पटना. जमुई की घटना के बाद बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस फिर तेज हो गई है. आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नीतीश कुमार सरकार की शराबबंदी नीति पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने जमुई की घटना के आरोपियों के शराब तस्करी से जुड़े होने का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में शराबबंदी का प्रयोग सफल नहीं हुआ है और इससे नुकसान हो रहा है.
शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में बिहार की पुरानी आबकारी नीति और शराबबंदी लागू होने से पहले के राजस्व का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के सत्ता में आने से पहले राबड़ी देवी सरकार में वह आबकारी मंत्री थे और उस समय आबकारी विभाग से करीब 319 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था. उनके मुताबिक, नीतीश कुमार सरकार में आबकारी नीति में बदलाव के बाद शराब से मिलने वाला राजस्व बढ़कर करीब 3,500 करोड़ रुपये हो गया.
‘शराब की उपलब्धता बढ़ी, घर-घर पहुंचने लगी’
शिवानंद तिवारी ने दावा किया कि राजस्व में इस बढ़ोतरी से यह पता चलता है कि बिहार में शराब की उपलब्धता काफी बढ़ गई थी और शराब घर-घर तक पहुंचने लगी थी. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि यहां तक कि पारचून की दुकानों पर भी शराब मिलने लगी थी. आरजेडी नेता ने शराब की बढ़ती उपलब्धता के सामाजिक प्रभाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महिलाओं की ओर से इसका विरोध होने लगा था. उनके मुताबिक, महिलाओं की शिकायत थी कि शराब की वजह से परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और उनके लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है.
‘लड़कियों की साइकिल और पोशाक का पैसा कहां से आएगा?’
शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में मुजफ्फरपुर की एक सभा का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं ने वहां शराब को लेकर नीतीश कुमार के सामने विरोध दर्ज कराया था. उन्होंने दावा किया कि उस दौरान नीतीश कुमार ने लड़कियों को साइकिल और पोशाक देने की योजनाओं पर होने वाले खर्च का हवाला देते हुए पूछा था कि इसका पैसा कहां से आएगा. शिवानंद तिवारी के मुताबिक, इसके बाद नीतीश कुमार ने पहले देशी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और बाद में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी गई.
‘शराबबंदी के बाद बने शून्य को शराब माफिया ने भरा’
आरजेडी नेता ने आरोप लगाया कि पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद शराब की मांग और आपूर्ति के बीच बने शून्य को शराब माफिया ने भर दिया. उन्होंने दावा किया कि शराब माफिया का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि पुलिस भी उनसे डरती है. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में सूखे नशे के बढ़ते प्रचलन पर भी चिंता जताई. शिवानंद तिवारी ने कहा कि इसके कारण युवा बर्बाद हो रहे हैं. उन्होंने अपने पोस्ट में साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार का शराबबंदी का प्रयोग सफल नहीं हुआ और इससे नुकसान हो रहा है.
‘सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए’
शिवानंद तिवारी ने सरकार से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि शराबबंदी को लेकर सभी दलों के बीच आम राय बनाने की कोशिश होनी चाहिए. उन्होंने लिखा कि कोई भी सरकार या व्यक्ति भले के लिए कोई प्रयोग करता है, लेकिन अगर वह सफल नहीं होता है तो उससे पीछे हट जाना ही बुद्धिमानी है. इसी तर्क के साथ उन्होंने बिहार सरकार से शराबबंदी की मौजूदा व्यवस्था पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया है.
शिवानंद तिवारी का यह बयान ऐसे समय आया है जब जमुई की घटना के बाद शराब तस्करी और बिहार में शराबबंदी की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. उनके बयान से बिहार की शराब नीति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है.