400 साल पुरानी झील, 300 साल पुराने मंदिर; बारिश के बाद निखर उठा सागर का यह कोना

400 साल पुरानी झील, 300 साल पुराने मंदिर; बारिश के बाद निखर उठा सागर का यह कोना


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Lakha Banjara Lake: अच्छी बारिश के बाद सागर झील की रौनक लौट आई है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से लोग घूमने आ रहे हैं. चहल-पहल बढ़ने से छोटे दुकानदारों और नाविकों को फिर से काम मिलने लगा है, जिससे उनके चेहरों पर खुशी है.

Lakha Banjara Lake: जिस तरह से मिश्र नील नदी की देन है और ठीक उसी तरह से सागर शहर लाखा बंजारा की देन हैं. 400 साल पुरानी यह झील 400 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैली हुई है. पिछले कुछ दिनों में हुई लगातार और जोरदार बारिश की वजह से अब यह झील पानी से लबालब हो गई हैं. अब इसमें चलने वाली लहरें कभी सूरज की रोशनी पढ़ने पर तारों के जैसे चमकती हुई नजर आती है. तो कभी बीच में उठने वाली यह लहरें नागिन के जैसी चलती हुई किनारे तक आती हैं. तो कभी सपनों की तरह बीच में ही टूट जाती हैं. अब इन्हीं उठती, बैठती, तैरती, अठखेलिया करती इन लहरों को देखने के लिए शहर वासी तालाब के किनारों पर जाकर बैठते हैं तो आनंदित होते और यहां के प्राकृतिक वातावरण को एंजॉय करते हैं. तालाब के किनारे घूमने पर लोगों की थकान और तनाव दूर हो जाते हैं.

छोटे दुकानदारों के चेहरे खिले
बारिश होने की वजह से सागर तालाब लबालब होने से अब यहां की रौनक भी वापस लौट आई है. चहल-पहल फिर से दिखाई देने लगी है और यहां न सिर्फ शहर के लोग बल्कि ग्रामीण क्षेत्र से भी लोग घूमने के लिए पहुंचने लगे हैं. यहां छोटे-छोटे दुकानदारों के चेहरों पर फिर से खुशी की चमक दिखाई देने लगी है. क्योंकि परिवार के लोग घूमने के लिए पहुंचते हैं, जहां बच्चों के खेल खिलौने मंदिरों की पूजा सामग्री पोशाक, खाने पीने के लिए लगने वाले छोटे-छोटे स्टॉल पर भीड़ भाड़ दिखाई देने लगी है. नाविकों को एक बार फिर से काम मिलने लगा और यहां नाव की संख्या फिर से दो दर्जन से अधिक हो गई है. इन्हीं नाव में सवार होकर युवा कपल, फैमिलिया, बाहर से आने वाले लोग, स्टूडेंट, बच्चे झील में सैर सपाटा करने के लिए निकल पड़ते हैं.

झील आकर्षण का केंद्र
यह झील केवल पर्यटन के लिहाज से ही आकर्षण का केंद्र नहीं है बल्कि यहां पर सांस्कृतिक विरासत और आस्था का भी अनूठा संगम देखने को मिलता है. जहां 300 साल पुराने दर्जनों मंदिर इसके किनारे पर स्थित है. झील का 2 साल पहले सौंदर्य करण का कार्य भी पूरा हुआ. जहां पर घूमने के लिए पाथवे बना हुआ है. इसको हेरिटेज लुक देने के लिए राजस्थानी पैटर्न में छतरियां बनी हुई है. राजस्थान के धौलपुर पत्थरों से घाटों का निर्माण हुआ. इसके किनारे पर मियांबाकी तकनीक से जंगल भी खड़ा किया गया है. कहीं नमक गृह वाटिका तो कहीं नवग्रह मंडप है. कहीं वर्टिकल गार्डन लगाकर इनको और भी खूबसूरत बनाया गया है. तालाब के चारों तरफ लगी इजरायली और स्ट्रीट लाइटें भी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है.

तालाब के किनारे रोज घूमने आने वाले संजय सोनी कहते हैं कि यहां पर घूमने बैठने के लिए बहुत अच्छी जगह है. बारिश होने के बाद तालाब फिर से पूरा भर गया है और अब यहां पर शहर के लोग आने लगे है, लेकिन यहां कॉरिडोर पर जुहू चौपाटी लगती है और उसकी वजह से ट्रैफिक होता है उससे पैदल निकलने में दिक्कत होती है.

मुकेश साहू बताते हैं कि पहले हम कॉरिडोर पर घूमने के लिए जाते थे लेकिन जब से बारिश हुई है. तालाब भरा है तो यहां की खूबसूरती बढ़ गई है और अब घाट पर ही घूमने के लिए आने लगे हैं. यहां पर लोग फैमिली के साथ आते हैं. वातावरण अच्छा है और कोई गुंडागर्दी नहीं होती है माहौल खुशनुमा है.



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