‘पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था बलूचिस्तान’… UNSC को खुला पत्र, स्वतंत्र देश की मान्यता की मांग

‘पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था बलूचिस्तान’… UNSC को खुला पत्र, स्वतंत्र देश की मान्यता की मांग


Last Updated:

Balochistan Open Letter to UNSC: आजादी की लड़ाई लड़ रहे ‘The Republic of Balochistan’ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नाम खुले पत्र में पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र देश की मान्यता की मांग की है. पत्र में 1947-48 के इतिहास, बलूचिस्तान की मौजूदा स्थिति और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय जांच और निगरानी की मांग की गई है. बलूचिस्तान

Zoom

Balochistan’s Open Letter to the UN Security Council (Letter Background AI Image)

नई दिल्ली: बलूचिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नाम एक खुला पत्र जारी किया गया है. 23 सितंबर 2026 को जारी इस पत्र में बलूचिस्तान ने अपने इतिहास, मौजूदा स्थिति और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं. पत्र में संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान के राजनीतिक और ऐतिहासिक दर्जे की स्वतंत्र जांच कराने और उसे एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के सवाल पर विचार करने की अपील की गई है.

यह पत्र आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे “The Republic of Balochistan” संगठन ने जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि बलूचिस्तान के लोगों ने पाकिस्तान के साथ स्वेच्छा से राजनीतिक विलय को स्वीकार नहीं किया था. पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बलोच लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार पर विचार करने की मांग की गई है.

1947-48 के इतिहास का हवाला
पत्र में बलूचिस्तान के इतिहास को लेकर 1947 और 1948 की घटनाओं का उल्लेख किया गया है. इसमें खास तौर पर तत्कालीन कलात राज्य और पाकिस्तान के बीच हुए घटनाक्रम को आधार बनाया गया है.

पत्र के अनुसार, 1947 में कलात की विधायी संस्थाओं ने पाकिस्तान में विलय के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था. 1948 में भी कलात की दोनों सदनों में पाकिस्तान के साथ विलय का विरोध हुआ था. ऐतिहासिक स्रोतों में भी कलात की पाकिस्तान के साथ विलय को लेकर उस समय के विवाद और बातचीत का उल्लेख मिलता है.

27 मार्च 1948 को कलात के खान ने पाकिस्तान के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. इस घटनाक्रम की व्याख्या को लेकर इतिहास में अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं. बलूचिस्तान की ओर से जारी पत्र में दावा किया गया है कि यह फैसला सैन्य दबाव के बीच लिया गया था. वहीं, पाकिस्तान के आधिकारिक इतिहास में इस घटना को कलात के पाकिस्तान में विलय के रूप में दर्ज किया जाता है.



Source link