सतना. अगर आप मध्य प्रदेश के सतना शहर की भीड़भाड़ से दूर कुछ घंटे प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं, तो बरहटा का नरों हिल्स बायोडायवर्सिटी पार्क आपके लिए खास जगह हो सकती है. यहां पहुंचते ही आपको आम शहर वाले पार्क जैसा माहौल नहीं बल्कि पहाड़ी, जंगल, हरियाली और नेचर ट्रेक का अलग ही अनुभव मिलेगा. सबसे खास बात यह है कि इस जगह को सिर्फ घूमने-फिरने के लिए नहीं बनाया गया है बल्कि वन क्षेत्र में कम होती जा रही पेड़-पौधों की प्रजातियों को बचाकर रखने के लिए इसे बायोडायवर्सिटी सेंटर के रूप में विकसित किया गया है. यहां घूमते हुए आपको ऐसी कई प्रजातियों के पेड़-पौधे भी देखने को मिल सकते हैं, जो आम जंगलों में अब आसानी से नजर नहीं आते. पार्क में नेचर ट्रेल, बटरफ्लाई गार्डन, बच्चों के लिए प्ले एरिया, वॉच टावर, बैठने के लिए शेड और बेंच जैसी सुविधाएं भी हैं. वहीं पहाड़ी से आसपास का हरियाली भरा नजारा इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देता है.
लोकल 18 को जानकारी देते हुए डिप्टी रेंजर सतेंद्र शुक्ला ने बताया कि नरों हिल्स बायोडायवर्सिटी पार्क का निर्माण साल 2023 में शुरू किया गया था. वहीं अगस्त 2025 से इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया. इसे सामान्य पार्क की तरह नहीं बल्कि जैव विविधता को बचाने और लोगों को प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इस पूरे क्षेत्र के करीब 20 हेक्टेयर हिस्से को रिजर्व रखा गया है लेकिन 30 हेक्टेयर क्षेत्र को बायोडायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित किया गया है.
30 हेक्टेयर में अलग-अलग तरह का विकास
उन्होंने बताया कि विकसित किए गए 30 हेक्टेयर में करीब 10 हेक्टेयर क्षेत्र में पार्क से जुड़े स्ट्रक्चर और पर्यटकों की सुविधाएं तैयार की गई हैं. बाकी 20 हेक्टेयर हिस्से को प्राकृतिक वन क्षेत्र के रूप में रखा गया है ताकि यहां का प्राकृतिक माहौल बना रहे. अलग-अलग प्रजातियों को मिलाकर पार्क में 10000 से ज्यादा पौधे लगाए गए हैं. इन पौधों के बारे में लोगों को जानकारी देने के लिए जगह-जगह उनके नाम के बोर्ड भी लगाए गए हैं. इससे यहां आने वाले स्कूली और कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के साथ पौधों और जंगल को करीब से समझने का मौका मिलता है.
जंगल जैसा अनुभव और घूमने की सुविधाएं
पार्क में आने वाले लोगों के लिए नेचर ट्रेल तैयार की गई है, जहां चलते हुए पहाड़ी और वन क्षेत्र को करीब से देखा जा सकता है. इसके अलावा वॉच टावर से आसपास के पहाड़ी और हरे-भरे इलाके का नजारा देखने को मिलता है. वन विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए प्रदूषण मुक्त इलेक्ट्रिक साइकिलों की व्यवस्था भी की है, जिससे पार्क के बड़े हिस्से को आसानी से एक्सप्लोर किया जा सकता है.
मेन गेट पर भी जरूरी सुविधाएं
पार्क में पहुंचने के बाद पर्यटकों को अंदर ही पार्किंग की सुविधा मिलती है. इसके अलावा पीने के पानी के लिए वॉटर कूलर और शौचालय की व्यवस्था भी की गई है. पार्क को इस तरह विकसित किया गया है कि परिवार, बच्चों, विद्यार्थियों, प्रेमी युगल, दोस्तों और प्रकृति को करीब से देखने वाले पर्यटकों सभी को यहां कुछ खास मिले क्योंकि इस पार्क का मकसद सिर्फ लोगों को घुमाना नहीं बल्कि पेड़-पौधों और जैव विविधता के बारे में जानकारी देना भी है.
जिप लाइन समेत होंगे नए काम
नरों हिल्स बायोडायवर्सिटी पार्क का विकास अभी पूरा नहीं हुआ है. सतेंद्र शुक्ला ने आगे बताया कि जैसे-जैसे सरकार से फंड मिलता जाएगा, यहां और सुविधाएं विकसित की जाएंगी. आने वाले समय में जिप लाइन समेत कई नए डेवलपमेंट किए जाने की योजना है, यानी आने वाले दिनों में पर्यटकों के लिए यहां घूमने और एडवेंचर से जुड़ी सुविधाएं और बढ़ सकती हैं. फिलहाल करीब 3.45 करोड़ रुपये की लागत से पार्क का मौजूदा विकास पूरा किया गया है.
टाइमिंग, प्रवेश शुल्क और दूरी
बरहटा में बना यह पार्क सतना शहर से 18 किलोमीटर से ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए शहर और आसपास के लोग यहां आसानी से पहुंच सकते हैं. पार्क में आने के लिए वन क्षेत्र की टाइमिंग लागू है. यह सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है. पार्क में अलग-अलग माध्यम से आने वाले लोगों के लिए अलग इको टूरिज्म शुल्क रखा गया है. जो व्यक्ति पैदल उस हिस्से तक जाता है, तो उसके लिए 10 रुपये शुल्क है. दोपहिया वाहन से आने पर वाहन समेत प्रवेश शुल्क 25 रुपये है. आरटीओ के नियम के अनुसार उस वाहन पर अधिकतम दो लोग ही प्रवेश कर सकते हैं. चौपहिया वाहन के लिए 100 रुपये शुल्क है, जिसमें अधिकतम 6 लोग शामिल हो सकते हैं. मिनी बस के लिए 20 लोगों तक 250 रुपये शुल्क है जबकि बड़ी बस के लिए 500 रुपये शुल्क रखा गया है. बड़ी बस में यात्रियों की संख्या उसके परमिट के अनुसार होगी.
प्रकृति, पढ़ाई और घूमने का मौका एक साथ
नरों हिल्स बायोडायवर्सिटी पार्क की खासियत यह है कि यहां घूमने के साथ प्रकृति को समझने का मौका भी मिलता है. एक तरफ पहाड़ी से दिखने वाला हरियाली भरा नजारा लोगों को आकर्षित करता है, तो दूसरी तरफ संरक्षित पेड़-पौधों की अलग-अलग प्रजातियां इसे विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए उपयोगी बनाती हैं. सतना से कम दूरी, कम प्रवेश शुल्क और प्राकृतिक माहौल की वजह से यह जगह शहर के आसपास घूमने के लिए एक अलग विकल्प बनकर सामने आई है.