गांव वालों ने मिलकर बनाया मंदिर, कोई लाया सीमेंट तो कोई सरिया… कारस देव पर ऐसी है अटूट आस्था

गांव वालों ने मिलकर बनाया मंदिर, कोई लाया सीमेंट तो कोई सरिया… कारस देव पर ऐसी है अटूट आस्था


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Ajab Gajab: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में कारस देवता पूजे जाते हैं, जिनके वाहन घोड़े के मंदिर भी बनाए जाते हैं. मान्यता है कि ये देवता इंसानों और पशुओं की रोग बाधा दूर करते हैं और जत्रा में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

Karas Dev Temple: मप्र के छतरपुर जिले में ग्रामीण इलाकों में कारस देवता पूजे जाते हैं जिनके वाहन के मंदिर भी बनाए जाते हैं. ये वाहन घोड़ा होता है. इसी घोड़े से कारस देव मंदिर की पहचान होती है. मान्यता है कि ये भगवान गांव की रक्षा करते हैं. इंसानों से लेकर पशुओं की रोग बाधा दूर करते हैं. साथ ही जत्रा भी लगाया जाता है जहां श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं ग्रामीणों की जुबानी

छतरपुर जिले के भड़रा गांव से जुड़े महोबा के भड़ार गांव के ग्रामीण बताते हैं कि वैसे तो हमारे गांव में शंकर भगवान, राम-कृष्ण और हनुमान जी के मंदिर मौजूद हैं लेकिन हमारे गांव में पीढ़ियों से लोग कारस (गांव की बोलचाल में कारग)देव के बारे में सुनते आए हैं. ये कारस देव बहुत पुराने हैं. गांव में हर तरह की बाधा को दूर करते हैं.

अर्जी लगाते ग्रामीण
ग्रामीण बताते हैं कि साल में कुछ ही ऐसे मौके होते हैं जब कारस देव इंसान के सिरे आते हैं. जहां ग्रामीण अर्जी लगाते हैं और अपने दुःखों का निवारण पाते हैं. रोग बाधा से लेकर भूत प्रेत की बाधा भी ठीक होती है. साथ ही पशुओं के रोग बाधा भी दूर करते हैं. पशुओं में हेर-फेर है तो उनकी बाधा भी दूर करते हैं.

मनोकामनाएं पूरी होने पर बना मंदिर
ग्रामीण बताते हैं कि जिन श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी हुई हैं तो उन्होंने ही गांव में कारस देव का मंदिर बना दिया है. किसी ने सरिया दिया, किसी ने सीमेंट किसी ने ईंटें दीं. इस तरह हमारे गांव में भी मंदिर बन गया है.

घोड़े से होती मंदिर की पहचान
कारस देव के मंदिर की पहचान होती है कि जहां घोड़ा बना होता है. वहीं, कारस देव का मंदिर होता है. दरअसल, कारस देव का वाहन घोड़ा है. इसलिए मंदिर में घोड़ा बनाया जाता है. साथ ही उनक चबूतरा बनाया जाता है.

संतान सुख का देते आशीर्वाद
बुजुर्ग बताते हैं कि जिन दंपति के संतान नहीं होती थी उनको कारस देव ने संतान सुख का आशीर्वाद दिया और उनके संतान हुई. हम तो ये चमत्कार सालों से देख रहे हैं. हर अमावस्या के चौथ को हमारे यहां जत्रा लगता है. गांव के सभी लोग इकट्ठा हो जाते हैं और अपनी समस्याओं का निवारण पाते हैं.

एमपी से लेकर यूपी में बने मंदिर
ग्रामीण बताते हैं कि कारस देव का स्थान सिर्फ छतरपुर के ही ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है बल्कि उत्तरप्रदेश के गांव में भी इनके स्थान बने हुए हैं.

इंसान से बनें देव
ग्रामीण बताते हैं कि कारस देव एक इंसान ही थे. शरीर छोड़ने के बाद तपस्या करने लगे. सैकडों सालों से तपस्या कर रहे हैं और अब वही देव बन गए हैं. लोगों के दुखों को दूर करने के लिए इंसान के सिरे आते हैं और उनकी समस्याओं का निवारण करते हैं.



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