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Rajasthan BJP Politics : बीजेपी ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए राजस्थान का प्रभारी बदल दिया है. अब राजस्थान की जिम्मेदारी राधामोहनदास अग्रवाल से लेकर हरियाणा के कद्दावर नेता संजय भाटिया को दे दी गई है. राधामोहनदास अग्रवाल राजस्थान के करीब सवा दो साल प्रभारी रहे. माना जा रहा है कि उनका राजस्थान संगठन से सही ढंग से सामजंस्य नहीं बैठ पा रहा था. वहीं उनकी बयानबाजी से भी पार्टी खुश नहीं थी. इसलिए राजस्थान का प्रभार उनसे लेकर संजय भाटिया को दिया गया है.
राधामोहनदास अग्रवाल अपने बयानों को लेकर खासा चर्चा में रह चुके हैं.
जयपुर. बीजेपी संगठन में हुए फेरबदल में राजस्थान प्रभारी बदल दिया गया है. बीजेपी ने राजस्थान के प्रभारी राधा मोहनदास अग्रवाल की जगह अब हरियाणा के कद्दावर नेता संजय भाटिया को सूबे का प्रभारी बनाया है. आरएसएस कैडर के नेता संजय भाटिया हरियाणा बीजेपी यूनिट में महामंत्री जैसे अहम पद पर रह चुके हैं. राजस्थान के पिछले तीन बीजेपी प्रभारियों में से अग्रवाल का कार्यकाल सबसे कम रहा है. वे करीब 26 महीने राजस्थान के प्रभारी रहे. जबकि उनसे पहले अरुण सिंह साढ़े तीन साल से ज्यादा 44 महीने राजस्थान के प्रभारी रहे. उनसे से पहले अविनाश राय खन्ना पांच साल से ज्यादा समय तक राजस्थान बीजेपी के प्रभारी रहे. खन्ना करीब 64 महीने सूबे के प्रभारी रहे. लेकिन अग्रवाल की 26 माह में ही राजस्थान से विदाई के कई कारण गिनाए जा रहे हैं.
राठौड़ पर की गई टिप्पणी भारी पड़ गई थी
राधामोहनदास अग्रवाल के राजस्थान में आते ही शुरुआत में सूबे के दिग्गज नेता राजेन्द्र राठौड़ को लेकर की गई टिप्पणी भारी पड़ गई थी. बवाल मचने पर बाद में उनको सफाई भी देनी पड़ी थी. यह किस्सा अगस्त 2024 का है. उस समय बीजेपी की सदस्यता अभियान कार्यशाला के दौरान राजेंद्र राठौड़ फोन पर बात करने के लिए कुछ देर कार्यशाला से बाहर आए तो राधामोहनदास उन पर भड़क गए. उन्होंने मंच से ही राठौड़ पर वार करते हुए कहा कि वो पार्टी से बड़े नहीं हैं. अग्रवाल बोले मेरी सभी पर नजर है चाहे बैठक में आए उन पर या फिर जो नहीं आए पर भी.
अग्रवाल की भाषा से राठौड़ समर्थक भड़क गए थे
राधामोहनदास ने बैठक में मंच से कहा कि ये राठौड़ की अनुशासनहीनता है. उन्होंने बैठक में अनुपस्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की. अग्रवाल ने जिस तरह की भाषा में राठौड़ को लेकर बात कही उससे राठौड़ समर्थक भड़क गए. राजस्थान में जगह जगह राधामोहनदास के पुतले फूंके गए और विरोध प्रदर्शन हुआ. हालात देखकर राजेंद्र राठौड़ ने आगे आकर विरोध प्रदर्शन को गलत बताते हुए कहा वो पार्टी के अनुशासित कार्यकर्ता हैं. उसके बाद राधामहनदास को भी बैकफुट पर आकर सफाई देनी पड़ी थी.
दूसरा मामला राधामोहनदास की ओर से कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है. टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम में राधामोहनदास ने कहा कि सचिन पायलट न तो टोंक के और न ही राजस्थान के मूल निवासी हैं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि बाहरी व्यक्ति को विधायक बनाकर राजस्थान का अपमान किया गया है. उन्होंने पायलट की राजनीतिक वफादारी पर भी संदेह जताया था. इसके बाद कांग्रेस भड़क गई और आरोप लगाया कि राधामोहनदास को राजस्थान की समझ नहीं है.
बीजेपी यूनिट और प्रभारी के बीच दूरियां बढ़ने लग गई थी
राधामोहनदास की इस तरह की बयानबाजी से पार्टी असहज हो गई. इससे प्रदेश के दिग्गज नेताओं में नाराजगी हो गई. संगठन महामंत्री बी एल संतोष एक बार जब जययुर आए तब भी ये मुद्दा उठा था. इससे राजस्थान की बीजेपी यूनिट और प्रभारी के बीच दूरियां बढ़ने लग गई. इस राधामोहनदास ने राजस्थान के दौरे कम कर दिए. पार्टी की कई अहम बैठकों और कार्यक्रमों से राधा मोहनदास नदराद रहे. उनका झुकाव अधिकतर उत्तर प्रदेश की ओर ही रहा. बताया जा रहा है कि उसके बाद वे यूपी में सक्रिय होना चाहते थे. उसके बाद कुछ महीने पहले ही तय माना जा रहा था राजस्थान में प्रभारी बदला जाएगा. इंतजार बस निकाय चुनावों का था.