाती है.
  • देश में एंट्री पर बैन: उस आरोपी नागरिक को भारत की तरफ से ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया जाता है और उसका वीजा स्थायी रूप से रद्द हो जाता है. भविष्य में कभी भी उस आरोपी की एंट्री पर स्थायी तौर पर रोक लगा दी जाती है.

भोपाल त्रासदी के खलनायक का क्या हुआ?

भोपाल गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी और यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन के तत्कालीन चेयरमैन वारेन एंडरसन का मामला इस बारे में अहम है. दिसंबर 1984 में गैस त्रासदी के 3 दिनों के बाद ही वह हालात का जायजा लेने के लिए एंडरसन भोपाल पहुंचा लेकिन एयरपोर्ट पर उतरते ही उसे मध्य प्रदेश की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया. गिरफ्तारी के महज कुछ घंटे के अंदर ही उसे 25 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई.

जमानत मिलते ही के राज्य सरकार के सरकारी विमान से एंडरसन को भोपाल से तुरंत दिल्ली भेजा गया. दिल्ली पहुंचने के बाद एंडरसन बिना किसी रोक-टोक के तुरंत अमेरिका के लिए रवाना हो गया और भारत से बाहर निकल गया. इसको लेकर सवाल उठा कि आखिर वारेन को कैसे बाहर जाने दिया गया? मीडिया की रिपोर्ट और सीनियर अधिकारियों के बयान के अनुसार अमेरिका की तरफ से डिप्लोमेटिक प्रेशर की वजह से तत्कालीन पीएम राजीव गांधी और मध्य प्रदेश के सीएम अर्जुन सिंह ने जल्दबाजी में कदम उठाया.

जेम्स एंडरसन भोपाल गैस त्रासदी

क्या वारेन कभी वापस लौटा?
नहीं, वारेन एंडरसन भारत से जाने के बाद कभी वापस नहीं लौटा. उसने भारतीय अदालतों के कई समन और वारंट को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया. भारतीय जूडिशरी ने उसके खिलाफ कई सख्त कदम उठाए, लेकिन अमेरिकी सरकार की तरफ से सहयोग नहीं मिला. अदालत ने एंडरसन को अदालत में पेश नहीं होने के कारण भगोड़ा घोषित कर दिया और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया.

भारत सरकार और CBI ने कई बार अमेरिकी सरकार से एंडरसन को भारत प्रत्यर्पित करने की औपचारिक मांग की. लेकिन अमेरिका ने यह कहकर भारत की प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी कि भारत द्वारा दिए गए सबूत दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं. अंतिम समय तक एंडरसन अपनी गिरफ्तारी से बचा रहा. 29 सितंबर 2014 को 92 साल की उम्र में वह बिना किसी मुकदमे या सजा का सामना किए दुनिया से चला गया.



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