Char Dham In Just Five Hours

Char Dham In Just Five Hours


Char Dham In Just Five Hours: दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद या एनसीआर के अन्य शहरों से चारधाम यात्रा पर जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना अब अपनी रफ्तार पकड़ चुकी है, जिसके पूरा होने के बाद दिल्ली से चारधाम यात्रा करने वालों का कम से कम 6 घंटे का कीमती समय बचेगा. इस प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ और बद्रीनाथ यात्रा का लगभग 80 फीसदी सफर अब सुरक्षित ट्रेनों के जरिए तय किया जा सकेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल इस रेल लाइन परियोजना का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. हाल ही में इस प्रोजेक्ट की 10 किलोमीटर लंबी दूसरी सबसे बड़ी ‘एस्केप टनल-1’ का आखिरी ब्रेकथ्रू पूरा कर लिया गया है. ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के डीजीएम ओपी मालगुडी के मुताबिक, प्रोजेक्ट का 75 फीसदी काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. यह रेल लाइन आधिकारिक तौर पर 2029 तक पूरी तरह चालू हो जाएगी, जबकि इसके एक हिस्से यानी शिवपुरी से ब्यासी तक ट्रेनें 2028 से ही दौड़ने लगेंगी. इससे उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के तीर्थयात्रियों को भी अभूतपूर्व लाभ मिलेगा.

5 से 6 घंटे में दिल्ली से पहुंचेंगे कर्णप्रयाग

  • फिलहाल दिल्ली से कार या बस के जरिए कर्णप्रयाग पहुंचने में कम से कम 12 से 13 घंटे का लंबा और थका देने वाला सफर तय करना पड़ता है. लेकिन इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद:
  • वंदे भारत या अन्य ट्रेनों से दिल्ली से ऋषिकेश 3-4 घंटे और आगे ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर महज 2 से 2.5 घंटे में पूरा हो जाएगा.
  • इसके अलावा, दिल्ली-मेरठ-ऋषिकेश नमो भारत (RRTS) रैपिड रेल प्रोजेक्ट के 2029 तक पूरा होने की संभावना है, जिससे दिल्ली से ऋषिकेश का सफर सिर्फ ढाई घंटे रह जाएगा.
  • इस प्रकार, यात्री दिल्ली से महज 5 से 6.5 घंटे के भीतर सीधे कर्णप्रयाग पहुंच सकेंगे.

गढ़वाल मंडल के 5 जिलों और 12 स्टेशनों से गुजरेगी ट्रेन
उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली इन पांच जिलों के लिए यह रेल लाइन किसी वरदान से कम नहीं होगी. इस रूट पर कुल 12 रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें ऋषिकेश, मुनि की रेती, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर गढ़वाल, धारी देवी, तिलणी (रुद्रप्रयाग), घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग शामिल हैं. खास बात यह है कि इस रेल लाइन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा और अधिकांश स्टेशन सुरंगों के अंदर बनाए गए हैं. इसके चलते भारी बारिश, भूस्खलन (Landslide) या मलबे के गिरने जैसी आपदाओं के दौरान भी ट्रेन सेवाएं बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेंगी.

सेना और सुरक्षा के लिए भी रणनीतिक रूप से अहम
चीन सीमा (LAC) से नजदीकी के कारण यह रेल प्रोजेक्ट भारतीय सेना के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. सीमावर्ती इलाकों तक सेना के जवानों, भारी हथियारों, टैंकों और रसद सामग्री की पहुंच बेहद कम समय में सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे देश की उत्तरी सीमाएं और अधिक मजबूत होंगी. इसके अलावा, स्थानीय किसानों, बागवानों और व्यापारियों को भी अपने उत्पाद सीधे दिल्ली-एनसीआर की बड़ी बाजारों तक कम समय में पहुंचाने का बड़ा अवसर मिलेगा. चारधाम यात्रा के दौरान तोताघाटी और सिरोबगड़ जैसे जोखिम भरे और जाम वाले रास्तों से मुक्ति मिलने के साथ ही, संकरे पहाड़ी मोड़ों पर होने वाले सड़क हादसों से भी यात्रियों की जान सुरक्षित बचेगी. बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा अब पहले से कहीं अधिक सुगम और आरामदायक होने जा रही है.



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