Space News | Science Update | स्पेस में हुई अनोखी घटना, भौतिकी के नियमों को धता बताकर 136 डिग्री मुड़ा और फिर उल्टी चाल चलने लगा यह ग्रह

Space News | Science Update | स्पेस में हुई अनोखी घटना, भौतिकी के नियमों को धता बताकर 136 डिग्री मुड़ा और फिर उल्टी चाल चलने लगा यह ग्रह


नई दिल्ली: लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक नए ग्रह का पता लगाया है. यह ग्रह अपने तारे के घूमने की दिशा के ठीक विपरीत चक्कर लगा रहा है. इस अनोखे ग्रह को जीजे 3090 बी नाम दिया गया है. आकार में यह नेप्च्यून के बराबर एक छोटा ग्रह है. सामान्य तौर पर अंतरिक्ष में सभी ग्रह अपने तारे की दिशा में ही घूमते हैं. यह ग्रह लगभग 136 डिग्री के झुकाव के साथ पूरी तरह उल्टी चाल चल रहा है. इस खोज ने ग्रह बनने के सदियों पुराने मॉडल्स पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

स्पेस के सारे नियम तोड़कर यह ग्रह उल्टी दिशा में दौड़ रहा है

सौरमंडल में ग्रहों का निर्माण गैस और धूल के विशाल बादलों से होता है. जब कोई तारा बनता है तो उसके चारों तरफ घूमती हुई डिस्क से ही ग्रह तैयार होते हैं. इसी वजह से ग्रह अपने तारे के घूमने की दिशा को ही अपना लेते हैं. हमारे सौरमंडल के सभी प्रमुख ग्रह इसी प्राकृतिक नियम का पालन करते हैं. लेकिन जीजे 3090 बी ने इस नियम को पूरी तरह से नकार दिया है.

रिसर्चर्स ने एनआईआरपीएस नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ से मिले डेटा का एनालिसिस किया. इसमें पता चला कि इस ग्रह की ऑर्बिट लगभग 136 डिग्री झुकी हुई है. इसका मतलब यह है कि यह ग्रह सच में उल्टी दिशा में घूम रहा है.

लीड रिसर्चर एंड्रयू विंटर ने कहा, ‘यह एक बेहद असाधारण प्लैनेटरी सिस्टम है. यह ग्रह सिर्फ झुका हुआ नहीं है, बल्कि पूरी तरह उल्टी दिशा में परिक्रमा कर रहा है.’

क्या किसी अदृश्य शिकारी तारे ने इस ग्रह की कक्षा को पलट दिया?

जब भी वैज्ञानिकों को कोई उल्टा घूमता ग्रह मिलता है, तो वे किसी बाहरी शक्ति को जिम्मेदार मानते हैं. आमतौर पर कोई भारी भरकम ग्रह या पास का कोई दूसरा तारा ऐसी स्थिति पैदा करता है. किसी बड़े ऑब्जेक्ट का ग्रैविटेशनल खिंचाव छोटे ग्रह को उसकी सामान्य कक्षा से भटका देता है. समय बीतने के साथ यह खिंचाव ग्रह को इतना झुका देता है कि वह उल्टा घूमने लगता है.

रिसर्च टीम ने इस सिस्टम में भी ऐसे ही किसी भारी साथी की तलाश शुरू की. वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें कोई छिपा हुआ बड़ा ग्रह मिल जाएगा. लेकिन काफी गहराई से खोज करने के बाद भी उन्हें वहां कोई दूसरा ऑब्जेक्ट नहीं मिला. यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के रिसर्चर यान कार्तरेट ने कहा, ‘हमने किसी भारी साथी की तलाश की जो इस ग्रह को मोड़ सके, लेकिन ऐसा कोई सबूत नहीं मिला.’

क्या जन्म के समय ही इस सौरमंडल की नींव में कोई बदलाव हुआ था?

  • जब बाहरी टक्कर या खिंचाव का सिद्धांत खारिज हो गया, तो वैज्ञानिकों ने नए एंगल से सोचना शुरू किया. रिसर्चर्स का मानना है कि यह गड़बड़ी ग्रह बनने के बाद नहीं हुई होगी. इसकी जड़ें शायद इस सिस्टम के जन्म के समय से जुड़ी हैं.
  • एक नई थ्योरी के मुताबिक इस तारे ने अपने आसपास से गैस और धूल की एक दूसरी डिस्क खींची होगी. यह दूसरी डिस्क पहले वाली डिस्क से बिल्कुल अलग दिशा में घूम रही थी. अगर इस ग्रह का जन्म उस दूसरी डिस्क से हुआ है, तो इसकी उल्टी दिशा स्वाभाविक हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि यहां कोई हिंसक टक्कर नहीं हुई थी.
  • यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा के प्रोफेसर विंसेंट बोरियर ने कहा, ‘किसी दूसरी डिस्क से नए सिस्टम का बनना एक बेहद रोमांचक विचार है. इससे पता चलता है कि आसपास का माहौल ग्रहों की बनावट पर गहरा असर डालता है.’

छोटे और ठंडे एम ड्वार्फ तारों का यह राज इतना अहम क्यों है?

तकनीकी नजरिए से भी यह खोज एक मील का पत्थर मानी जा रही है.

  1. जीजे 3090 बी अब तक का सबसे छोटा ग्रह है जिसका थ्री डी ऑर्बिटल टिल्ट मापा गया है. यह ग्रह एक एम ड्वार्फ तारे के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है. एम ड्वार्फ तारे आकार में काफी छोटे और ठंडे होते हैं.
  2. हमारी आकाशगंगा में ऐसे तारों की संख्या सबसे ज्यादा पाई जाती है. मंद रोशनी की वजह से इन तारों के पास मौजूद छोटे ग्रहों का अध्ययन करना काफी मुश्किल होता है. नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी नई तकनीक ने इस तरह के बारीक मेजरमेंट्स को मुमकिन बना दिया है.
  3. इस सफलता से भविष्य में दूसरे मंद तारों के आसपास छिपे ग्रहों को समझना बेहद आसान हो जाएगा. इससे हमें अपनी गैलेक्सी के सबसे आम तारों के बारे में कई नई जानकारियां मिलेंगी.

क्या अरबों साल पुराने जीवाश्म की तरह यह ऑर्बिट अतीत का सच बयां कर रहा?

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस अजीब सिस्टम की गुत्थी सुलझाने के लिए अभी और ऑब्जर्वेशन्स की जरूरत पड़ेगी. अंतरिक्ष में असामान्य कक्षाएं एक तरह के जीवाश्म की तरह काम करती हैं.

वे उस सिस्टम में अरबों साल पहले घटी घटनाओं का रिकॉर्ड अपने अंदर समेटे रखती हैं. इस ग्रह का अजीब झुकाव यह साबित करता है कि इसका इतिहास हमारी कल्पना से ज्यादा जटिल रहा है.

पुरानी थ्योरीज यह मानती थीं कि ग्रहों का जन्म एक शांत और व्यवस्थित माहौल में होता है. लेकिन यह नई खोज इशारा करती है कि तारों के आसपास की शुरुआत काफी उथल पुथल भरी हो सकती है.

भविष्य के स्पेस टेलीस्कोप्स जब ऐसे और सिस्टम्स को स्कैन करेंगे, तो शायद हमें यह पता चलेगा कि उल्टे घूमते ग्रह ब्रह्मांड में कितने आम हैं. यह खोज खगोलविदों को अपने पुराने मॉडल्स नए सिरे से लिखने पर मजबूर कर रही है.



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