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MP Weather Update: मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई 2 अक्टूबर के आसपास होगी, लेकिन उससे पहले बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया सिस्टम प्रदेश को फिर भिगो सकता है. 21 सितंबर से कई जिलों में झमाझम बारिश के आसार. जानें अब तक कितनी बारिश हुई.
mp weather (pic credit-freepik)
Aaj Ka MP Weather: मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है. प्रदेश से मानसून की सामान्य विदाई 2 अक्टूबर के आसपास होती है. हालांकि, इससे पहले सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है. बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया मौसम सिस्टम प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ा सकता है. मौसम विज्ञान केंद्र भोपाल के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 18 सितंबर की शाम तक ऊपरी हवा में चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना है. इसके असर से 19 सितंबर की शाम तक लो प्रेशर एरिया बन सकता है.
अगर यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए मजबूत होता है, तो मध्य प्रदेश में बारिश फिर तेज हो सकती है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 21 सितंबर से प्रदेश में एक मजबूत वेदर सिस्टम एक्टिव हो सकता है. इसके असर से कई जिलों में झमाझम बारिश होने की संभावना है.
अभी भारी बारिश का अलर्ट नहीं
20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है. हालांकि, प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है. वहीं, अरब सागर में भी लो प्रेशर एरिया सक्रिय है. इन दोनों मौसम प्रणालियों का प्रदेश पर फिलहाल ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है. स्थानीय स्तर पर बनने वाले मौसम के कारण कुछ जिलों में तेज बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं.
कई इलाकों में हुई बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच बारिश दर्ज की गई. वहीं, दतिया के सेंवढ़ा में लगभग ऐसा ही मौसम रहा है. भोपाल और सीहोर समेत कुछ अन्य इलाकों में भी हल्की बारिश हुई.
प्रदेश में अब तक 33.1 इंच बारिश
मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो चुकी है. यह सामान्य बारिश के मुकाबले 88.7 प्रतिशत है. प्रदेश में मानसून के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है. अब तक 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिले औसत से पीछे हैं. तो कुल मिलाकर प्रदेश में अभी सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम बारिश हुई है. आने वाले दिनों में नया सिस्टम सक्रिय होने पर बारिश का यह अंतर कम हो सकता है.