Pali Om Shaped Temple: राजस्थान के पाली में दुनिया का पहला 3D ओम मंदिर, आसमान से दिखता है असली अजूबा

Pali Om Shaped Temple: राजस्थान के पाली में दुनिया का पहला 3D ओम मंदिर, आसमान से दिखता है असली अजूबा


Last Updated:

Om Shaped Temple in Pali Rajasthan: राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में बना ‘ओम’ आकार का मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर हो रहा है. 30 सालों की कड़ी मेहनत के बाद बनकर तैयार हुए इस 4 मंजिला मंदिर की असली भव्यता आसमान से देखने पर ही नजर आती है. मंदिर परिसर में 1008 शिव प्रतिमाएं, 12 ज्योतिर्लिंग, 2000 नक्काशीदार पिलर और एक खूबसूरत जलाशय मौजूद है.

ख़बरें फटाफट

Pali: क्या आपने कभी इस बात की कल्पना की है कि अगर संपूर्ण ब्रह्मांड की सबसे पवित्र और अलौकिक ध्वनि यानी ‘ओम’ (ॐ) को एक भौतिक आकार दे दिया जाए, तो वह कैसा दिखाई देगा. अमूमन हम और आप किसी भी मंदिर की भव्य दीवारों और मूर्तियों के बीच भगवान की तलाश करते हैं. लेकिन आज हम आपको राजस्थान के पाली जिले के एक ऐसे रहस्यमयी और अद्भुत कोने में लेकर चलते हैं, जहां खुद मंदिर की विशाल दीवारें ही भगवान शिव का पवित्र नाम जप रही हैं. यह एक ऐसा इकलौता मंदिर है, जिसे पूरी तरह से निहारने और उसकी असली भव्यता को समझने के लिए आपको जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान की ऊंचाइयों में जाना पड़ेगा. जब आप अंतरिक्ष या आसमान से इस संरचना को देखते हैं, तो यह महज कंक्रीट और पत्थरों का कोई ढांचा नजर नहीं आता, बल्कि राजस्थान की रेतीली छाती पर साक्षात लिखा हुआ ‘ओम’ उभर कर सामने आता है. आइए जानते हैं पाली जिले के जाडन गांव में स्थित इस दुनिया के सबसे अनोखे आर्किटेक्चर और इसके 30 सालों के अनसुने सफर के बारे में.

अगर आप राजस्थान के पाली जिले में स्थित जाडन गांव के इस मंदिर के मुख्य द्वार के सामने खड़े होंगे, तो आपको केवल इसकी भव्य दीवारें, ऊंचे गुंबद और पत्थरों पर की गई खूबसूरत नक्काशी ही दिखाई देगी. लेकिन जैसे ही आप जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर उठकर ड्रोन कैमरे, हेलीकॉप्टर या फिर गूगल अर्थ सैटेलाइट के जरिए आसमान से इसे निहारेंगे, तो आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी. आसमान से देखने पर आपको ऐसा प्रतीत होगा कि जैसे किसी ने हरी-भरी धरती पर सुनहरे और गुलाबी पत्थरों से एक बहुत बड़ा ‘ओम’ उकेर दिया है. ओम की जो घुमावदार रेखाएं होती हैं, वे असल में इस मंदिर के बड़े-बड़े गलियारे और नक्काशीदार ब्लॉक हैं. वहीं, ओम के ऊपर जो चंद्राकार आकृति होती है, उस स्थान पर एक बेहद खूबसूरत और विशाल जलाशय (तालाब) का निर्माण किया गया है. सबसे ऊपर स्थित ‘बिंदु’ वाले स्थान पर 135 फीट ऊंचा मुख्य शिखर बनाया गया है. यह 3D ओम दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जो ब्रह्मांडीय दृष्टिकोण को दर्शाता है.

30 सालों का तप और वास्तुकला की ऐतिहासिक चुनौती
इस अद्भुत और अकल्पनीय मंदिर की नींव आज से लगभग तीन दशक पहले वर्ष 1995 में स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज द्वारा रखी गई थी. राजस्थान के इस बंजर और सूखे इलाके में 250 एकड़ से भी ज्यादा जमीन पर इस जटिल वास्तुकला को आकार देना कोई आसान काम नहीं था. ओम के नक्शे में कोई भी रेखा सीधी नहीं होती है, इसलिए बिना किसी सीधी दीवार के इस बहुमंजिला विशालकाय इमारत को संतुलित करना देश-विदेश के बड़े-बड़े इंजीनियर्स के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक चुनौती था. हजारों कारीगरों की दिन-रात की अनवरत मेहनत, 30 वर्षों की कठोर तपस्या और बंशी पहाड़पुर के नक्काशीदार पत्थरों को तराशे जाने के बाद यह ऐतिहासिक मंदिर आज अपने पूर्ण स्वरूप में बनकर तैयार हुआ है.

1008 शिव प्रतिमाएं और 12 ज्योतिर्लिंगों का अनूठा संगम
इस चार मंजिला भव्य आश्रम परिसर के अंदर अध्यात्म और वास्तुकला का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो हर किसी को हैरान कर देता है. मंदिर के इस विशाल परिसर में कुल 1008 अलग-अलग कक्ष और शिव प्रतिमाएं विधि-विधान से स्थापित की गई हैं. इसके साथ ही, श्रद्धालुओं को इसके अंदर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन एक ही जगह पर करने का परम सौभाग्य भी मिलता है. पूरे आश्रम परिसर में करीब 2000 पिलर (खंभे) बनाए गए हैं, जिन पर बहुत ही बारीक और सुंदर सनातनी नक्काशी उकेरी गई है. यहां गुरुदेव की समाधि के साथ-साथ ध्यान (Meditation) और योग के लिए विशाल हॉल भी बनाए गए हैं, जहां दुनियाभर से लोग मानसिक शांति की तलाश में आते हैं. मानव निर्मित इमारतों के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसे जमीन के बजाय ‘कॉस्मिक व्यू’ (Cosmic View) से डिजाइन किया गया है. यही कारण है कि आज पूरी दुनिया से लोग इस अजूबे को अपनी आंखों से देखने के लिए खिंचे चले आ रहे हैं.



Source link