शी जिनपिंग की टेबल पर डोनाल्‍ड ट्रंप ने क्‍यों बिठाए ये 4 बिजनेसमैन, भारत से भी गहरा रिश्‍ता

शी जिनपिंग की टेबल पर डोनाल्‍ड ट्रंप ने क्‍यों बिठाए ये 4 बिजनेसमैन, भारत से भी गहरा रिश्‍ता


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शी जिनपिंग की टेबल पर डोनाल्‍ड ट्रंप ने क्‍यों बिठाए ये 4 बिजनेसमैन?

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Trump-Xi Dinner Diplomacy : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मान में दिए गए स्टेट डिनर में माहौल औपचारिक था, लेकिन कूटनीति बेहद आक्रामक. ट्रंप और शी जिनपिंग की मुख्य ‘हेड टेबल’ पर उनके साथ चार चुनिंदा अमेरिकी बिजनेस टाइकून भी नजर आए. ये थे एलन मस्क, जेन्सन हुआंग, लिसा सू और टिम कुक. इन चारों को शी के आमने-सामने बिठाना महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि ट्रंप की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था.

चार महारथियों में सबसे पहला नाम दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क का था, जिनकी नजरें हमेशा बीजिंग पर टिकी रहती हैं. मस्क की कंपनी टेस्ला के लिए चीन केवल एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि उत्पादन की रीढ़ की हड्डी है. शंघाई में स्थित टेस्ला की गीगाफैक्ट्री कंपनी की सबसे कुशल और बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. इसके अलावा चीनी बाजार में स्थानीय इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों से मुकाबला करने के लिए मस्क को जिनपिंग प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना जरूरी है. (फोटो : रायटर्स)

टेबल पर मौजूद दूसरा सबसे चर्चित चेहरा था एनवीडिया (Nvidia) के संस्थापक और सीईओ जेन्सन हुआंग. जेन्सन हुआंग की कंपनी एनवीडिया उन अत्याधुनिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) और AI चिप्स का निर्माण करती है, जिनके बिना कोई भी देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में आगे नहीं बढ़ सकता. चीन इस समय अत्याधुनिक तकनीक के लिए एनवीडिया के चिप्स का सबसे बड़ा तलबगार है. लेकिन अमेरिकी सरकार के कड़े निर्यात प्रतिबंधों के चलते एनवीडिया अपने सबसे एडवांस चिप्स चीन को नहीं बेच पा रही है. . (फोटो : रायटर्स)

वैश्चिक चिप इंडस्ट्री की दूसरी ताकतवर शख्सियत, एएमडी (AMD) की सीईओ लिसा सू भी डोनाल्‍ड ट्रंप और शी जिनपिंग के साथ हेड टेबल पर शान से बैठी थीं. लिसा सू की कंपनी एएमडी सेमीकंडक्टर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में एनवीडिया को कड़ी टक्कर देती है. चीन में डेटा सेंटर्स, क्लाउड कंप्यूटिंग और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के भीतर एएमडी के प्रोसेसर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं. अमेरिकी प्रतिबंधों की तलवार एएमडी के उन्नत चिप्स पर भी लटकी हुई है. . (फोटो : रायटर्स)

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चौथा और सबसे जाना-पहचाना नाम था दिग्गज कंपनी ऐपल (Apple) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन टिम कुक का, जिन्होंने चीन में अमेरिकी कॉरपोरेट की सबसे बड़ी नींव रखी है. ऐपल पिछले कई दशकों से अपने आईफोन, आईपैड और मैकबुक के निर्माण के लिए फॉक्सकॉन और चीनी असेंबली प्लांट्स पर निर्भर रहा है. चीन ऐपल के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रिटेल बाजार भी है. हालांकि, पिछले कुछ सालों से भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों के चलते टिम कुक ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति पर काम कर रहे हैं. जिनपिंग की मेज पर कुक का बैठना चीन को यह याद दिलाने के लिए काफी था कि यदि नियम सख्त हुए, तो सप्लाई चेन के धागे कैसे ढीले हो सकते हैं. . (फोटो : रायटर्स)

इस हाई-प्रोफाइल डिनर टेबल पर बैठे चारों दिग्गजों का भारत से भी रिश्ता है. चीन में बढ़ते तनाव, सख्त नियमों और वाशिंगटन के कड़े रुख के बीच वे भारत को एक भरोसेमंद विकल्‍प के रूप में देख रही हैं. भारत केवल इन कंपनियों के लिए दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार ही नहीं है, बल्कि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का नया पावरहाउस बनकर उभरा है. . (फोटो : रायटर्स)

भारत के साथ इस नाते को अगर समझना हो, तो टिम कुक और एलन मस्क के कदमों से बेहतर उदाहरण नहीं मिल सकता. टिम कुक ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में आईफोन की मैन्युफैक्चरिंग को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां अब लेटेस्ट आईफोन मॉडल्स भारत में असेंबल होकर पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट हो रहे हैं. वहीं, एलन मस्क अपनी टेस्ला कारों को भारतीय सड़कों पर उतारने और देश में नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के साथ-साथ अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा ‘स्टारलिंक’ को भारत में लॉन्च करने को बेताब हैं. . (फोटो : रायटर्स)

यही समीकरण चिप निर्माता जेन्सन हुआंग और लिसा सू के साथ भी सटीक बैठता है, जो भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के सबसे अहम स्तंभ बन रहे हैं. एनवीडिया के जेन्सन हुआंग ने हाल के दिनों में भारत का दौरा कर देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों और कंपनियों के साथ AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बड़े समझौते किए हैं. वहीं, एएमडी की लिसा सू ने बेंगलुरु में दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल डिजाइन सेंटर खोलकर भारत की धरती पर अपनी अब तक की सबसे बड़ी तकनीकी रिसर्च टीम तैनात कर दी है. . (फोटो : रायटर्स)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जारी ‘चिप वॉर’ इस समय अपने चरम पर है. वाशिंगटन किसी भी कीमत पर चीन को अत्याधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक तक पहुंचने नहीं देना चाहता, जबकि बीजिंग इन प्रतिबंधों को अपनी प्रगति रोकने की साजिश बता रहा है. ऐसे दौर में इन चारों टेक प्रमुखों की मेजबानी ने यह साफ कर दिया कि ये देानों ही देशों के लिए कितने अहम हैं. . (फोटो : रायटर्स)

डोनाल्‍ड ट्रंप ने जिनपिंग के सामने इन चार दिग्गजों को बिठाकर बिना एक भी शब्द बोले चीन को वास्तविक स्थिति का अहसास करा दिया. संदेश साफ था. जब बात अत्याधुनिक AI चिप्स, ग्लोबल सप्लाई चेन और नेक्स्ट-जेनरेशन तकनीक की आएगी, तो चाबी अमेरिका के हाथ में ही रहेगी. अगर चीन ने अपनी नीतियां सख्त रखीं, तो ये दिग्‍गज चीन की जगह भारत जैसे दूसरे देश को ठिकाना बना लेंगे. इसलिए मामला एक हाथ दे, दूसरे ले वाला ही रखें तो ठीक है. .(फोटो : रायटर्स)

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